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17/08/22

 परमुख संगठन तथा उनके मुख्यालय


1). गैट (GATT) का मुख्यालय कहां है? 

उत्तर – जेनेवा (1947)


2). G-8 देशों की स्थापना कब हुई?

उत्तर – 1975


3). अंकटाड (UNCTAD) का मुख्यालय कहां स्थित है?

उत्तर – जेनेवा (1964)


4). अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का मुख्यालय कहां स्थित है? 

उत्तर – वाशिंगटन (1945)


5). खाद्य एवं कृति संगठन (FAO) कहां स्थित है? 

उत्तर – रोम (1945)


6). विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का मुख्यालय कहां है?

उत्तर – जिनेवा 1948


7). रेड क्रॉस का मुख्यालय कहां स्थित है?

उत्तर – जिनेवा (1863)


8). विश्व बैंक (World Bank) का मुख्यालय कहां स्थित है?

उत्तर – वाशिंगटन (1945)


9). G-15 देशों का मुख्यालय कहां स्थित है? 

उत्तर – जेनेवा (1989)


10). विश्व व्यापार संगठन (WTO) का मुख्यालय कहां है?

उत्तर – जेनेवा (1995)


11). नाटो (NATO) देशों का मुख्यालय कहां स्थित है?

उत्तर – ब्रुसेल्स (1949)


12). सार्क (SAARC) देशों का मुख्यालय कहां स्थित है? 

उत्तर – काठमांडू (1985)


13). एशियाई विकास बैंक (ADB) का मुख्यालय कहां स्थित है?

उत्तर – मनीला (1966)


14). अंतरराष्ट्रीय न्यायालय कहां स्थित है?

उत्तर – हेग (1946)


15). इंटरपोल कहां स्थित है?  


उत्तर – पेरिस (1923)

 भारत की प्रमुख नदियों के किनारे बसे शहर


✶ यमुना नदी  ➠ मथुरा, आगरा, दिल्ली, इलाहाबाद

✶ गंगा नदी ➠ इलाहाबाद, हरिद्धार, कानपुर, पटना, वाराणसी (बनारस)

✶ ब्रह्मपुत्र नदी ➠ सोकोवा घाट,  डिब्रूगढ़, गुवाहाटी

✶ सतलुज नदी ➠ फिरोजपुर, लुधियाना

✶ महानदी ➠ कटक, संबलपुर

✶ अलकनंदा नदी ➠  बद्रीनाथ

✶ तुंगभद्रा नदी  ➠ कुर्नूल

✶ झेलम नदी ➠ श्रीनगर

✶ ताप्ति नदी  ➠ सूरत

✶ कृष्णा नदी  ➠ विजयवाड़ा

✶ भीमा नदी  ➠ पंढरपुर

✶ रामगंगा नदी  ➠ बरेली

✶ बेतवा नदी  ➠ ओरछा

✶ शिप्रा या क्षिप्रा नदी) ➠ उज्जैन

✶ सरयू नदी  ➠ अयोध्या

✶ हुगली नदी  ➠ कोलकाता

✶ गोमती नदी ➠ लखनऊ

✶ नर्मदा नदी  ➠ जबलपुर

✶ चंबल नदी  ➠ कोटा

✶ गोदावरी नदी  ➠ नासिक

✶ कावेरी नदी  ➠ श्रीरंगपट्टनम्

✶ मूसी नदी  ➠ हैदराबाद

✶ स्वर्ण रेखा नदी  ➠ जमशेदपुर

✶ साबरमती नदी  ➠ अहमदाबाद

tringa ka etihas

 Indian Flag History: स्‍वतंत्रता दिवस आ गया है, बाजार से लेकर घरों के छत तक हर जगह अब हमारा प्‍यारा तिरंगा झंडा लहराता दिख रहा है। हर देशवासी अपने इस झंडे से जितना प्‍यार करता है, उतना ही इसके आन-बान-शान की गरिमा बनाए रखने के लिए मेहनत करता है। झंडे के मौजूदा स्‍वरूप को 22 जुलाई 1947 भारतीय संविधान सभा की बैठक के दौरान अपनाया गया, तब से झंडे का यही डिजाइन है, इस झंडे को 26 जनवरी 1950 को राष्‍ट्रीय ध्‍वज के रूप में अपनाया गया।


