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06/05/25

पांच उंगलियों का सिद्धांत

चीन की हमेशा ही विस्तारवादी नीति रही है। जिससे वह अपने पड़ोसी देश से सीमा संबंधित विवाद रहे हैं। जिसमें उसकी हथेली एवं पांच उंगलियों के सिद्धांत के तहत हथेली तिब्बत है जबकि उसकी पांच उंगलियां भूटान नेपाल अरुणाचल प्रदेश सिक्किम एवं लद्दाख है चीन इन प्रदेश के नागरिक को नत्थी वीजा प्रदान करता है

22/08/24

भारत के राष्ट्रपति की सूची

भारत के राष्ट्रपति की सूची इस प्रकार है ¹:

1. डॉ. राजेंद्र प्रसाद (1950-1962)
2. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (1962-1967)
3. जाकिर हुसैन (1967-1969)
4. वी. वी. गिरि (1969-1974)
5. फखरुद्दीन अली अहमद (1974-1977)
6. नीलम संजीव रेड्डी (1977-1982)
7. ज्ञानी जैल सिंह (1982-1987)
8. आर. वेंकटरमण (1987-1992)
9. शंकर दयाल शर्मा (1992-1997)
10. के. आर. नारायणन (1997-2002)
11. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम (2002-2007)
12. प्रतिभा देवीसिंह पाटिल (2007-2012)
13. प्रणब मुखर्जी (2012-2017)
14. राम नाथ कोविंद (2017-2022)
15. द्रौपदी मुर्मू (2022-वर्तमान)


भारत के प्रधानमंत्रियों की सूची

भारत के प्रधानमंत्रियों की सूची निम्नलिखित है:

1. पंडित जवाहरलाल नेहरू (1947-1964)
2. गुलजारीलाल नंदा (1964-1966)
3. लाल बहादुर शास्त्री (1966)
4. गुलजारीलाल नंदा (1966-1967)
5. इंदिरा गांधी (1967-1977)
6. मोरारजी देसाई (1977-1979)
7. चरण सिंह (1979-1980)
8. इंदिरा गांधी (1980-1984)
9. राजीव गांधी (1984-1989)
10. विश्वनाथ प्रताप सिंह (1989-1990)
11. चंद्र शेखर (1990-1991)
12. पी. वी. नरसिम्हा राव (1991-1996)
13. अटल बिहारी वाजपेयी (1996)
14. एच. डी. देवेगौड़ा (1996-1997)
15. इंद्र कुमार गुजराल (1997-1998)
16. अटल बिहारी वाजपेयी (1998-2004)
17. मनमोहन सिंह (2004-2014)
18. नरेंद्र मोदी (2014-वर्तमान)

यह सूची भारत के स्वतंत्रता के बाद से अब तक के सभी प्रधानमंत्रियों को शामिल करती है।

भारत के उपराष्ट्रपति

भारत के उपराष्ट्रपति की सूची इस प्रकार है 
1. राजेन्द्र प्रसाद
2. जाकिर हुसैन
3. सर्वपल्ली राधाकृष्णन
4. वी वी गिरि
5. गोपाल स्वरूप पाठक
6. फ़ख़रुद्दीन अली अहमद
7. बी डी जत्ती
8. नीलम संजीव रेड्डी
9. मोहम्मद हिदायतुल्ला
10. ज्ञानी जैल सिंह
11. रामस्वामी वेंकटरमण
12. शंकर दयाल शर्मा
13. के आर नारायणन
14. कृष्ण कान्त
15. एपीजे अब्दुल कलाम
16. भैरोंसिंह शेखावत
17. मोहम्मद हामिद अंसारी
18. प्रतिभा पाटिल
19. प्रणब मुखर्जी
20. राम नाथ कोविन्द
21. वेंकैया नायडू
22. जगदीप धनखड़

लोकसभा अध्यक्ष

नमस्कार 
लोकसभा अध्यक्ष की सूची इस प्रकार है  
1. गणेश वासुदेव मावलंकर
2. एम. अयंगर
3. सरदार हुकुम सिंह
4. नीलम संजीव रेड्डी
5. गुरुदयाल सिंह दिल्लों
6. बाबू जगजीवन राम
7. यशवंत सिंह परमार
8. सीताराम केसरी
9. पी. ए. संगमा
10. शिवराज पाटिल
11. जी. एम. सी. बालयोगी
12. बाल राम जाखड़
13. Shivraj Patil
14. पी. ए. संगमा
15. जी. एम. सी. बालयोगी
16. सोमनाथ चटर्जी
17. तारिक अनवर
18. पी. ए. संगमा
19. जी. एम. सी. बालयोगी
20. मनोहर जोशी
21. सोमनाथ चटर्जी
22. बाल राम जाखड़
23. जी. एम. सी. बालयोगी
24. सोमनाथ चटर्जी
25. तारिक अनवर
26. के. एस. राव
27. सोमनाथ चटर्जी
28. तारिक अनवर
29. सोमनाथ चटर्जी
30. मीरा कुमार
31. सुमित्रा महाजन
32. ओम बिरला

23/06/24

*✍️भारतीय संविधान के भाग* *Parts of the Indian Constitution*

*✍️भारतीय संविधान के भाग* 
*Parts of the Indian Constitution*

*1. संघ एवं उसका राज्य क्षेत्र*
1. Union and its Territory  
अनुच्छेद: 1 से 4  
Articles: 1 to 4

*2. नागरिकता*
2. Citizenship  
अनुच्छेद: 5 से 11  
Articles: 5 to 11

*3. मौलिक अधिकार*
3. Fundamental Rights  
अनुच्छेद: 12 से 35  
Articles: 12 to 35

*4. नीति-निर्देशक तत्व* 
4. Directive Principles  
अनुच्छेद: 36 से 51  
Articles: 36 to 51

*4 क: मूल कर्तव्य*
4A: Fundamental Duties  
अनुच्छेद: 51 (क)  
Article: 51A

*5. संघ* 
5. The Union  
अनुच्छेद: 52 से 151  
Articles: 52 to 151

*6. राज्य*  
6. The States  
अनुच्छेद: 152 से 237  
Articles: 152 to 237

*7. पहली अनुसूची के भाग ख के राज्य*  
7. States in Part B of the First Schedule  
अनुच्छेद: 238 (निरसित)  
Article: 238 (Repealed)

*8. संघ राज्य क्षेत्र*  
8. Union Territories  
अनुच्छेद: 239 से 242  
Articles: 239 to 242

*9. पंचायतें*  
9. Panchayats  
अनुच्छेद: 243, 243-क से  
Articles: 243, 243A onwards

*9 क: नगरपालिकाएँ*
9A: Municipalities  
अनुच्छेद: 243-त से 243-य  
Articles: 243P to 243ZG

*9 ख: सहकारी समितियाँ*  
9B: Co-operative Societies  
अनुच्छेद: 243 यज से यजट  
Articles: 243ZH to 243ZT

*10. अनुसूचित और जनजातीय क्षेत्र*
10. Scheduled and Tribal Areas  
अनुच्छेद: 244, 244-क  
Articles: 244, 244A

*11. संघ और राज्यों के बीच संबंध* 
11. Relations between the Union and the States  
अनुच्छेद: 245 से 263  
Articles: 245 to 263

*12. वित्त, संपत्ति, संविदाएँ और वाद*  
12. Finance, Property, Contracts, and Suits  
अनुच्छेद: 264 से 300-क  
Articles: 264 to 300A

*13. भारत के राज्य क्षेत्र के भीतर व्यापार, वाणिज्य एवं समागम*  
13. Trade, Commerce, and Intercourse within the Territory of India  
अनुच्छेद: 301 से 307  
Articles: 301 to 307

*14. संघ एवं राज्यों के अधीन सेवाएँ*  
14. Services under the Union and the States  
अनुच्छेद: 308 से 323  
Articles: 308 to 323

*14 क: अधिकरण*  
14A: Tribunals  
अनुच्छेद: 323 क, 323 ख  
Articles: 323A, 323B

*15. निर्वाचन*
15. Elections  
अनुच्छेद: 324 से 329  
Articles: 324 to 329

*16. कुछ वर्गों के संबंध में विषय उपबंध* 
16. Special Provisions Relating to Certain Classes  
अनुच्छेद: 330 से 342  
Articles: 330 to 342

*17. राजभाषा*  
17. Official Language  
अनुच्छेद: 343 से 351  
Articles: 343 to 351

*18. आपात उपबंध*  
18. Emergency Provisions  
अनुच्छेद: 352 से 360  
Articles: 352 to 360

*19. प्रकीर्ण*  
19. Miscellaneous  
अनुच्छेद: 361 से 367  
Articles: 361 to 367

*20. संविधान संशोधन*
20. Amendment of the Constitution  
अनुच्छेद: 368  
Article: 368

*21. अस्थायी, संक्रामणकालीन व विशेष उपबंध* 
21. Temporary, Transitional, and Special Provisions  
अनुच्छेद: 369 से 392  
Articles: 369 to 392

*22. संक्षिप्त नाम, प्रारंभ, हिन्दी में प्राधिकृत पाठ और निरसन*  
22. Short Title, Commencement, Authoritative Text in Hindi, and Repeals  
अनुच्छेद: 393 से 395  
Articles: 393 to 395

*✍️भारत के प्रधानमंत्री (Prime Ministers of India

*✍️भारत के प्रधानमंत्री (Prime Ministers of India)*

1. *जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru)*
   - कार्यकाल (Term): 15.08.1947 – 27.05.1964

2. *लालबहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri)*
   - कार्यकाल (Term): 09.06.1964 – 11.01.1966

3. *इंदिरा गांधी (Indira Gandhi)*
   - कार्यकाल (Term): 24.01.1966 – 24.03.1977

4. *मोरारजी देसाई (Morarji Desai)*
   - कार्यकाल (Term): 24.03.1977 – 28.07.1979

5. *चौधरी चरण सिंह (Chaudhary Charan Singh)*
   - कार्यकाल (Term): 28.07.1979 – 14.01.1980

6. *इंदिरा गांधी (Indira Gandhi)*
   - कार्यकाल (Term): 14.01.1980 – 31.10.1984

7. *राजीव गांधी (Rajiv Gandhi)*
   - कार्यकाल (Term): 31.10.1984 – 02.12.1989

8. *विश्वनाथ प्रताप सिंह (Vishwanath Pratap Singh)*
   - कार्यकाल (Term): 02.12.1989 – 10.11.1990

9. *चन्द्रशेखर (Chandra Shekhar)*
   - कार्यकाल (Term): 10.11.1990 – 21.06.1991

10. *पी. वी. नरसिम्हाराव (P. V. Narasimha Rao)*
    - कार्यकाल (Term): 21.06.1991 – 16.05.1996

11. *अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee)*
    - कार्यकाल (Term): 16.05.1996 – 01.06.1996

12. *एच. डी. देवेगौड़ा (H. D. Deve Gowda)*
    - कार्यकाल (Term): 01.06.1996 – 21.04.1997

13. *आई. के. गुजराल (I. K. Gujral)*
    - कार्यकाल (Term): 21.04.1997 – 19.03.1998

14. *अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee)*
    - कार्यकाल (Term): 19.03.1998 – 13.10.1999

15. *अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee)*
    - कार्यकाल (Term): 13.10.1999 – 22.05.2004

16. *डॉ. मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh)*
    - कार्यकाल (Term): 22.05.2004 – 26.05.2014

17. *नरेंद्र मोदी (Narendra Modi)*
    - कार्यकाल (Term): 26.05.2014 – (वर्तमान / Present)



*💁विशेष जानकारी (Special Information):*

1. सबसे लंबा कार्यकाल (Longest term): 16 वर्ष 9 महीना 12 दिन (16 years 9 months 12 days)

2. प्रथम गैर कांग्रेस प्रधानमंत्री एवं प्रधानमंत्री पद से त्यागपत्र देने वाले प्रथम प्रधानमंत्री (First non-Congress PM and the first to resign): मोरारजी देसाई (Morarji Desai)

3. लोकसभा का सामना न करने वाले प्रधानमंत्री (PM who did not face the Lok Sabha): चौधरी चरण सिंह (Chaudhary Charan Singh)

4. अविश्वास प्रस्ताव द्वारा हटाये जाने वाले प्रथम प्रधानमंत्री (First PM removed by a no-confidence motion): वी. पी. सिंह (V. P. Singh)

5. पद ग्रहण के समय किसी भी सदन के सदस्य नहीं (Not a member of any house at the time of taking office): चौधरी चरण सिंह (Chaudhary Charan Singh)

6. सबसे छोटा कार्यकाल (Shortest term): अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) - 13 दिन (13 days)

7. पद ग्रहण करते समय विधान सभा सदस्य (Member of Legislative Assembly at the time of taking office): नरसिम्हा राव (Narasimha Rao)

*💁अन्य तथ्य (Other Facts):*


- तीन प्रधानमंत्रियों (जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री तथा श्रीमती इंदिरा गांधी) की मृत्यु उनके पदावधि के दौरान हो गयी थी। (Three Prime Ministers - Jawaharlal Nehru, Lal Bahadur Shastri, and Indira Gandhi - died during their term in office.)

- लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु 11 जनवरी, 1966 को भारत से बाहर ताशकंद में हुई थी। (Lal Bahadur Shastri died on January 11, 1966, in Tashkent, outside India.)

- मोरारजी देसाई सबसे अधिक उम्र में एवं राजीव गांधी सबसे कम उम्र में प्रधानमंत्री बने। (Morarji Desai became PM at the oldest age and Rajiv Gandhi at the youngest age.)

- गुलजारी लाल नंदा 27 मई, 1964 से 09 जून, 1964 तक एवं 11 जनवरी, 1966 से 24 जनवरी, 1966 तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने। (Gulzarilal Nanda served as acting PM from May 27, 1964, to June 9, 1964, and from January 11, 1966, to January 24, 1966.)

- भारत के प्रथम उपप्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल थे। (The first Deputy Prime Minister of India was Sardar Vallabhbhai Patel.)

*✍️नये राज्यों का गठन वर्ष /List of Newly Formed States and Their Formation Years*

*✍️नये राज्यों का गठन वर्ष /List of Newly Formed States and Their Formation Years*

*आंध्र प्रदेश* (Andhra Pradesh)  
Formation Year: 1 October, 1953

*महाराष्ट्र* (Maharashtra)  
Formation Year: 1 May, 1960

*गुजरात* (Gujarat)  
Formation Year: 1 May, 1960

*नागालैंड* (Nagaland)  
Formation Year: 1 December, 1963

*हरियाणा* (Haryana)  
Formation Year: 1 November, 1966

*हिमाचल प्रदेश* (Himachal Pradesh)  
Formation Year: 25 January, 1971

*मेघालय* (Meghalaya)  
Formation Year: 21 January, 1972

*मणिपुर* (Manipur)  
Formation Year: 21 January, 1972

*त्रिपुरा* (Tripura)  
Formation Year: 21 January, 1972

*सिक्किम* (Sikkim)  
Formation Year: 26 April, 1975

*मिजोरम* (Mizoram)  
Formation Year: 20 February, 1987

*अरुणाचल प्रदेश* (Arunachal Pradesh)  
Formation Year: 20 February, 1987

*गोवा* (Goa)  
Formation Year: 30 May, 1987

*छत्तीसगढ़* (Chhattisgarh)  
Formation Year: 1 November, 2000

*उत्तराखंड* (Uttarakhand)  
Formation Year: 9 November, 2000

*झारखंड* (Jharkhand)  
Formation Year: 15 November, 2000

*तेलंगाना* (Telangana)  
Formation Year: 2 June, 2014

06/02/23

भारत रत्न


 भारत रत्न-भारत रत्न की शुरुआत 2 जनवरी 1954 को देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद के द्वारा शुरू किया गया यह पुरस्कार साहित्य, विज्ञान, सामाजिक सेवा और खेल के क्षेत्र में असाधारण कार्य करने वाले को दिया जाता है। 1 वर्ष में अधिकतम 3 लोगों को यह पुरस्कार दिया जा सकता है यह पुरस्कार पहली बार डॉक्टर राधाकृष्णन, सी आर राजगोपालाचारी, ओ सी वी रमन को दिया गया

नोट-अगर ऑप्शन में तीनों का नाम दीया हो तो राधा-कृष्णन पहले व्यक्ति होंगे जिसे भारतरत्न में दिया गया है

1955 तक यह पुरस्कार उन्हीं व्यक्ति को दिया जाता था जो व्यक्ति जिंदा हो लेकिन 1955 के बाद यह पुरस्कार मरणोपरांत भी दिया जाने लगा इस पुरस्कार में एक प्रमाण पत्र तथा एक पदक दिया जाता है धनराशि के रूप में कुछ नहीं। 2013 में खेल जगत में भारत रत्न पाने वाले पहले खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर हैं। भारत रत्न पाने वाली पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थी। अभी तक 48 लोगों को भारत रत्न दिया जा चुका है। 2019 में  भारत रत्न पाने वाले तीन व्यक्ति थे भूपेन हजारिका प्रणब मुखर्जी नानाजी देशमुख। 2019 के बाद भारत रत्न अभी तक किसी को  नहीं दिया गया है


17/08/22

 सदस्य👇            नयूनतम आयु 👇

   

1. लोकसभा -      25 years

2. राज्यसभा -      30 years 

3. विधान सभा -     25 years 

4. विधान परिषद -   30 years 

5. मुखिया -         21 years 

6. सरपंच -          21 years 

7. राष्ट्रपति -          35 years 

8. राज्यपाल -        35 years 

9. उपराष्ट्रपति -       35 years 

10. प्रधान मंत्री -      25 years 

11. मुख्य मंत्री -       25 years

भारतीय संविधान किन किन देशों से लिया गया

 भारतीय संविधान किन किन देशों से लिया गया है

✺ ब्रिटेन

➭ संसदीय प्रणाली, विधि निर्माण, एकल नागरिकता

✺ अमेरीका

➭ न्यायिक, स्वतंत्रता का अधिकार और मौलिक अधिकार

✺ जर्मनी

➭ आपातकाल का सिद्धांत

✺ फ्रांस

➭ गणत्रंतात्मक शासन व्यवस्था

✺ कनाडा

➭ राज्यों में शक्ति का विभाजन

✺आयरलैंड 

➭ नीति निदेशक तत्व

✺ऑस्ट्रेलिया 

➭ समवर्ती सूची

✺ दक्षिणअफ्रीका 

➭ संविधान संशोधन की प्रक्रिया

✺ रूस

➭ मूल कर्तव्य

21/07/22

 अनुच्छेद 243 - परिभाषाएँ


अनुच्छेद 243 क (A) - ग्रामसभा (ये याद ही हो जाएगा , शुरुआत है , इसी से)


अनुच्छेद 243 ख (B) -  ग्राम पंचायतों का गठन (B for बनाना मतलब गठन)


अनुच्छेद 243 ग (C) - पंचायतों की संरचना (Cसा-सीसा मतलब c से सरंचना)


अनुच्छेद 243 घ (D) - स्थानों का आरक्षण (आरक्षण 4 जातियों को मिलता है sc , st , obc , ews तो d इंग्लिश में 4 पर आया 4 से 243 d for आरक्षण)


अनुच्छेद 243 ङ (E) - पंचायतों की कार्यकाल (E इंग्लिश में 5 पर आया तो कार्यकाल 5 वर्ष)


अनुच्छेद 243 च (F) - सदस्यता के लिए योग्यताएँ (qualiFication से याद करने की कोशिश करिए)



अनुच्छेद 243 छ (G) - पंचायतों की शक्तियाँ , प्राधिकार और उत्तरदायित्व (g फ़ॉर gravity मतलब बल मतलब शक्ति)



 अनुच्छेद 243 ज (H) - पंचायतों द्वारा कर लगाने की शक्तियाँ और उनकी निधियाँ ( h for horsePower मतलब शक्ति)


अनुच्छेद 243 झ (I) - वित्तीय स्थिति के पुनर्विलोकन के लिए वित्त आयोग का गठन (i फ़ॉर income)



अनुच्छेद 243 ञ (J)  - पंचायतों की लेखाओं की संपरीक्षा (j फ़ॉर जांच)



अनुच्छेद 243 ट (K) - पंचायतों के लिए निर्वाचन (निर्वाचन कर्वाचन)



अनुच्छेद 243 ठ (L) - संघ राज्यों क्षेत्रों को लागू होना 


अनुच्छेद 243 ड (M) - इस भाग का कतिपय क्षेत्रों को लागू न होना


अनुच्छेद 243 ढ (N) - विद्यमान विधियों और पंचायतों का बना रहना 


अनुच्छेद 243 ण (O) - निर्वाचन सम्बन्धी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप का वर्णन (o for objection)



आखिरी 4 ज्यादा खास न है , आखिरी कर लो याद

20/06/22

राष्ट्रपति

भारतीय संविधान में भारत के राष्ट्रपति
अनुच्छेद 52 – भारत का एक राष्ट्रपति होगा।


अनुच्छेद 53 – संघ की कार्यपालिका शक्ति: संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी और वह इसका उपयोग स्वयं प्रत्यक्ष रूप से अथवा अपने किसी अधीनस्थ अधिकारी के माध्यम से करेगा।


वह भारत में रक्षा बलों का सर्वोच्च सेनापति होता है।


हालांकि राष्ट्रपति केवल एकमात्र संवैधानिक प्रधान या टिटुलर प्रमुख, डे जूर प्रमुख या नोमिनल कार्यपालिका प्रधान अथवा प्रतीकात्मक प्रधान होता है।


राष्ट्रपति का चुनाव


राष्ट्रपति का चुनाव निर्वाचक मंडल के सदस्यों द्वारा किया जायेगा जिसमें निम्‍न शामिल होंगे:


     चयनित सांसद


     राज्यों के चयनित विधायक


     राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (70वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया और 1.06.1995 से प्रभावी) और संघशासित क्षेत्र पुड़ुचेरी के चयनित विधायक।


इस प्रकार, संसद और विधानसभाओं तथा विधान परिषदों के मनोनीत सदस्य राष्ट्रपति चुनाव में भाग नहीं लेते हैं।


अनुच्छेद 55 में चुनाव के तौर-तरीके के बारे में बताया गया है और इसमें संविधान के अनुसार एकरूपता एवं राष्ट्रभर से प्रतिनिधित्व होना चाहिए। अत: सांसद और विधायक अपने प्रतिनिधित्व के आधार पर मत देते हैं।


चुनाव का आयोजन एकल संक्रमणीय पद्धति द्वारा समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार होता है और यह मतदान गुप्त बैलेट द्वारा किया जाता है।


राष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित सभी संदेहों और विवादों की जांच और निपटारे का निर्णय उच्चतम न्यायालय द्वारा किया जाता है जिसका निर्णय अंतिम होता है।


चुनाव प्रक्रिया पर निगरानी एवं संचालन भारतीय चुनाव आयोग द्वारा किया जाता है।


अभी तक केवल एक राष्ट्रपति श्री नीलम संजीव रेड्डी र्निविरोध निर्वाचित हुई हैं।


डॉ. राजेन्द्र प्रसाद एकमात्र राष्ट्रपति हैं जिन्‍हें दो बार राष्ट्रपति नियुक्त किया गया है।


दो राष्ट्रपति – डॉ. जाकिर हुसैन और फखरुद्दीन अली अहमद की उनके कार्यकाल के दौरान मृत्यु हुई है।


कार्यकाल (अनुच्छेद 56) और पुर्ननिर्वाचन (अनुच्छेद 57)


कार्यकाल – 5 वर्ष।


त्यागपत्र उप-राष्ट्रपति को संबोधित किया जाता है।


राष्ट्रपति कईं कार्यकाल के लिए पुर्ननिर्वाचन के लिए पात्र होता है।


योग्यता (अनुच्छेद 58), शर्तें (अनुच्छेद 59) एवं शपथ (अनुच्छेद 60)


पात्रता-


      भारत का नागरिक हो,


      35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो,


      लोकसभा का सांसद चुने जाने की पात्रता रखता हो


किसी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए।


राष्ट्रपति संसद अथवा किसी विधानमंडल के सदन का सदस्य नहीं होगा। यदि ऐसा कोई सदस्य निर्वाचित होता है, तो उसकी सीट को रिक्त मान लिया जाता है।


