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26/01/22

गणतंत्र दिवस हम क्यों मनाते हैं

गणतंत्र दिवस हम  26 जनवरी को क्यों मनाते हैं

 31 दिसम्बर 1929 की अर्द्धरात्रि को 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारों के बीच रावी नदी के तट पर भारतीय स्वतंत्रता का प्रतीक तिरंगा झंडा फहराया गया। इसके बाद 26 जनवरी 1930 को पूरे राष्ट्र में जगह-जगह सभाओं का आयोजन किया गया, जिनमें सभी लोगों ने सामूहिक रूप से स्वतंत्रता प्राप्त करने की शपथ ली।26 जनवरी 1930 का दिन पूरे राष्ट्र में प्रथम स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने का निश्चय किया गया। लेकिन 15 अगस्त को अपना देश आजाद हो गया था तो 26 जनवरी को यादगार बनाने के लिए हर साल हम 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाते हैं वैसे तो देखा जाए कि हमारा संविधान 26 नवंबर को लागू हुआ इसीलिए हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस  मनाया जाता है लेकिन कुछ ही आर्टिकल  लागू हुआ था संविधान की असली कॉपी प्रेम बिहारी नारायण रायजादा द्वारा लिखी गई थी दरअसल साल 1950 में 26 जनवरी के दिन ही हमारे देश में संविधान  पूर्ण रूप से लागू हुआ था, जिसके उपलक्ष्य में हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। एक स्वतंत्र गणराज्य बनने के लिए भारतीय संविधान सभा द्वारा 26 नवंबर 1949 को संविधान अपनाया गया था, लेकिन इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान को दो साल, 11 महीने और 18 दिनों में तैयार कर राष्ट्र को समर्पित किया था। जिसकी प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुआ जिस के अस्थाई अध्यक्ष/प्रथम अध्यक्ष डॉ सच्चिदानंद सिन्हा थे तथा दूसरी बैठक 11 दिसंबर 1946 को हुआ इसके बाद संविधान सभा के स्थाई अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद को बना दिया गया। कुल 12 अधिवेशन हुए। हमारा संविधान विश्‍व का सबसे बड़ा संविधान माना जाता है। इसे बनाने वाली संविधान सभा के अध्यक्ष भीमराव अंबेडकर थे। वहीं जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे। 

गणतंत्र दिवस पर झंडा कौन फहराता है-

राष्ट्रपति देश के संवैधानिक प्रमुख हैं और प्रधानमंत्री राजनीतिक। भारत का संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू किया गया था। जिस उपलक्ष्य में इस दिन गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। इसी दिन देश को अपने पहले राष्ट्रपति भी मिले थे। डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसी दिन राष्ट्रपति के रूप में कार्यालय संभाला था। इसलिए 26 जनवरी को राष्ट्रपति ध्वज फहराते हैं।

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