अभी ऐसा है तिरंगा

देश के तिरंगे में नाम के स्‍वरूप तीन अलग-अलग रंग की पट्टियां होती हैं, जिसमें सबसे ऊपर केसरिया फिर सफेद और सबसे नीचे हरे रंग की प‍ट्टी होती है। झंडे की चौड़ाई व लंबाई का अनुपात 2-3 का होता है। झंडे के बीच में सफेद पट्टी पर नीले रंग का अशोक चक्र होता है, जिसमें 24 तीलियां होती है।






7 अगस्‍त 1906 को पहला झंडा

आजादी के पहले 7 अगस्‍त 1906 को पारसी बागान चौक, कोलकत्‍ता में पहला ध्‍वज फहराया गया था, जिसे उस समय क्रांतिकारियों ने राष्‍ट्रीय ध्‍वज की संज्ञा दी थी। इस ध्‍वज में हरे, पीले और लाल रंग की पट्टियां थी। हरे रंग की पट्टी पर जहां कमल का फूल, वहीं बीच के पीले रंग पर वंदेमातरम व लाल रंग पर चांद-सूरज बने थे।

पेरिस में फहराया गया दूसरा झंडा

दूसरा झंडा पेरिस में फहराया गया था, हालांकि इसके समय को लेकर इतिहासकारों में मतभेद है। कुछ का कहना है कि मैडम कामा व उनके साथियों द्वारा 1907 में फहराया गया था, वहीं कुछ का कहना है कि यह घटना 1905 में हुई थी। यह ध्‍वज भी रंग में पहले जैसा ही था, लेकिन डिजाइन में बदलाव किया गया था।, इसमें ऊपरी की पट्टी पर केवल एक कमल और सात तारे थे, जो सप्‍तऋषि को दर्शाते हैं। यह झंडा बर्लिन में हुए समाजवादी सम्‍मेलन में भी प्रदर्शित किया गया था।




बीसेंट और तिलक ने फहराया तीसरा झंडा

घरेलू शासन आंदोलन के दौरान डॉ एनी बीसेंट और लोकमान्‍य तिलक ने तीसरा ध्‍वज 1917 में फहराया था। इस झंडे में 5 लाल और 4 हरी क्षैतिज पट्टियां थी। इसमें भी सप्‍तऋषि के अभिविन्‍यास में इस पर बने सात सितारे थे, वहीं बांई और ऊपरी किनारे पर यूनियन जैक था, एक कोने में सफेद अर्धचंद्र और सितारा भी था।


अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में फहरा चौथा झंडा

आंध्र प्रदेश में एक युवक ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सत्र में चौथा ध्वज फहराने के साथ उसे गांधी जी को सौंप दिया। यह कार्यक्रम साल 1921 में अब के विजयवाड़ा में किया गया था। यह झंडा लाल और हरे रंग में बना था, जिसमें देश के दो प्रमुख समुदायों अर्थात हिन्‍दू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्‍व दिया गया था। झंडे को देखने के बाद गांधी जी के सुझाव पर इसमें शेष समुदाय का प्रतिनिधित्‍व करने के लिए सफेद पट्टी और एक चलता हुआ चरखा जोड़ा गया।

पांचवे झंडे को पहली बार राष्‍ट्रीय ध्‍वज के रूप में अपनाने के लिए एक प्रस्‍ताव पारित किया गया, यह झंडा अभी वाले झंडे से थोड़ा ही अलग था, इसमें अशोक चक्र की जगह चरखा था, बाकि सब समान था। इस ध्‍वज को साल 1931 में लाया गया था।


छठां झंडा तिरंगा

तिरंगा को 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने स्‍वतंत्र भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज के रूप में अपनाया। इसमें सिर्फ एक बदलाव किया गया, चरखे की जगह धर्म चक्र अशोक को रखा गया। तब से आज तक हमारे प्‍यारे तिरंगे का स्‍वरूप वही है।