चुनाव हेतु किसी उम्मीदवार के नामांकन के लिए निर्वाचक मंडल के कम से कम 50 सदस्य प्रस्तावक और 50 सदस्य अनुमोदक अवश्य होने चाहिए।


शपथ भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा दिलाई जाती है यदि वह अनुपस्थित है, तो उच्चतम न्यायालय के उपलब्ध किसी वरिष्ठतम न्यायाधीश द्वारा दिलाई जाती है।


सामग्री, भत्ते और विशेषाधिकार आदि संसद द्वारा निर्धारित किए जाएगें और उसके कार्यकाल में इनमें कोई कमी नहीं की जाएगी।


राष्ट्रपति को अपने कार्यकाल के दौरान किसी भी आपराधिक कार्यवाही से छूट मिलती है। उसे गिरफ्तार अथवा जेल में बंद नहीं किया जा सकता है। हांलाकि, दो महीनों के नोटिस के बाद, उसके कार्यकाल में उसके खिलाफ उसके व्यक्तिगत कार्य के सबंध में दीवानी मामले चलाये जा सकते हैं।


राष्ट्रपति पर महाभियोग (अनुच्छेद 61)


संवैधानिक उपबंध द्वारा राष्ट्रपति को उसके पद से औपचारिक रूप से हटाया जा सकता है।


यह ‘संविधान के उल्लंघन करने पर’ महाभियोग का प्रावधान है। हांलाकि, संविधान में कहीं भी इस शब्द का स्पष्टीकरण नहीं किया गया है।


यह आरोप संसद के किसी भी सदन द्वारा लगाया जा सकता है। हांलाकि, इस प्रकार के किसी प्रस्ताव को लाने से पूर्व राष्ट्रपति को 14 दिन पहले इसकी सूचना दी जाती है।


साथ ही, नोटिस पर उस सदन जिसमें यह प्रस्ताव लाया गया होता है, के कुल सदस्यों के कम से कम एक चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर अवश्य होने चाहिए।


उस सदन में विधेयक के स्वीकृत होने के बाद, महाभियोग विधेयक को उस सदन के कुल सदस्यों के 2/3 से अधिक बहुमत में अवश्य ही पारित कराया जाना चाहिए।


इसके बाद विधेयक दूसरे सदन में जायेगा जो आरोपो की जांच करेगा तथा राष्ट्रपति के पास ऐसी जांच में उपस्थित होने और प्रतिनिधित्व कराने का अधिकार होगा।


यदि दूसरा सदन आरोप बनाये रखता है और राष्ट्रपति को उल्लंघन का दोषी पाता है, तथा उस संकल्प को उस सदन के कुल सदस्यों के 2/3 से अधिक बहुमत से पारित करता है, तो राष्ट्रपति का पद संकल्प पारित होने की दिनांक से रिक्त माना जाता है।


अत: महाभियोग एक अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया है तथा जबकि संसद के मनोनीत सदस्य राष्ट्रपति के निर्वाचन में भाग नहीं लेते हैं, परंतु वे महाभियोग प्रक्रिया में पूर्ण हिस्सा लेते हैं। साथ ही, राज्य विधायकों की महाभियोग की प्रक्रिया में कोई भूमिका नहीं होती है।


राष्ट्रपति की शक्तियाँ


A) कार्यपालिका शक्तियाँ


उसके नाम से सभी कार्यपालिका कार्य किए जाते हैं। वह भारत सरकार का औपचारिक, टिटुलर प्रमुख या डे जूर प्रमुख होता है।


वह प्रधानमंत्री और उसकी सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है।


भारत के महान्यायवादी, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों, राज्यों के राज्यपालों, वित्त आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों आदि की नियुक्ति करता है।


वह अंतर्राज्यीय परिषद की नियुक्ति करता है और वह किसी भी क्षेत्र को अनुसूचित क्षेत्र और किसी जाति को अनुसूचित जाति घोषित करने का निर्णय कर सकता है।


B) विधायी शक्तियाँ


संसद सत्र को आहूत करने, सत्रावसान करने और लोकसभा भंग करने की शक्ति।


संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को आहूत करने की शक्ति (जिसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष द्वारा की जायेगी)


कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवाओं से ख्याति प्राप्त लोगों से 12 सदस्यों को राज्य सभा के लिए और एंग्‍लो भारतीय समुदाय से 2 लोगों को लोकसभा के लिए नामांकित कर सकता है।


विशेष प्रकार के विधेयकों जैसे धन विधेयक, भारत की संचित निधि से व्यय करने की मांग करने वाले विधेयक आदि को प्रस्तुत करने के मामले में राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति आवश्यक है।


वह विधेयक पर अपनी राय को रोक सकता है, विधेयक को विधायिका में लौटा सकता है, या फिर पॉकेट में रख सकता है।


वह संसद के सत्र में न होने पर अध्यादेश पारित कर सकता है।


वह वित्त आयोग, कैग और लोक सेवा आयोग आदि की रिपोर्ट को संसद के समक्ष रखता है।


बिना राष्ट्रपति की अनुमति के किसी अनुदान का आवंटन नहीं किया जा सकता है। साथ ही, वह केन्द्र और राज्यों के मध्य आय के बंटवारे के लिए प्रत्येक पांच वर्ष में एक वित्त आयोग का गठन करता है।


C) न्यायिक शक्तियाँ


मुख्य न्यायाधीश तथा उच्चतम एवं उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है।


विधि के किसी भी प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय से सलाह लेता है।


वह क्षमादान इत्‍यादि दे सकता है।


D) आपातकालीन शक्तियाँ


राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352)


राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356)


वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360)


E) वीटो शक्ति: भारत के राष्ट्रपति के पास निम्न तीन वीटो शक्तियाँ होती हैं:


पूर्ण वीटो – विधेयक पर अपनी अनुमति को रोके रखना। इसके बाद विधेयक समाप्त हो जाता है और एक अधिनियम नहीं बन पाता है। उदाहरण – 1954 में, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने पेप्सू विनियोग विधेयक पर अपनी मंजूरी रोके रखी थी। तथा, 1991 में, श्री आर. वेंकटरमन ने सांसदों के वेतन, भत्ते विधेयक पर अपनी मंजूरी रोक दी थी।


निलंबित वीटो – विधेयक को पुर्नविचार के लिये भेजना। 2006 में, राष्ट्रपति डॉ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने लाभ के पद विधेयक पर निलंबित वीटो का प्रयोग किया था। हांलाकि, राष्ट्रपति विधेयक पर विधायिका के पुर्नविचार के लिये केवल एक बार ही विधेयक लौटा सकताहै।


पॉकेट वीटो – राष्ट्रपति को भेजे गए किसी विधेयक पर कोई कार्रवाई नहीं करना। संविधान में ऐसी कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं की गई है जिसके अंदर राष्ट्रपति को विधेयक पर अपनी अनुमति अथवा हस्ताक्षर करना अनिवार्य है। अत: उसके पास अमेरिकी राष्ट्रपति की तुलना में ‘बिग्‍गर पॉकेट’ है। 1986 में, राष्ट्रपति ज्ञानी जेल सिंह ने भारतीय डाकघर संशोधन विधेयक पर पॉकेट वीटो लगाया था।


ध्यान दें: राष्ट्रपति के पास संविधान संशोधन विधेयक के संबंध में कोई वीटो शक्ति नहीं है। वह ऐसे विधेयकों को अनुमोदित करने के लिये बाध्य है।


अध्यादेश बनाने की शक्ति (अनुच्छेद 123)


संसद के दोनों सदनों अथवा किसी एक सदन के सत्र में नहीं होने पर राष्ट्रपति द्वारा अध्यादेश जारी किया जा सकता है।


अध्यादेश का संसद की पुर्नबैठक के छह सप्ताह के भीतर अनुमोदन प्राप्त करना अनिवार्य होता है।


अत: अध्यादेश का अधिकतम जीवनकाल – छह माह + छह सप्ताह है।


वह केवल प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्री परिषद की सलाह पर अध्यादेश जारी कर सकता है।


राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति (अनुच्छेद 72)


राष्ट्रपति के पास संघीय कानून, अथवा किसी कोर्ट मार्शल या मृत्यु दंड के मामले में दण्डित किसी व्यक्ति के दण्ड को माफ करने, रोक लगाने, बदलने, लघुकरण करने और विराम देने की शक्ति होती है।


यह एक कार्यपालिका शक्ति है और राज्यपाल के पास अनुच्छेद 161 के अंतर्गत ऐसी शक्तियाँ हैं, हांलाकि राज्यपाल मृत्युदंड और कोर्ट मार्शल के मामलों में दखल नहीं दे सकता है।


राष्ट्रपति इस शक्ति का उपयोग केन्द्रीय कैबिनेट के परामर्श पर करता है।


राष्ट्रपति की विवेकाधीन शक्तियाँ


प्रधानमंत्री की नियुक्ति: जब लोकसभा में किसी भी पार्टी को कोई स्पष्ट बहुमत प्राप्त न हो अथवा प्रधानमंत्री के कार्यकाल में मृत्यु होने पर तथा कोई उचित उत्तराधिकरी न होने पर।


लोकसभा का विश्वास मत हासिल न कर पाने पर केन्द्रीय कैबिनेट को निलंबित करने की शक्ति।


मंत्रीपरिषद द्वारा लोकसभा में बहुमत खोने पर लोकसभा भंग करने की शक्ति।


विधेयकों के संबंध में निलंबन वीटो शक्ति का प्रयोग।

 वरीयता के आधार पर मतदान-जा सकती कि चुनाव में रहता के आधार पर मतदान किया जाता है जैसे कि मान लेते हैं राष्ट्रपति के चुनाव में 5 लोग खड़े हैं तो हम किसी उम्मीदवार को पहला तथा दूसरे उम्मीदवार को दूसरा इसी प्रकार से वरीयता देते हैं अगर पहली वरीयता के आधार पर निर्णय नहीं हो सकता है तो दूसरे वरीयता के मतों को गिनते हैं 

कुछ रोचक जानकारी- 

पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद थे 

निर्विरोध चुने जाने वाले राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी थे 

वीवी गिरी पहले निर्दलीय पार्टी के रूप में चुने जाने वाले पहले राष्ट्रपति थे

 कार्यकाल के दौरान जाकिर हुसैन की मृत्यु हो गई थी

 पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल थी 

कौन वोट नहीं दे सकता-

भारत की जनता
राज सभा और विधान परिषद के मनोनीत सदस्य तथा विधान पार्षद भी वोट नहीं दे सकता
अगर किसी राज्य का मुख्यमंत्री विधान परिषद का सदस्य है तो वह भी वोट नहीं दे सकता

18/02/22

61 संविधान संशोधन 1989

 भाग  15 के अंतर्गत संविधान  61 संशोधन अधिनियम 1989 संविधान के अनुच्छेद 326 को संशोधित करके वोट देने का अधिकार की आयु 21 से घटाकर 18 कर दी गई

08/09/21

सुप्रीम कोर्ट से संबंधित अनुच्छेद

* 🇮🇳 सुप्रीम कोर्ट से संबंधित अनुच्छेद 🇮🇳*



➨ अनुच्छेद 124

सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना और संविधान


➨ अनुच्छेद 125

जजों का वेतन आदि


➨ अनुच्छेद 126

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति


➨ अनुच्छेद 127

तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति


➨ अनुच्छेद 128

सर्वोच्च न्यायालय की बैठकों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की उपस्थिति


➨ अनुच्छेद 129

सर्वोच्च न्यायालय रिकॉर्ड की अदालत हो


➨ अनुच्छेद 130

सुप्रीम कोर्ट की सीट


➨ अनुच्छेद 131

सर्वोच्च न्यायालय का मूल क्षेत्राधिकार


➨ अनुच्छेद 131 ए

केंद्रीय कानूनों की संवैधानिक वैधता (निरस्त) के रूप में सवालों के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय का विशेष अधिकार क्षेत्र


➨ अनुच्छेद 132

कुछ मामलों में उच्च न्यायालयों से अपील में सर्वोच्च न्यायालय का अपीलीय क्षेत्राधिकार


➨ अनुच्छेद 133

सिविल मामलों के संबंध में उच्च न्यायालयों से अपील में सर्वोच्च न्यायालय का अपीलीय क्षेत्राधिकार


