राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020-
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 , राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1968 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 के बाद स्वतंत्र भारत की तीसरी शिक्षा नीति है। यह शिक्षा नीति भारत की शिक्षा नियत है जिसे 29 जुलाई 2020 को घोषित किया गया यह नीत अंतरिक्ष वैज्ञानिक कस्तूरीरंगन के अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट पर आधारित है इस नीत के अंतर्गत मानव संसाधन संसाधन मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय का दिया गया। सन 1985 में राजीव गांधी ने शिक्षा मंत्रालय का नाम बदलकर मानव संसाधन मंत्रालय कर दिया था राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत केंद्र तथा राज्य का सहयोग से शिक्षा क्षेत्र पर देश के जीडीपी का 6% हिस्से के बराबर निवेश का लक्ष्य रखा गया है। 10+2 शैक्षिक मॉडल के स्थान पर अब शैक्षिक पाठ्यक्रम 5+3+3+4 शिक्षा प्रणाली के आधार पर विभाजित करने की बात कही गई है। नए शिक्षा नीत का मुख्य उद्देश्य शिक्षा और सीखने पर पुनः ध्यान आकर्षित करना है। नई शिक्षा नीति में कक्षा 5 तक मातृभाषा, स्थानीय भाषा या क्षेत्रीय भाषा के रूप में शिक्षा पर बल दिया गया है। 5+3+3+4मे 5 मैं 5 का अर्थ है 5 वर्ष अर्थात 3 वर्ष से 8 वर्ष तक की आयु के बच्चे 3 से 8 वर्ष के बच्चे को पढ़ाने के लिए पाठ्यक्रम को दो समूह में बांटा जाएगा जिसमें 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए आंगनवाड़ी बाल वाटिका, प्री स्कूल के माध्यम से मुफ्त सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा दी जाएगी जबकि 6 से 8 वर्ष के बच्चे को कक्षा 1 तथा कक्षा 2 में शिक्षा दी जाएगी
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार सकल नामांकन अनुपात को 2030 तक 100% लाने का अनुपात रखा गया है भारत के शिक्षा मंत्री के पहले शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल है। पहली बार शिक्षा नीति 1968 इंदिरा गांधी के शासनकाल में आया था। 1992 में दूसरी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 में कुछ संशोधन किया गया था। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में दो करोड़ बच्चों को जो शिक्षा से दूर रहे हैं उन्हें मुख्यधारा में शामिल किया जाएगा एमफिल की समाप्त कर दी गई है।
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