भारतीय संविधान किन किन देशों से लिया गया

 भारतीय संविधान किन किन देशों से लिया गया है

✺ ब्रिटेन

➭ संसदीय प्रणाली, विधि निर्माण, एकल नागरिकता

✺ अमेरीका

➭ न्यायिक, स्वतंत्रता का अधिकार और मौलिक अधिकार

✺ जर्मनी

➭ आपातकाल का सिद्धांत

✺ फ्रांस

➭ गणत्रंतात्मक शासन व्यवस्था

✺ कनाडा

➭ राज्यों में शक्ति का विभाजन

✺आयरलैंड 

➭ नीति निदेशक तत्व

✺ऑस्ट्रेलिया 

➭ समवर्ती सूची

✺ दक्षिणअफ्रीका 

➭ संविधान संशोधन की प्रक्रिया

✺ रूस

➭ मूल कर्तव्य

04/08/22

 जान यही, शान यही|

हमारी पहचान यही||

देश यही, विदेश यही|

गीता का उपदेश यही||

बनारस की सुबह यही,अवध का नाम यही|

लोगों का स्वर्ग यही||

गांधी का परित्याग यही, रानी की तलवार यही|

भगत सुभाष की ललकार रही||

शिवेंद्र जी बसा देश प्रेम यही||

जय  हिन्द

30/07/22

भारत में सूर्य मंदिर

 भारत में सूर्य मंदिर

 हम भारत में विभिन्न सूर्य मंदिरों के बारे में चर्चा कर रहे हैं, जो भारत के समृद्ध वास्तुकला के साथ-साथ इसके निर्माण से जुड़े इतिहास और राज्य और केंद्र सरकार की कई परीक्षाओं के सिलेबस के कला और संस्कृति अनुभाग के तहत महत्वपूर्ण अन्य तथ्यों को प्रदर्शित करते हैं।


 1-कोणार्क सूर्य मंदिर, उड़ीसा


कोणार्क सूर्य मंदिर, ओडिशा ओडिशा के तट पर पुरी से लगभग 35 किलोमीटर उत्तर पूर्व में कोणार्क में एक 13 वीं शताब्दी सीई सूर्य मंदिर है। मंदिर का श्रेय पूर्वी गंगा राजवंश के राजा नरसिंह देव प्रथम को दिया जाता है, जो लगभग 1250 ई. हिंदू सूर्य देवता सूर्य को समर्पित, मंदिर परिसर के अवशेषों में विशाल पहियों और घोड़ों के साथ एक 100 फुट ऊंचे रथ का आभास होता है, जो सभी पत्थर से उकेरा गया है।

2-मार्तंड सूर्य मंदिर, जम्मू और कश्मीर


• मार्तंड सूर्य मंदिर, जिसे पांडौ लैदान के नाम से जाना जाता है, एक हिंदू मंदिर है जो भगवान सूर्य को समर्पित है, जो हिंदू धर्म के प्रमुख सौर देवता हैं, जिन्हें 8वीं शताब्दी ईस्वी के दौरान बनाया गया था। मार्तंड सूर्य मंदिर का निर्माण कर्कोटा राजवंश के तीसरे शासक ललितादित्य मुक्तापीड ने करवाया था। कहा जाता है कि इसका निर्माण 725-756 CE के दौरान हुआ था।


3- दक्षिणार्का मंदिर, गया (बिहार)


कहा जाता है कि इसे 13वीं शताब्दी ई. में वारंगल के राजा प्रतापरुदा ने बनवाया था। देवता को ग्रेनाइट में बनाया गया है और मूर्ति फारसी पोशाक जैसे कमर की कमर, जूते और एक जैकेट पहनती है। इसके बगल में एक सूर्य कुंड (जल भंडार) है।

4-सूर्यनारायण स्वामी मंदिर, अरासवल्ली (आंध्र प्रदेश)


अरसावल्ली सूर्य मंदिर भारत के आंध्र प्रदेश में अरसावल्ली में 7 वीं शताब्दी ईस्वी का सूर्य मंदिर है। यह श्रीकाकुलम टाउन के पूर्व में 1 किमी की दूरी पर अरसावल्ली गांव में स्थित है

5-

ब्राह्मण्य देव मंदिर, ऊना (मध्य प्रदेश)


यह मध्य प्रदेश के दतिया जिले के एक छोटे से शहर ऊना में अपनी अनूठी वास्तुकला के साथ एक प्रसिद्ध और दुर्लभ सूर्य मंदिर है। इसे बालाजी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है और इसे दतिया के राजा द्वारा प्रागैतिहासिक काल में बनवाया गया था।