➨ अनुच्छेद 134

आपराधिक मामलों के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय का अपीलीय क्षेत्राधिकार


➨ अनुच्छेद 134 ए

सुप्रीम कोर्ट में अपील के लिए प्रमाण पत्र


➨ अनुच्छेद 135

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मौजूदा कानून के तहत संघीय कानून के क्षेत्राधिकार और शक्तियां


➨ अनुच्छेद 136

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपील करने के लिए विशेष अवकाश


➨ अनुच्छेद 137

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्णयों या आदेशों की समीक्षा


➨ अनुच्छेद 138

सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में वृद्धि


➨ अनुच्छेद 139

कुछ रिट्स जारी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ऑफ पॉवर पर कन्वेंशन


➨ अनुच्छेद 139 ए

कुछ मामलों का स्थानांतरण


➨ अनुच्छेद 140

सर्वोच्च न्यायालय की सहायक शक्तियाँ


➨ अनुच्छेद 141

सुप्रीम कोर्ट द्वारा घोषित कानून सभी अदालतों पर बाध्यकारी है


➨ अनुच्छेद 142

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और आदेशों की प्रवर्तन और खोज आदि के आदेश।


➨ अनुच्छेद 143

सुप्रीम कोर्ट से परामर्श करने की राष्ट्रपति की शक्ति


➨ अनुच्छेद 144

सुप्रीम कोर्ट की सहायता में कार्य करने के लिए नागरिक और न्यायिक अधिकारी


➨ अनुच्छेद 144 ए

कानूनों की संवैधानिक वैधता से संबंधित सवालों के निपटान के लिए विशेष प्रावधान (निरस्त)


➨ अनुच्छेद 145

अदालत के नियम, आदि।


➨ अनुच्छेद 146

अधिकारी और नौकर और सर्वोच्च न्यायालय का खर्च 

02/09/21

राज्यसभा

 राज्यसभा-

राज सभा के बारे में-

राज्यसभा अनुच्छेद 80 में बताया गया है राज सभा का पहला सत्र 13 मई 1952 को हुआ था इसमें अधिकतम 250 सदस्य होते हैं जिसमें से 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत तथा निर्वाचित होते हैं
राज सभा में वर्तमान में 245 सीट है इसमें से 12 मनोनीत को हटाने के बाद 233 बचते हैं। 233 में से 4 केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली और पुडुचेरी से आते हैं । 3 दिल्ली से 1 पुडुचेरी से
जो 12 सदस्य मनोनीत होते हैं वह साहित्य, विज्ञान, कला ,समाज सेवा या विशेष अनुभव के आधार पर मनोनीत होते हैं।
योग्यता-वह भारत का नागरिक हूं 
 उसकी उम्र 30 वर्ष हो
 पागल और दिवालिया ना हो
चुनाव-राज्यसभा के सदस्य का चुनाव उस राज्य की जनसंख्या के आधार पर किया जाता है जिस राज की जनसंख्या जितनी ज्यादा होगी उसका राज सभा मे प्रतिनिधि उतना ही ज्यादा होगा। राज्यसभा के सदस्य का निर्वाचन अनुपातिक प्रतिनिधि पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के अनुसार होता है। विधानसभा के साथ द्वारा किया जाता है
राज सभा का सभापति उपराष्ट्रपति होता है उपराष्ट्रपति बनने की योग्यता  35 साल होता है जबकि राज सभा का सदस्य बनने की योग्यता 30 साल होती है। अगर कोई पूछे की राज सभा का सभापति बनने की योग्यता न्यूनतम कितने उम्र की होती है-तो आप 35 साल कहेंगे और उपसभापति बनने की योग्यता-30 होती है
कार्यकाल-राज सभा को उच्च सदन कहते हैं तथा यह स्थाई सदन होता है क्योंकि इसे कभी भंग नहीं कर सकते हैं इनके सदस्यों का कार्यकाल 6 साल होता है जिसमें से हर 2 वर्ष में 1/3 सदस्य जिनका कार्यकाल 6 साल पूरा हो चुका हो उन्हें सेवानिवृत्त कर देते हैं।
उपसभापति अपना त्यागपत्र सभापति को देता है राज्यसभा में राज्यों का प्रतिनिधि जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 के संशोधन के अनुसार 2003 में यह व्यवस्था की गई है। कोई भी व्यक्ति राज्यसभा के सदस्य के लिए कहीं से भी चुनाव लड़ सकता है चाहे वह उस राज्य का निवासी ना हो लेकिन उसे भारत का निवासी होना चाहिए । चौथी अनुसूची में राज सभा के लिए राज वा संघ क्षेत्र मैं सीटों का प्रावधान का उल्लेख है। अनुच्छेद 249 के अनुसार राज सभा अपने उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों में 2/3 बहुमत से संकल्प पारित कर दे और कहे कि राज सूची का किसी विधि पर कानून बनाना राष्ट्र के हित में आवश्यक है तो संसद उस विषय पर कानून बना सकती है।
राज सभा कि कुछ अन्य शक्ति-
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 312 के तहत एक नई अखिल भारतीय सेवा के सृजन हेतु संस्तुति करना राज सभा का अनन्य अधिकार है जिसके अंतर्गत अखिल भारतीय न्यायिक सेवा है
2-उपराष्ट्रपति को हटाने के लिए सर्वप्रथम राज्यसभा से बिल पास होना चाहिए उसके बाद लोकसभा में जाएगा
3-साधारण विधेयक पर जितना अधिकार लोकसभा को हो उतना ही अधिकार राज सभा को है अगर कोई बिल लोकसभा से पास हो जाता है और 6 महीने के अंदर राज्यसभा से पास नहीं होता है तो वह बिल अपने आप ही समाप्त हो जाएगा

कितने प्रधानमंत्री राज सभा से बने हैं
इंदिरा गांधी, एच डी देवगौड़ा ,इंद्र कुमार गुजराल, डॉ मनमोहन सिंह।
नोट-पहले जम्मू कश्मीर से 4 राज्यसभा सदस्य चुने जाते थे लेकिन केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद अब कोई सदस्य नहीं चुने जाते हैं।
राज्यसभा में नामांकित होने वाली प्रथम अभिनेत्री नरगिस दत्त थी
राज सभा में मनोनीत होने वाली पहले खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर है। 


01/09/21

आपातकाल

अपातकाल

आपातकाल तीन प्रकार का होता है
नोट- जब कोई विदेशी आक्रमण करता है सबसे अधिक सैनिक देश की रक्षा करेंगे फिर बच्चे सैनिक राज्य की रक्षा करेंगे उसके बाद बच्चे सैनिक धन की रक्षा करेंगे 352,356,360

  1. राष्ट्रीय आपातकाल 352- इसकी घोषणा राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर की जाती है यह जब घोषणा की जाती है तब अनुच्छेद 19 समाप्त हो जाता है लेकिन अनुच्छेद 20 ,21 बने रहते हैं
  2. राज में आपातकाल अथवा राष्ट्रपति शासन- 356
 जब राज में संवैधानिक व्यवस्था सही से चल नहीं चल रही हो तब केंद्र सरकार द्वारा राज में राष्ट्रपति से अनुरोध करके यह आपातकाल लगाया जाता है
  1. वित्तीय आपात काल 360
- जब देश आर्थिक तंगी से जूझ रहा हो तब यह आपातकाल लगाया जाता है इस आपात काल में लोगों का जमा हुआ पैसा पर सरकार का हक हो जाता है तथा कर्मचारियों का वेतन कम हो जाता है  
  1. आपातकाल किस देश से लिया गया है- जर्मनी से
  2. अभी तक भारत में कौनसा आपातकाल नहीं लगा है-360
  3. सर्वप्रथम आपातकाल किस राज्य में लगा था- केरल
  4. भारत में अब तक कितनी बार राष्ट्रीय आपातकाल लगा है-3
  5. देश में पहली बार आपातकाल कब लगा- 26 अक्टूबर 1962
  6. दूसरी बार भारत में राष्ट्रीय आपातकाल कब लगा-1971
  7. तीसरी बारआपातकाल कब लगा-1975
  8. राष्ट्रपति शासन होने पर राज्य पर शासन किसका होता है-राज्यपाल
  9. अभी तक कितनी बार 356 लगा है-126
  10. किस राज्य में अनुच्छेद 356 सबसे ज्यादा लगा है- मणिपुर
  11. सबसे लंबा राज्यपाल शासन किस राज्य में लगा है जम्मू कश्मीर तथा उसके बाद पंजाब
  12.  उत्तर प्रदेश में आपातकाल कितनी बार लगा है-9
  13.  आन्धपदेश में आपातकाल कितनी बार लगा है-4   राष्ट्रीय आपातकाल (आर्टिकल 352 )लगने के बाद उसे लोकसभा और राज्यसभा से 1 महीने के भीतर पास कारना होता है

  1. राष्ट्रपति शासन (आर्टिकल 356) तथा वित्तीय आपातकाल (आर्टिकल 360) लगने के बाद उसे 2 महीने के अंदर लोकसभा और राज्यसभा से पास कराना होता है

30/08/21

राजपाल

 राजपाल

भारतीय राज्यों में सरकार की व्यवस्था उसी प्रकार की है जैसे कि केंद्र स्तर पर संविधान में भाग 6 के अंतर्गत अनुच्छेद 153 से 167 तक राज कार्यपालिका के संबंध में उल्लेख है राज्यपाल राज्य का कार्यकारी प्रमुख होता है
किसी भी राज का राजपाल उस राज्य के राज्यपाल के साथ-सथ अन्य कोई राज का राजपाल हो सकता है (7 वां संविधान संशोधन 1956 के अनुसार)।
राजपाल की नियुक्ति अनुच्छेद 155 के तहत राष्ट्रपति करता है अनुच्छेद 156 (1) के तहत राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यंत राज्यपाल काम करता है राष्ट्रपति जब चाहे उसे हटा सकता है ।156(2) के तहत राजपाल राष्ट्रपति को संबोधित करके अपना पद त्याग कर सकता है
अनुच्छेद 157 के अनुसार राज्यपाल की योग्यता-
वह भारत का नागरिक हूं 
वह 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका हूं 
नोट-केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।
राज्यपाल का काम-
अनुच्छेद 164 (1) के तहत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राजपाल  द्वारा की जाती है जबकि मंत्रियों की नियुक्ति राजपाल के द्वारा मुख्यमंत्री कि सलाह पर की जाती है

वह विधानसभा के सत्र को बुलाने या सत्रावसान तथा विघटित करने का शक्ति रखता है
राजपाल विधान परिषद के 1 / 6 सदस्यों को नियुक्त करता है
कुछ समय पहले वह विधानसभा में आंग्ल भारतीय समुदाय में से एक सदस्य को नियुक्त करता था लेकिन अब वह हटा दिया गया है
अनुच्छेद 165 के तहत वह महाधिवक्ता को नियुक्त करता है
वह विधेयक को राष्ट्रपति विचार विमर्श के लिए अनुच्छेद 200 के अनुसार आरक्षित रख सकता है
राज्यपाल द्वारा विधानमंडल से पारित किसी विधेयक को रोक सकता है यह स्वीकृत दे सकता है यह विचार विमर्श के लिए वापस भेज सकता है लेकिन अगर वह विधेयक राजपाल के पास आता है तो राजपाल को उस पर हस्ताक्षर करने होंगे
नोट-धन विधेयक को वह रोक नहीं सकता
अनुच्छेद 201 के अनुसार जब कोई विधायक राजपाल जा जा सकती कि विचार आरक्षित रख दिया गया हो तब उस विधेयक को राष्ट्रपति को घोषित करना होगा कि उस विधेयक पर राष्ट्रपति अनुमति देता है कि नहीं देता है
अनुच्छेद 213 के अनुसार अगर विधानमंडल का सत्र नहीं चल रहा है तो तो राज्यपाल अध्यादेश की घोषणा कर सकता है
राजपाल क्षमादान का सकता है तथा विराम या परिहार प्रविलंवन, निलंबन कर सकता है
नोट-वह मृत्युदंड को छमा नहीं कर सकता
वैसे तो किसी भी राज्य का निवासी उस राज्य का राजपाल बन सकता है लेकिन ऐसा बहुत या ना के बराबर देखा गया है की किसी राज्य का निवासी उस राज्य का राज्यपाल बना हो

25/08/21

भारतीय संविधान की सभी अ अनुच्छेद

 


 

भारतीय संविधान के सभी अनुच्छेद तथा अनुसूचियाँ | All Articles of Indian Constitution Hindi


अनुच्‍छेद विवरण

1 संघ का नाम और राज्‍य क्षेत्र

2 नए राज्‍यों का प्रवेश या स्‍थापना

2क [निरसन]

3 नए राज्‍यों का निर्माण और वर्तमान राज्‍यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन

4 पहली अनुसूची और चौथी अनुसूचियों के संशोधन तथा अनुपूरक, और पारिणामिक विषयों का उपबंध करने के लिए अनुच्‍छेद 2 और अनुच्‍छेद 3 के अधीन बनाई गई विधियां

5 संविधान के प्रारंभ पर नागरिकता

6 पाकिस्‍तान से भारत को प्रव्रजन करने वाले कुछ व्‍यक्तियों के नागरिकता के अधिकार

7 पाकिस्‍तान को प्रव्रजन करने वाले कुछ व्‍यक्तियों के नागरिकता के अधिकार

8 भारत के बाहर रहने वाले भारतीय उद्भव के कुछ व्‍यक्तियों के नागरिकता के अधिकार

9 विदेशी राज्‍य की नागरिकता, स्‍वेच्‍छा से अर्जित करने वाले व्‍यक्तियों का नागरिक न होना

10 नागरिकता के अधिकारों को बना रहना

11 संसद द्वारा नागरिकता के अधिकार का विधि द्वारा विनियमन किया जाना

12 परिभाषा

13 मूल अधिकारों से असंगत या उनका अल्‍पीकरण करने वाली विधियां

14 विधि के समक्ष समानता

15 धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्‍म स्‍थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध

16 लोक नियोजन के विषय में अवसर की समानता

17 अस्‍पृश्‍यता का अंत

18 उपाधियों का अंत

19 वाक-स्‍वतंत्रता आदि विषयक कुछ अधिकारों का संरक्षण

20 अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण

21 प्राण और दैहिक स्‍वतंत्रता का संरक्षण

22 कुछ दशाओं में गिरफ्तारी और निरोध से संरक्षण

23 मानव और दुर्व्‍यापार और बलात्श्रम का प्रतिषेध

24 कारखानों आदि में बालकों के नियोजन का प्रतिषेध

25 अंत:करण की और धर्म की अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्‍वतंत्रता

26 धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्‍वतंत्रता

27 किसी विशिष्‍ट धर्म की अभिवृद्धि के लिए करों के संदाय के बारे में स्‍वतंत्रता

28 कुल शिक्षा संस्‍थाओं में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक उपासना में उपस्थित होने के बारे में स्‍वतंत्रता

29 अल्‍पसंख्‍यक-वर्गों के हितों का संरक्षण

30 शिक्षा संस्‍थाओं की स्‍थापना और प्रशासन करने का अल्‍पसंख्‍यक-वर्गों का अधिकार

31 [निरसन]

31क संपदाओं आदि के अर्जन के लिए उपबंध करने वाली विधियों की व्‍यावृत्ति

31ख कुछ अधिनियमों और विनियमों का विधिमान्‍यकरण

31ग कुछ निदेशक तत्‍वों को प्रभाव करने वाली विधियों की व्‍यावृत्ति

31घ [निरसन]

32 इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों को प्रवर्तित कराने के लिए उपचार

32A [निरसन]

33 इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों का बलों आदि को लागू होने में, उपांतरण करने की संसद की शक्ति

34 जब किसी क्षेत्र में सेना विधि प्रवृत्त है तब इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों पर निर्बन्‍धन

35 इस भाग के उपबंधों को प्रभावी करने का विधान

36 परिभाषा

37 इस भाग में अंतर्विष्‍ट तत्‍वों का लागू होना

38 राज्‍य लोक कल्‍याण की अभिवृद्धि के लिए सामाजिक व्‍यवस्‍था बनाएगा

39 राज्‍य द्वारा अनुसरणीय कुछ नीति तत्‍व

39क समान न्‍याय और नि:शुल्‍क विधिक सहायता

40 ग्राम पंचायतों का संगठन

41 कुछ दशाओं में काम, शिक्षा और लोक सहायता पाने का अधिकार

42 काम की न्‍यायसंगत और मानवोचित दशाओं का तथा प्रसूति सहायता का उपबंध

43 कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि

43क उद्योगों के प्रबंध में कार्मकारों का भाग लेना

44 नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता

45 बालकों के लिए नि:शुल्‍क और अनिवार्य शिक्षा का उपबंध

46 अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्‍य दुर्बल वर्गों के शिक्षा और अर्थ संबंधी हितों की अभिवृद्धि

47 पोषाहार स्‍तर और जीवन स्‍तर को ऊंचा करने तथा लोक स्‍वास्‍थ्‍य को सुधार करने का राज्‍य का कर्तव्‍य

48 कृषि और पशुपालन का संगठन

48क पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन और वन तथा वन्‍य जीवों की रक्षा

49 राष्‍ट्रीय महत्‍व के संस्‍मारकों, स्‍थानों और वस्‍तुओं का संरक्षण

50 कार्यपालिका से न्‍यायपालिका का पृथक्‍करण

51 अंतरराष्‍ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि

51A मूल कर्तव्‍य

52 भारत के राष्‍ट्रपति

53 संघ की कार्यपालिका शक्ति

54 राष्‍टप्रति का निर्वाचन

55 राष्‍ट्रपति के निर्वाचन की रीति

56 राष्‍ट्रपति की पदावधि

57 पुनर्निर्वाचन के लिए पात्रता

58 राष्‍ट्रपति निर्वाचित होने के लिए अर्हताएं

59 राष्‍टप्रति के पद के लिए शर्तें

60 राष्‍ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान

61 राष्‍ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रकिया

62 राष्‍ट्रपति के पद में रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन करने का समय और आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित व्‍यक्ति की पदावधि

63 भारत का उप राष्‍ट्रपति

64 उप राष्‍ट्रपति का राज्‍य सभा का पदेन सभापति होना

65 राष्‍ट्रपति के पद में आकस्मिक रिक्ति के दौरान या उसकी अनुपस्थिति में उप राष्‍टप्रति का राष्‍ट्रपति के रूप में कार्य करना या उसके कृत्‍यों का निर्वहन

66 उप राष्‍ट्रपति का निर्वाचन

67 उप राष्‍ट्रपति की पदावधि

68 उप राष्‍ट्रपति के पद में रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन करने का समय और आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित व्‍यक्ति की पदावधि

69 उप राष्‍ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान

70 अन्‍य आकस्मिकताओं में राष्‍ट्रपति के कृत्‍यों का निर्वहन

71 राष्‍ट्रपति या उप राष्‍ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित या संसक्‍त विषयत

72 क्षमता आदि की और कुछ मामलों में दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण की राष्‍ट्रपति की शक्ति

73 संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्‍तार

74 राष्‍ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रि-परिषद

75 मंत्रियों के बारे में अन्‍य उपबंध

76 भारत का महान्‍यायवादी

77 भारत सरकार के कार्य का संचालन

78 राष्‍ट्रपति को जानकारी देने आदि के संबंध में प्रधानमंत्री के कर्तव्‍य

79 संसद का गठन

80 राज्‍य सभा की संरचना

81 लोक सभा की संरचना

82 प्रत्‍येक जनगणना के पश्‍चात पुन: समायोजन

83 संसद के सदनों की अवधि

84 संसद की सदस्‍यता के लिए अर्हता

85 संसद के सत्र, सत्रावसान और विघटन

86 सदनों के अभिभाषण का और उनको संदेश भेजने का राष्‍टप्रति का अधिकार

87 राष्‍ट्रपति का विशेष अभिभाषण

88 सदनों के बारे में मंत्रियों और महान्‍यायवादी के अधिकार

89 राज्‍य सभा का सभापति और उप सभापति

90 उप सभापति का पद रिक्‍त होना, पदत्‍याग और पद से हटाया जाना

91 सभापति के पद के कर्तव्‍यों का पालन करने या सभापति के रूप में कार्य करने की उप सभापति या अन्‍य व्‍यक्ति की शक्ति

92 जब सभापति या उप सभापति को पद से हटाने का कोई संकल्‍प विचाराधीन है तब उसका पीठासीन न होना

93 लोक सभा और अध्‍यक्ष और उपाध्‍यक्ष

94 अध्‍यक्ष और उपाध्‍यक्ष का पद रिक्‍त होना, पद त्‍याग और पद से हटाया जाना

95 अध्‍यक्ष के पद के कर्तव्‍यों को पालन करने या अध्‍यक्ष के रूप में कार्य करने की उपाध्‍यक्ष या अन्‍य व्‍यक्ति की शक्ति

96 जब अध्‍यक्ष या उपाध्‍यक्ष को पद से हटाने का कोई संकल्‍प विचाराधीन है तब उसका पीठासीन न होना

97 सभापति और उप सभापति तथा अध्‍यक्ष और उपाध्‍यक्ष के वेतन और भत्ते

98 संसद का सचिवालय

99 सदस्‍यों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान

100 सदनों में मतदान, रिक्तियों के होते हुए भी सदनों की कार्य करने की शक्ति और गणपूर्ति

101 स्‍थानों का रिक्‍त होना

102 सदस्‍यता के लिए निरर्हताएं

103 सदस्‍यों की निरर्हताओं से संबंधित प्रश्‍नों पर विनिश्‍चय

104 अनुच्‍छेद 99 के अधीन शपथ लेने या प्रतिज्ञान करने से पहले या निरर्हित किए जाने पर बैठने और मत देने के लिए शास्ति

105 संसद के सदनों की तथा उनके सदस्‍यों और समितियों की शक्तियां, विशेषाधिकार आदि

106 सदस्‍यों के वेतन और भत्ते

107 विधेयकों के पुर: स्‍थापन और पारित किए जाने के संबंध में उपलबंध

108 कुछ दशाओं में दोनों सदनों की संयुक्‍त बैठक

109 धन विधेयकों के संबंध में विशेष प्रक्रिया

110 “धन विधेयक” की परिभाषा

111 विधेयकों पर अनुमति

112 वार्षिक वित्तीय विवरण

113 संसद में प्राक्‍कलनों के संबंध में प्रक्रिया

114 विनियोग विधेयक

115 अनुपूरक, अतिरिक्‍त या अधिक अनुदान

116 लेखानुदान, प्रत्‍ययानुदान और अपवादानुदान

117 वित्त विधेयकों के बारे में विशेष उपबंध

118 प्रक्रिया के नियम

119 संसद में वित्तीय कार्य संबंधी प्रक्रिया का विधि द्वारा विनियमन

120 संसद में प्रयोग की जाने वाली भाषा

121 संसद में चर्चा पर निर्बंधन

122 न्‍यायालयों द्वारा संसद की कार्यवाहियों की जांच न किया जाना

123 संसद के विश्रांतिकाल में अध्‍यादेश प्रख्‍यापित करने की राष्‍ट्रपति की शक्ति

124 उच्‍चतम न्‍यायालय की स्‍थापना और गठन

125 न्‍यायाधीशों के वेतन आदि

126 कार्यकारी मुख्‍य न्‍यायमूर्ति की नियुक्ति

127 तदर्थ न्‍यायाधीशों की नियुक्ति

128 उच्‍चतम न्‍यायालय की बैठकों में सेवानिवृत्त न्‍यायाधीशों की उपस्थिति

129 उच्‍चतम न्‍यायालय का अभिलेख न्‍यायालय होना

130 उच्‍चतम न्‍यायालय का स्‍थान

131 उच्‍चतम न्‍यायालय की आरंभिक अधिकारिता

131क [निरसन]

132 कुछ मामलों में उच्‍च न्‍यायालयों से अपीलों में उच्‍चतम न्‍यायालय की अपीली अधिकारिता

133 उच्‍च न्‍यायालयों में सिविल विषयों से संबंधित अपीलों में उच्‍चतम न्‍यायालय की अपीली अधिकारिता