6-

सूर्यनार कोविल, कुंभकोणम (तमिलनाडु)


सूर्यनार कोविल (जिसे सूर्यनार मंदिर भी कहा जाता है) भारत के तमिलनाडु में दक्षिण भारतीय शहर कुंभकोणम के पास एक गांव सूर्यनार कोविल में स्थित देवता हिंदू सूर्य-भगवान को समर्पित एक हिंदू मंदिर है

7-

नवलखा मंदिर, घुमली (गुजरात)


घुमली में नवलखा मंदिर 11 वीं शताब्दी में जेठवा शासकों द्वारा बनाया गया था, जो सूर्य देव, सूर्य को समर्पित है और यह गुजरात का सबसे पुराना सूर्य मंदिर है।

29/07/22

uttar pradesh

    उत्तर प्रदेश का प्राचीन नाम क्या था - संयुक्त प्रांत (1937-1950)

•    उर्दू को कब उत्तर प्रदेश की दूसरी आधिकारिक भाषा घोषित किया गया था - 1989 ईस्वी में
•    उत्तर प्रदेश राज्य का पुनर्गठन कब हुआ - 1 नवंबर 1956 को
•    उत्तर प्रदेश किस वर्ष में भारत गणराज्य का पूर्ण राज्य बना - 26 जनवरी 1950
•    उत्तर प्रदेश में अनौपचारिक शिक्षा योजना कब प्रारंभ हुई - 1975 ईस्वी में
•    उत्तर प्रदेश राज्य का विभाजन कब हुआ था - 9 नवंबर 2000 (13 जिलों को मिलाकर उत्तराखंड बनाया गया था)
•    उत्तर प्रदेश में थारू जनजाति मुख्यतः किस क्षेत्र में निवास करती है - तराई क्षेत्र में
•    लोकसभा में उत्तर प्रदेश से कितनी सीटें हैं - 80
•    राज्य में "करमा नृत्य" किस जनजाति द्वारा किया जाता है - खरवार
•    लोकसभा में उत्तर प्रदेश से आरक्षित सीटों की संख्या कितनी है - 17
•    राज्यसभा में उत्तर प्रदेश से कितनी सीटें हैं - 31
•    बैगा जनजाति उत्तर प्रदेश के किस जिले में रहती है - सोनभद्र
•    उत्तर प्रदेश पंचायत राज संशोधन अधिनियम कब पारित किया गया - 1994 में
•    उत्तर प्रदेश की विधायिका किस प्रकार की है - द्विसदनीय
•    उत्तर प्रदेश में सबसे लंबे समय तक सेवा में रहने वाले मुख्यमंत्री का नाम बताइए - गोविंद बल्लभ पंत
•    उत्तर प्रदेश में प्रथम विधायिका का गठन कब हुआ - जुलाई 1937
•    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की नियुक्ति कौन करता है - राज्यपाल
•    उत्तर प्रदेश में विधानसभा को विघटित करने का अधिकार किसके पास है - राज्यपाल
•    उत्तर प्रदेश की जलवायु कैसी है - उष्णकटिबंधीय मानसून
•    उत्तर प्रदेश में वनों के अंतर्गत क्षेत्रफल कितना है - 14679 वर्ग किमी (6.09 प्रतिशत)
•    विश्व प्रसिद्ध ताजमहल उत्तर प्रदेश के किस शहर में स्थित है - आगरा
•    उत्तर प्रदेश राज्य में वृक्षावरण कितना है - 7442 वर्ग किमी (3.08 प्रतिशत)
•    उत्तर प्रदेश में चांदवार का प्रसिद्ध युद्ध कब हुआ था - 1194 ईस्वी
•    उत्तर प्रदेश में कितने प्रकार के वन हैं - शीतोष्ण, उष्ण कटिबंधीय, पर्णपाती और कांटेदार वन
•    उत्तर प्रदेश में खानवा का प्रसिद्ध युद्ध कब हुआ था - 1527 ईस्वी
•    उत्तर प्रदेश के प्रमुख वन्यजीव कौन से हैं- बाघ, हाथी, गैंडा, बारहसिंहा , हिरण, नीलगाय आदि।
•    उत्तर प्रदेश में प्रसिद्ध बुलंद दरवाजा कहाँ स्थित है - फतेहपुर सीकरी
•    उत्तर प्रदेश में चौखंडी स्तूप कहाँ स्थित है - सारनाथ
•    अकबर की रानी जोधाबाई का महल उत्तर प्रदेश में कहाँ स्थित है - फतेहपुर सीकरी