134 दांडिक विषयों में उच्‍चतम न्‍यायालय की अपीली अधिकारिता

134क उच्‍चतम न्‍यायालय में अपील के लिए प्रमाणपत्र

135 विद्यमान विधि के अधीन फेडरल न्‍यायालय की अधिकारिता और शक्तियों का उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा प्रयोक्‍तव्‍य होना

136 अपील के लिए उच्‍चतम न्‍यायालय की विशेष इजाजत

137 निर्णयों या आदेशों का उच्‍चतम न्‍यायालयों द्वारा पुनर्विलोकन

138 उच्‍चतम न्‍यायालय की अधिकारिता की वृद्धि

139 कुछ रिट निकालने की शक्तियों का उच्‍चतम न्‍यायालय को प्रदत्त किया जाना

139क कुछ मामलों का अंतरण

140 उच्‍चतम न्‍यायालय की आनुषंगिक शक्तिया

141 उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा घोषित विधि का सभी न्‍यायालयों पर आबद्धकर होना

142 उच्‍चतम न्‍यायालय की डिक्रियों और आदेशों का प्रवर्तन और प्रकटीकरण आदि के बारे में आदेश

143 उच्‍चतम न्‍यायालय से परामर्श करने की राष्‍ट्रपति की शक्ति

144 सिविल और न्‍यायिक प्राधिकारियों द्वारा उच्‍चतम न्‍यायालय

144क [निरसन]

145 न्‍यायालय के नियम आदि

146 उच्‍चतम न्‍यायालय के अधिकारी और सेवक तथा व्‍यय

147 निर्वचन

148 भारत का नियंत्रक – महा लेखापरीक्षक

149 नियंत्रक महा लेखापरीक्षक के कर्तव्‍य और शक्तियां

150 संघ के और राज्‍यों के लेखाओं का प्ररूप

151 संपरीक्षा प्रतिवेदन

152 परिभाषा

153 राज्‍यों के राज्‍यपाल

154 राज्‍य की कार्यपालिका शक्ति

155 राज्‍यपाल की नियुक्ति

156 राज्‍य की पदावधि

157 राज्‍यपाल के पद के लिए शर्तें

158 राज्‍यपाल के पद के लिए शर्तें

159 राज्‍यपाल द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान

160 कुछ आकस्मिकताओं में राज्‍यपाल के कृत्‍यों का निर्वहन

161 क्षमा आदि की और कुछ मामलों में दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण की राज्‍यपाल की शक्ति

162 राज्‍य की कार्यपालिका शक्ति का विस्‍तार

163 राज्‍यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रि परिषद

164 मंत्रियों के बारे में अन्‍य उपबंध

165 राज्‍य का महाधिवक्‍ता

166 राज्‍य की सरकार के कार्य का संचालन

167 राज्‍यपाल को जानकारी देने आदि के संबंध में मुख्‍यमंत्री के कर्तव्‍य

168 राज्‍यों के विधान – मंडलों का गठन

169 राज्‍यों में विधान परिषदों का उत्‍सादन या सृजन

170 विधान सभाओं की संरचना

171 विधान परिषदों की संरचना

172 राज्‍यों के विधान-मंडलों की अवधि

173 राज्‍य के विधान-मंडल की सदस्‍यता के लिए अर्हता

174 राज्‍य के विधान-मंडल के सत्र, सत्रावहसान और विघटन

175 सदन और सदनों में अभिभाषण का और उनको संदेश भेजने का राज्‍यपाल का अधिकार

176 राज्‍यपाल का विशेष अभिभाषण

177 सदनों के बारे में मंत्रियों और महाधिवक्‍ता के अधिकार

178 विधान सभा का अध्‍यक्ष और उपाध्‍यक्ष

179 अध्‍यक्ष और उपाध्‍यक्ष का पद रिक्‍त होना, पदत्‍याग और पद से हटाया जाना

180 अध्‍यक्ष के पद के कर्तव्‍यों का पालन करने या अध्‍यक्ष के रूप में कार्य करने की उपाध्‍यक्ष या अन्‍य व्‍यक्ति की शाक्ति

181 जब अध्‍यक्ष या उपाध्‍यक्ष को पद से हटाने का कोई संकल्‍प विचाराधीन है तब उसका पीठासीन न होना

182 विधान परिषद का सभापति और उप सभापति

183 सभापति और उप सभापति का पद रिक्‍त होना, पदत्‍याग और पद से हटाया जाना

184 सभापति के पद के कर्तव्‍यों का पालन करने या सभापति के रूप में कार्य करने की उप सभापति या अन्‍य व्‍यक्ति की शक्ति

185 जब सभापति या उप सभापति को पद से हटाने का कोई संकल्‍प विचाराधीन है तब उसका पीठासीन न होना

186 अध्‍यक्ष और उपाध्‍यक्ष तथ सभापति और उप सभापति के वेतन और भत्ते

187 राज्‍य के विधान मंडल का सचिवालय

188 सदस्‍यों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान

189 सदनों में मतदान, रिक्तियों के होते हुए भी सदनों की कार्य करने की शक्ति और गणपूर्ति

190 स्‍थानों का रिक्‍त होना

191 सदस्‍यता के लिए निरर्हताएं

192 सदस्‍यों की निरर्हताओं से संबंधित प्रश्‍नों पर विनिश्‍चय

193 अनुच्‍छेद 188 के अधीन शपथ लेने या प्रतिज्ञा करने से पहले या अर्हित न होते हुए या निरर्हित किए जाने पर बैठने और मत देने के लिए शास्ति

194 विधान-मंडलों के सदनों की तथा सदस्‍यों और समितियों की शक्तियां, विशेषधिकार आदि

195 सदस्‍यों के वेतन और भत्ते

196 विधेयकों के पुर: स्‍थापन और पारित किए जाने के संबंध में उपबंध

197 धन विधेयकों से भिन्‍न विधेयकों के बारे में विधान परिषद की शक्तियों पर निर्बंधन

198 धन विधेयकों के संबंध में विशेष प्रक्रिया

199 “धन विधेयक” की परिभाषा

200 विधेयकों पर अनुमति

201 विचार के लिए आरक्षित विधेयक

202 वार्षिक वित्तीय विवरण

203 विधान-मंडल में प्राक्‍कलनों के संबंध में प्रक्रिया

204 विनियोग विधेयक

205 अनुपूरक, अतिरिक्‍त या अधिक अनुदान

206 लेखानुदान, प्रत्‍ययानुदान और अपवादानुदान

207 वित्त विधेयकों के बारे में विशेष उपबंध

208 प्रक्रिया के नियम

209 राज्‍य के विधान-मंडल में वित्तीय कार्य संबंधी प्रक्रिया का विधि द्वारा विनियमन

210 विधान मंडल में प्रयोग की जाने वाली भाषा

211 विधान-मंडल में चर्चा पर निर्बंधन

212 न्‍यायालयों द्वारा विधन मंडल की कार्यवाहियों की जांच न किया जाना

213 विधान मंडल के विश्रांतिकाल में अध्‍यादेश प्रख्‍याति करने की राज्‍यपाल की शक्ति

214 राज्‍यों के लिए उच्‍च न्‍यायालय

215 उच्‍च न्‍यायालयों का अभिलेख न्‍यायालय होना

216 उच्‍च न्‍यायालयों का गठन

217 उच्‍च न्‍यायालय के न्‍यायाधीश की नियुक्ति और उसके पद की शर्तें

218 उच्‍चतम न्‍यायालय से संबंधित कुछ उपबंधों का उच्‍च न्‍यायालयों का लागू होना

219 उच्‍च न्‍यायालयों के न्‍यायाधीशों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान

220 स्‍थायी न्‍यायाधीश रहने के पश्‍चात विधि-व्‍यवसाय पर निर्बंधन

221 न्‍यायाधीशों के वेतन आदि

222 किसी न्‍यायाधीश का एक उच्‍च न्‍यायालय से दूसरे उच्‍च न्‍यायालय को अंतरण

223 कार्यकारी मुख्‍य न्‍यायमूर्ति की नियुक्ति

224 अपर और कार्यकारी न्‍यायाधीशों की नियुक्ति

224क उच्‍च न्‍यायालयों की बैठकों में सेवानिवृत्त न्‍यायाधीशों की नियुक्ति

225 विद्यमान उच्‍च न्‍यायालयों की अधिकारिता

226 कुछ रिट निकालने की उच्‍च न्‍यायालय की शक्ति

226क [निरसन]

227 सभी न्‍यायालयों के अधीक्षण की उच्‍च न्‍यायालय की शक्ति

228 कुछ मामलों का उच्‍च न्‍यायालय को अंतरण

228क [निरसन]

229 उच्‍च न्‍यायालयों के अधिकारी और सेवक तथा व्‍यय

230 उच्‍च न्‍यायालयों की अधिकारिता का संघ राज्‍य क्षेत्रों पर विस्‍तार

231 दो या अधिक राज्‍यों के लिए एक ही उच्‍च न्‍यायालय की स्‍थापना

233 जिला न्‍यायाधीशों की नियुक्ति

233क कुछ जिला न्‍यायाधीशों की नियुक्तियों का और उनके द्वारा किए गए निर्णयों आदि का विधिमान्‍यकरण

234 न्‍यायिक सेवा में जिला न्‍यायाधीशों से भिन्‍न व्‍यक्तियों की भर्ती

235 अधीनस्‍थ न्‍यायालयों पर नियंत्रण

236 निर्वचन

237 कुछ वर्ग या वर्गों के मजिस्‍ट्रेटों पर इस अध्‍याय के उपबंधों का लागू होना

238 [निरसन]

239 संघ राज्‍यक्षेत्रों का प्रशासन

239क कुछ संघ राज्‍य क्षेत्रों के लिए स्‍थानीय विधान मंडलों या मं‍त्रि-परिषदों का या दोनों का सृजन

239क दिल्‍ली के संबंध में विशेष उपबंध

239कक सांविधानिक तंत्र के विफल हो जाने की दशा में उपबंध

239कख विधान मंडल के विश्रांतिकाल में अध्‍यादेश प्रख्‍यापित करने की प्रशासक की शक्ति

240 कुछ संघ राज्‍य क्षेत्रों के लिए विनियम बनाने की राष्‍ट्रपति की शक्ति

241 संघ राज्‍य क्षेत्रों के लिए उच्‍च न्‍यायालय

242 [निरसन]

243 परिभाषाएं

243क ग्राम सभा

243ख पंचायतों का गठन

243ग पंचायतों की संरचना

243घ स्‍थानों का आरक्षण

243ड पंचायतों की अवधि, आदि

243च सदस्‍यता के लिए निरर्हताएं

243छ पंचायतों की शक्तियां, प्राधिकार और उत्तरदायित्‍व

243ज पंचायतों द्वारा कर अधिरोपित करने की शक्तियां और उनकी निधियां

243-झ वित्तीय स्थिति के पुनर्विलोकन के लिए वित्त आयोग का गठन

243ञ पंचायतों के लेखाओं की संपरीक्षा

243ट पंचायतों के लिए निर्वाचन

243ठ संघ राज्‍य क्षेत्रों को लागू होना

243ड इस भाग का कतिपय क्षेत्रों को लागू नह होना

243ढ विद्यमान विधियों और पंचायतों का बना रहना

243-ण निर्वाचन संबंधी मामलों में न्‍यायालयों के हस्‍तक्षेप का वर्जन

243त परिभाषाएं

243थ नगरपालिकाओं का गठन

243द नगरपालिकाओं की संरचना

243ध वार्ड समितियों, आदि का गठन और संरचना

243न स्‍थानों का आरक्षण

243प नगरपालिकाओं की अवधि, आदि

243फ सदस्‍यता के लिए निरर्हताएं

243ब नगरपालिकाओं, आदि की शक्तियां, प्राधिकार और उत्तरदायित्‍व

243भ नगरपालिकाओं द्वारा कर अधिरोपित करने की शक्ति और उनकी निधियां

243म वित्त आयोग

243य नगरपालिकाओं के लेखाओं की संपरीक्षा

243यक नगरपालिकाओं के लिए निर्वाचन

243यख संघ राज्‍यक्षेत्रों को लागू होना

243यग इस भाग का कतिपय क्षेत्रों को लागू न होना

243यघ जिला योजना के लिए समिति

243यड महानगर योजना के लिए समिति

243यच विद्यमान विधियों और नगरपालिकाओं का बना रहना

243यछ निर्वाचन संबंधी मामलों में न्‍यायालयों के हस्‍तक्षेप का वर्जन

244 अनुसूचित क्षेत्रों और जनजाति क्षेत्रों का प्रशासन.

244क असम के कुछ जनजाति क्षेत्रों को समाविष्‍ट करने वाला एक स्‍वशासी राज्‍य बनाना और उसके लिए स्‍थानीय विधान मंडल या मंत्रि परिषद का या दोनों का सृजन.

245 संसद द्वारा राज्‍यों के विधान मंडलों द्वारा बनाई गई विधियों का विस्‍तार.

246 संसद द्वारा और राज्‍य के विधान मंडलों द्वारा बनाई गई विधियों की विषयवस्‍तु.

247 कुछ अतिरिक्‍त न्‍यायालयों की स्‍थापना का उपबंध करने की संसद की शक्ति.

248 अवशिष्‍ट विधायी शक्तियां.

249 राज्‍य सूची में के विषय के संबंध में राष्‍ट्रीय हित में विधि बनाने की संसद की शक्ति.

250 यदि आपात की उदघोषणा प्रवर्तन में हो तो राज्‍य सूची में के विषय के संबंध में विधि.

251 संसद द्वारा अनुच्‍छेद 249 और अनुच्‍छेद 250 के अधीन बनाई गई विधियों और राज्‍यों के विधान मंडलों द्वारा बनाई गई विधियों में असंगति.

252 दो या अधिक राज्‍यों के लिए उनकी सहमति से विधि बनाने की संसद की शक्ति और ऐसी विधि का किसी अन्‍य राज्‍य द्वारा अंगीकार किया जाना.

253 अंतरराष्‍ट्रीय करारों को प्रभावी करने के लिए विधान.

254 संसद द्वारा बनाई गई विधियों और राज्‍यों के विधान मंडलों द्वारा बनाई गई विधियों में असंगति.

255 सिफारिशों और पूर्व मंजूरी के बारे में अपेक्षाओं को केवल प्रक्रिया के विषय मानना.

256 राज्‍यों की ओर संघ की बाध्‍यता.

257 कुछ दशाओं में राज्‍यों पर संघ का नियंत्रण.

257क [निरसन]

258 कुछ दशाओं में राज्‍यों को शक्ति प्रदान करने आदि की संघ की शक्ति.

258क संघ को कृत्‍य सौंपने की राज्‍यों की शक्ति.

259 [निरसन]

260 भारत के बाहर के राज्‍य क्षेत्रों के संबंध में संघ की अधिकारिता.

261 सार्वजनिक कार्य, अभिलेख और न्‍यायिक कार्यवाहियां.

262 अंतरराज्यिक नदियों या नदी दूनों के जल संबंधी विवादों का न्‍यायनिर्णयन.

263 अंतरराज्‍य परिषद के संबंध में उपबंध.

264 विधि के प्राधिकार के बिना करों का अधिरोपण न किया जाना.

265 विधि के प्राधिकार के बिना करों का अधिरोपण न किया जाना.

266 भारत और राज्‍यों के संचित निधियां और लोक लेखे.

267 आकस्मिकता निधि.

268 संघ द्वारा उदगृहीत किए जाने वाले किन्‍तु राज्‍यों द्वारा संगृहीत और विनियोजित किए जाने वाले शुल्‍क.

269 संघ द्वारा उदगृहीत और संगृहीत किन्‍तु राज्‍यों को सौंपे जाने वाले कर.

270 उदगृहीत कर और उनका संघ तथा राज्‍यों के बीच वितरण.

271 कुछ शुल्‍कों और करों पर संघ के प्रयोजनों के लिए अधिभार.

272 [निरसन]

273 जूट पर और जूट उत्‍पादों का निर्यात शुल्‍क के स्‍थान पर अनुदान.

274 ऐसे कराधान पर जिसमें राज्‍य हितबद्ध है, प्रभाव डालने वाले विधेयकों के लिए राष्‍ट्रपति की पूर्व सिफारिश की अपेक्षा.

275 कुछ राज्‍यों को संघ अनुदान.

276 वृत्तियों, व्‍यापारों, आजीविकाओं और नियोजनों पर कर.

277 व्‍यावृत्ति.

278 [निरसन]

279 “शुद्ध आगम”, आदि की गणना.

280 वित्त आयोग.

281 वित्त आयोग की सिफारिशें.

282 संघ या राज्‍य द्वारा अपने राजस्‍व के लिए जाने वाले व्‍यय.

283 संचित निधियों, आकस्मिकता निधियों और लोक लेखाओं में जमा धनराशियों की अभिरक्षा आदि.

284 लोक सेवकों और न्‍यायालयों द्वारा प्राप्‍त वादकर्ताओं की जमा राशियों और अन्‍य धनराशियों की अभिरक्षा.

285 संघ और संपत्ति को राजय के कराधान से छूट.

286 माल के क्रय या विक्रय पर कर के अधिरोपण के बारे में निर्बंधन.

287 विद्युत पर करों से छूट.

288 जल या विद्युत के संबंध में राज्‍यों द्वारा कराधान से कुछ दशाओं में छूट.

289 राज्‍यों की संपत्ति और आय को संघ और कराधार से छूट.

290 कुछ व्‍ययों और पेंशनों के संबंध में समायोजन.

290क कुछ देवस्‍वम निधियों की वार्षिक संदाय.

291 [निरसन]

292 भारत सरकार द्वारा उधार लेना.

293 राज्‍यों द्वारा उधार लेना.

294 कुछ दशाओं में संपत्ति, अ‍ास्तियों, अधिकारों, दायित्‍वों और बाध्‍यताओं का उत्तराधिकार.

295 अन्‍य दशाओं में संपत्ति, अ‍ास्तियों, अधिकारों, दायित्‍वों और बाध्‍यताओं का उत्तराधिकार.

296 राजगामी या व्‍यपगत या स्‍वामीवि‍हीन होने से प्रोदभूत संपत्ति.

297 राज्‍य क्षेत्रीय सागर खण्‍ड या महाद्वीपीय मग्‍नतट भूमि में स्थित मूल्‍यवान चीजों और अनन्‍य आर्थिक क्षेत्र संपत्ति स्रोतों का संघ में निहित होना.

298 व्‍यापार करने आदि की शक्ति.

299 संविदाएं.

300 वाद और कार्यवाहियां.

300क विधि के प्राधिकार के बिना व्‍यक्तियों को संपत्ति से वंचित न किया जाना.

301 व्‍यापार, वाणज्यि और समागम की स्‍वतंत्रता.

302 व्‍यापार, वाणज्यि और समागम पर निर्बंधन अधिरोपित करने की संसद की शक्ति.

303 व्‍यापार और वाणिज्‍य के संबंध में संघ और राज्‍यों की विधायी शक्तियों पर निर्बंधन.

304 राज्‍यों के बीच व्‍यापार, वाणिज्य और समागम पर निर्बंधन.

305 विद्यमान विधियों और राज्‍य के एकाधिकार का उपबंध करने वाली विधियों की व्‍यावृत्ति.

306 [निरसन]

307 अनुच्‍छेद 301 से अनुच्‍छेद 304 के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए प्राधिकारी की नियुक्ति.

308 निर्वचन.

309 संघ या राज्‍य की सेवा करने वाले व्‍यक्तियों की भर्ती और सेवा की शर्तें.

310 संघ या राज्‍य की सेवा करने वाले व्‍यक्तियों की पदावधि.

311 संघ या राज्‍य के अधीन सिविल हैसियत में नियोजित व्‍यक्तियों का पदच्‍युत किया जाना या पंक्ति में अवनत किया जाना.

312 अखिल भारतीय सेवाएं.

312क कुछ सेवाओं के अधिकारियों की सेवा की शर्तों में परिवर्तन करने या उन्‍हें प्रतिसंहृत करने की संसद की शक्ति.

313 संक्रमण कालीन उपबंध.

314 [निरसन]

315 संघ और राज्‍यों के लिए लोक सेवा आयोग.

316 सदस्‍यों की नियुक्ति और पदावधि.

317 लोक सेवा आयोग के किसी सदस्‍य का हटाया जाना और निलंबित किया जाना.

318 आयोग के सदस्‍यों और कर्मचारिवृंद की सेवा की शर्तों के बारे में विनियम बनाने की शक्ति.

319 आयोग के सदस्‍यों द्वारा ऐसे सदस्‍य न रहने पर पद धारण करने के सबंध में प्रतिषेध.

320 लोक सेवा आयोगों के कृत्‍य.

321 लोक सेवा आयोगों के कृत्‍यों का विस्‍तार करने की शक्ति.

322 लोक सेवा आयोगों के व्‍यय.

323 लोक सेवा आयोगों के प्रतिवेदन.

323क प्रशासनिक अधिकरण.

323ख अन्‍य विषयों के लिए अधिकरण.

324 निर्वाचनों के अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण का निर्वाचन आयोग में निहित होना.

325 धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर किसी व्‍यक्ति का निर्वाचक नामावली में सम्मिलित किए जाने के लिए अपात्र न होना और उसके द्वारा किसी विशेष निर्वाचक-नामावली में सम्मिलित किए जाने का दावा न किया जाना.

326 लोक सभा और राज्‍यों की विधान सभाओं के लिए निर्वाचनों का वयस्‍क मताधिकार के आधार पर होना.

327 विधान मंडल के लिए निर्वाचनों के संबंध में उपबंध करने की संसद की शक्ति.

328 किसी राज्‍य के विधान मंडल के लिए निर्वाचनों के संबंध में उपबंध करने की उस विधान मंडल की शक्ति.

329 निर्वाचन संबंधी मामलों में न्‍यायालयों के हस्‍तक्षेप का वर्जन.

329क [निरसन]

330 लोक सभा में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्‍थानों का आरक्षण.

331 लोक सभा में आंग्‍ल भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्‍व.

332 राज्‍यों की विधान सभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्‍थानों का आरक्षण.

333 राज्‍यों की विधान सभाओं में आंग्‍ल भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्‍व.

334 स्‍थानों के आरक्षण और विशेष प्रतिनिधित्‍व का साठ वर्ष के पश्‍चात न रहना.

335 सेवाओं और पदों के लिए अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के दावे.

336 कुछ सेवाओं में आंग्‍ल भारतीय समुदाय के लिए विशेष उपबंध.

337 आंग्‍ल भारतीय समुदाय के फायदे के लिए शैक्षिक अनुदान के लिए विशेष उपबंध.

338 राष्‍ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग.

338क राष्‍ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग.

339 अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन और अनुसूचित जनजातियों के कल्‍याण के बारे में संघ का नियंत्रण.

340 पिछड़े वर्गों की दशाओं के अन्‍वेषण के लिए आयोग की नियुक्ति.

341 अनुसूचित जातियां.

342 अनुसूचित जनजातियां.

343 संघ की राजभाषा.

344 राजभाषा के संबंध में आयोग और संसद की समिति.

345 राज्‍य की राजभाषा या राजभाषाएं.

346 एक राज्‍य और दूसरे राज्‍य के बीच या किसी राज्‍य और संघ के बीच पत्रादि की राजभाषा.

347 एक राज्‍य और दूसरे राज्‍य के बीच या किसी राज्‍य और संघ के बीच पत्रादि की राजभाषा.

348 उच्‍चतम न्‍यायालय और उच्‍च न्‍यायालयों में और अधिनियमों, विधेयकों आदि के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा.

349 भाषा से संबंधित कुछ विधियां अधिनियमित करने के लिए विशेष प्रक्रिया.

350 व्‍यथा के निवारण के लिए अभ्‍यावेदन में प्रयोग की जाने वाली भाषा.

350क प्राथमिक स्‍तर पर मातृभाषा में शिक्षा की सुविधाएं.

350ख भाषाई अल्‍पसंख्‍यक वर्गों के लिए विशेष अधिकारी.

351 हिन्‍दी भाषा के विकास के लिए निदेश.

352 आपात की उदघोषणा.

353 आपात की उदघोषणा का प्रभाव.

354 जब आपात की उदघोषणा प्रवर्तन में है तब राजस्‍वों के वितरण संबंधी उपबंधों का लागू होना.

355 बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से राज्‍य की संरक्षा करने का संघ का कर्तव्‍य.

356 राज्‍यों सांविधानिक तंत्र के विफल हो जाने की दशा में उपबंध.

357 अनुच्‍छेद 356 के अधीन की गई उदघोषणा के अधीन विधायी शाक्तियों का प्रयोग.

358 आपात के दौरान अनुच्‍छेद 19 के उपबंधों का निलंबन.

359 आपात के दौरान भाग 3 द्वारा प्रदत्त अधिकारों के प्रवर्तन का निलबंन.

359क [निरसन]

360 वित्तीय आपात के बारे में उपबंध.

361 राष्‍ट्रपति और राज्‍यपालों और राजप्रमुखों का संरक्षण.

361क संसद और राज्‍यों के विधान मंडलों की कार्यवाहियों की प्रकाशन का संरक्षण.

361ख लाभप्रद राजनीतिक पद पर नियुक्ति के लिए निरर्हता.

362 [निरसन]

363 कुछ संधियों, करारों आदि से उत्‍पन्‍न विवादों में न्‍यायालयों के हस्‍तक्षेप का वर्जन.

363क देशी राज्‍यों के शासकों को दी गई मान्‍यता की समाप्ति और निजी थौलियों का अंत.

364 महापत्तनों और विमानक्षेत्रों के बारे में विशेष उपबंध.

365 संघ द्वारा दिए गए निदेशों का अनुपालन करने में या उनको प्रभावी करने में असफलता का प्रभाव.

366 परिभाषाएं.

367 निर्वचन.

368 संविधान का संशोधन करने की संसद की शक्ति और उसके लिए प्रक्रिया.

369 राज्‍य सूची के कुछ विषयों के सबंध में विधि बनाने की संसद की इस प्रकार अस्‍थायी शक्ति मानो वे समवर्ती सूची के विषय हों.

370 जम्‍मू और कश्‍मीर राज्‍य के संबंध में अस्‍थायी उपबंध.

371 महाराष्‍ट्र और गुजरात राज्‍यों के संबंध में विशेष उपबंध.

371क नागालैंड राज्‍य के संबंध में विशेष उपबंध.

371ख असम राज्‍य के संबंध में विशेष उपबंध.

371ग मणिपुर राज्‍य के संबंध में विशेष उपबंध.

371घ आंध्र प्रदेश राज्‍य के संबंध में विशेष उपबंध.

371ड आंध्र प्रदेश में केंद्रीय विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना.

371च सिक्किम राज्‍य के संबंध में विशेष उपबंध.

371छ मिजोरम राज्‍य के संबंध में विशेष उपबंध.

371ज अरुणाचल प्रदेश राज्‍य के संबंध में विशेष उपबंध.

371-झ गोवा राज्‍य के संबंध में विशेष उपबंध.

372 विद्यमान विधियों का प्रवृत्त बने रहना और उनका अनुकूलन.

372क विधियों का अनुकूलन करने की राष्‍ट्रपति की शक्ति.

373 निवारक निरोध में रखे गए व्‍यक्तियों के संबंध में कुछ दशाओं में आदेश करने की राष्‍ट्रपति की शाक्ति.

374 फेडरल न्‍यायालय के न्‍यायाधीशों और फेडरल न्‍यायालय में या सपरिषद हिज मेजेस्‍टी के समक्ष लंबित कार्यवाहियों के बारे में उपबंध.

375 संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुए न्‍यायालयों, प्राधिकारियों और अधिकारियों का कृत्‍य करते रहना.

376 उच्‍च न्‍यायालयों के न्‍यायाधीशों के बारे में उपबंध.

377 भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक के बारे में उपबंध.

378 लोक सेवा आयोगों के बारे में उपबंध.

378क आंध्र प्रदेश विधान सभा की अवधि के बारे में विशेष उपबंध.

379-391 [निरसन]

392 कठिनाइयों को दूर करने की राष्‍ष्‍ट्रपति की शक्ति.

393 संक्षिप्‍त नाम.

394 प्रारंभ.

394क हिन्‍दी भाषा में प्राधिकृत पाठ.

395

 



 


 

 

मौलिक अधिकार 12-35

भारतीय पोलिटी स्टडी नोट्स भारतीय राजनीति के मौलिक अधिकार और मौलिक कर्तव्यों पर आधारित हैं| ये सभी आगामी सिविल सेवा परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं|

मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 12 से 35)


1. मौलिक अधिकारों को भारत के मैग्ना कार्टाके रूप में वर्णित किया गया है।
2. इस अवधारणा को अमेरिकी अधिकारों की सूची से लिया गया है। मूल अधिकारों के प्राचीन ज्ञात तथ्य प्राचीन भारत, ईरान आदि मे भी मौजूद थे।
3. मौलिक अधिकारों का यह नाम इसलिए है क्योंकि उन्हें संविधान द्वारा प्रत्याभूत और संरक्षित किया जाता है, जोकि राष्ट्र का मूलभूत नियम है। वे इस अर्थ में भी 'मौलिक' हैं कि वे व्यक्तियों के सर्वांगीण विकास (भौतिक, बौद्धिक, नैतिक और आध्यात्मिक) के लिए सबसे ज़रूरी हैं।
4. मूल संविधान में सात मौलिक अधिकार शामिल थे, हालांकि, 44 वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1978 के बाद, संपत्ति का अधिकार निरस्त कर दिया गया था और अब केवल छह मौलिक अधिकार हैं।
5. मौलिक अधिकारों से संबंधित अनुच्छेद निम्न हैं:
A. 12- राज्य की परिभाषा
B. 13- भाग -3 या मौलिक अधिकारों के साथ असंगत कानून
6. मौलिक अधिकारों का वर्गीकरण निम्नलिखित हैं:
C. समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14-18)

कानून के समक्ष समानता और कानूनों का समान संरक्षण, (अनुच्छेद 14)

धर्म, जाति, लिंग या जन्म स्थान (अनुच्छेद 15) के आधार पर भेदभाव निषेध।

सार्वजनिक रोजगार के मामलों में अवसर की समानता, (अनुच्छेद 16)

अस्पृश्यता का उन्मूलन और उसके अभ्यास का निषेध, (अनुच्छेद 17)

सैन्य और शैक्षिक को छोड़कर अन्य उपाधियों का उन्मूलन, (अनुच्छेद 18)

D. स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19-22)
(a) निम्नांकित की स्वतंत्रता से सम्बंधित छह अधिकारों का संरक्षण:

भाषण और अभिव्यक्ति,

विधानसभा,

संघ,

आंदोलन,

निवास, और

व्यवसाय (अनुच्छेद 19)

(b) अपराधों के लिए सजा के संबंध में संरक्षण (अनुच्छेद 20) ।
(c) जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण (अनुच्छेद 21)
(d) प्राथमिक शिक्षा का अधिकार (अनुच्छेद 21 ए)
(e) कुछ मामलों में गिरफ्तारी और नज़रबंदी के खिलाफ संरक्षण (अनुच्छेद 22)

E. शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23-24)
(a) व्यक्तियों और मजबूर श्रमिकों के खरीद-फरोक्त पर रोक, (अनुच्छेद 23)
(b) कारखानों आदि में बच्चों के रोजगार पर रोक, (अनुच्छेद 24)

F. धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25-28)
(a) धार्मिक आस्था की स्वतंत्रता और धार्मिक संस्था के अभ्यास और प्रचार की स्वतंत्रता, (अनुच्छेद 25)
(b) धार्मिक मामलों का प्रबंधन की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 26)
(c) किसी भी धर्म को बढ़ावा देने के लिए करों के भुगतान से स्वतंत्रता (अनुच्छेद 27)
(d) कुछ शैक्षिक संस्थान में धार्मिक शिक्षा या पूजा में भाग लेने की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 28)

G. सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार (अनुच्छेद 29-30)
(a) अल्पसंख्यकों की भाषा, लिपि और संस्कृति का संरक्षण, (अनुच्छेद 29)
(b) अल्पसंख्यकों के शैक्षिक संस्था स्थापित करने और प्रशासन का अधिकार, (अनुच्छेद 30)

H. संवैधानिक उपचार का अधिकार (अनुच्छेद 32) – संविधान की आत्मा ।
मौलिक अधिकारों को लागू करने के सम्बन्ध में उच्चतम न्यायालय जाना जिसमे निम्न याचिकाए शामिल है:
(I) बन्दी प्रत्यक्षीकरण, (ii) परमादेश, (iii) निषेध, (iv) प्रमाणिकता, और (v) पृच्छा (अनुच्छेद 32) ।

7. अनुच्छेद 33, संसद के मौलिक अधिकारों को संशोधित करने के अधिकार से संबंधित है।
8. 34 मार्शल लॉ से सम्बंधित है।
9. अनुच्छेद 35, मूलभूत अधिकारों के सन्दर्भ में बने आवश्यक कानूनों से सम्बंधित है।
10. मौलिक अधिकार जो केवल नागरिकों के लिए उपलब्ध हैं, वें हैं - 15, 16, 1 9, 2 9 और 30।
11. मौलिक अधिकार जो नागरिकों के साथ-साथ गैर-नागरिकों को भी उपलब्ध हैं, वे हैं - 14, 20, 21, 21 ए, 22, 23, 24, 25, 26, 27 और 28।

मौलिक कर्तव्य

1. ये नागरिकों के लिए 11 दिशानिर्देशों का एक समूह है।
2. मूल संविधान में मूलभूत कर्तव्यों के बारे में उल्लेख नहीं किया गया।
3. मूलभूत कर्तव्यों के विचार को पूर्व सोवियत संविधान से लिया गया है और अब ये रूस के पास नहीं है। शायद केवल जापान ही ऐसी एक बड़ा देश है, जिसमें बुनियादी कर्तव्यों से जुडा एक विशेष अध्याय है।
4. नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों को संविधान में 1976 में जोड़ा गया था। 2002 में, एक और मौलिक कर्तव्य जोड़ा गया।
5. इन्हें 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा गठित की गई स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों पर जोड़ा गया था। इसमें केवल 8 मूलभूत कर्तव्यों की सिफारिश की गई थी जिसके साथ ही साथ आर्थिक दंड भी शामिल था। हालांकि, सरकार ने सजा के प्रावधान को स्वीकार नहीं किया।
6. एक नया हिस्सा – 4 A, एक नया अनुच्छेद 51 A को 42 वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1976 के आधार पर जोड़ा गया था। दस कर्तव्यों को 51 A में जोड़ा गया था। वर्तमान में ग्यारह कर्तव्य हैं।
7. 11 वें मौलिक कर्तव्यों को 86 वें संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया था।
8. मौलिक कर्तव्यों की सूची निम्न है:

      (a) संविधान का पालन करना और उसके आदर्शों और संस्थानों, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय गान का सम्मान करना,

      (b) स्वतंत्रता के लिए राष्ट्रीय संघर्ष को प्रेरित करने वाले महान आदर्शों का पालन करना;

      (c) भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को बनाए रखना और संरक्षित करना;

      (d) देश की रक्षा करने और राष्ट्रीय सेवा प्रदान करना जब ऐसा करने के लिए कहा जाये;

      (e) धार्मिक, भाषाई और क्षेत्रीय या आंशिक विविधता से आगे बढ़कर भारत के सभी लोगों के बीच सामंजस्य और समान भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना और महिलाओं की गरिमा के लिए अपमानजनक प्रथाओं को त्यागना;

      (f) देश की समग्र संस्कृति की समृद्ध विरासत के महत्व को समझना और संरक्षित रखना;

      (g) जंगलों, झीलों, नदियों और वन्य जीवन सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार करना और जीवित प्राणियों के लिए करुणा रखना;

      (h) वैज्ञानिक मनोवृति, मानवतावादि विचारधारा का विकास और जांच और सुधार की भावना विकसित करना;

      (i) सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना और हिंसा को रोकना;

      (j) व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधि के सभी क्षेत्रों में उत्कृष्टता की दिशा में प्रयास करना ताकि राष्ट्र निरंतर उपलब्धि के उच्च स्तर पर बढ़े; तथा

      (k) छह से चौदह वर्ष की उम्र के बीच अपने बच्चे के लिए शिक्षा के अवसर प्रदान करना। यह कर्तव्य 86 वीं संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया था।