27/07/22

वायुमंडल की परतें

 वायुमंडल की परतें

वायुमंडल विभिन्न गैसों का मिश्रण है और यह पृथ्वी को चारों ओर से घेरे हुए है। इसमें मनुष्यों और जानवरों के लिए ऑक्सीजन और पौधों के लिए कार्बन डाइऑक्साइड जैसी जीवनदायिनी गैसें होती हैं। वायु पृथ्वी के द्रव्यमान का एक अभिन्न अंग है और वायुमंडल के कुल द्रव्यमान का 99 प्रतिशत पृथ्वी की सतह से 32 किमी की ऊंचाई तक सीमित है। वायुमंडल में अलग-अलग घनत्व और तापमान के साथ अलग-अलग परतें होती हैं। घनत्व पृथ्वी की सतह के पास सबसे अधिक अधिक होता है और ऊंचाई बढ़ने के साथ घटता जाता है।

वायुमंडल के स्तम्भ को 5 भागों में विभाजित किया गया है-


क्षोभमंडल


पृथ्वी की सतह के निकटतम परत। मोटाई ध्रुवों पर 8 किमी से भूमध्य रेखा पर 16 किमी तक भिन्न होती है।

सभी मौसमी घटनाएं यहां घटित होती हैं।

सबसे घना और इसमें जलवाष्प, नमी और धूल होती है।

इस परत में मौजूद धूल के कण जल वाष्प को धारण करते हैं और गोधूलि और सूर्य के प्रकाश और सूर्यास्त के लाल रंगों की घटना में योगदान करते हैं।

इसमें प्रत्येक 165 मीटर पर 1 डिग्री सेल्सियस (या 6.4 डिग्री सेल्सियस प्रति किमी) की गिरावट होती है। इसे सामान्य ताप पतन दर कहा जाता है।

क्षोभसीमा (ट्रोपोपॉज) क्षोभमंडल को समतापमंडल से अलग करता है।

समतापमंडल


16 किमी से लेकर 50 किमी की ऊंचाई तक फैला हुआ है। इस परत में ऊंचाई बढ़ने के साथ तापमान में गिरावट आना बंद हो जाती है।

बहुत कम जलवाष्प और वस्तुतः कोई धूल मौजूद नहीं होने के कारण यहां बहुत कम मौसम उत्पन्न होता है।

समतापमंडल बड़े हवाई जहाजों को उड़ाने के लिए आदर्श स्थितियाँ प्रदान करता है।

ओजोन (पृथ्वी की सतह से 25-30 किमी) शामिल है, इस क्षेत्र को ओज़ोनोमंडल कहा जाता है।

यह सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों को सोख लेता है। सूर्य से पराबैंगनी विकिरण के अवशोषण के कारण इस परत का तापमान तुलनात्मक रूप से अधिक होता है (जैसे-जैसे हम ऊपर जाते हैं तापमान बढ़ता है)।

मध्यमण्डल


लगभग 80 किमी की ऊंचाई तक।

इसमें तापमान ऊंचाई के साथ कम होता जाता है और 80 किमी की ऊंचाई पर लगभग -100 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है।

आयनमंडल


लगभग 500-600 किमी तक फैला हुआ है।

इसे आयनमंडल इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें विद्युत आवेशित कण (आयन) होते हैं जो रेडियो तरंगों को वापस पृथ्वी पर परावर्तित करते हैं जिससे रेडियो संचार संभव हो जाता है।

साथ ही हानिकारक विकिरण से पृथ्वी की रक्षा करता है। इससे इस परत में ऊंचाई के साथ तापमान में वृद्धि होती है।

यह पृथ्वी को गिरने वाले उल्कापिंडों से भी बचाता है, क्योंकि उनमें से अधिकांश इस क्षेत्र में जल जाते हैं।

बाह्यमण्डल


यहां पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण अत्यंत कमजोर है। ऊपरी सीमा काफी अनिश्चित है।

बाहरी भाग को चुम्बकमंडल (मैग्नेटोस्फीयर) कहा जाता है।

ऊँचाई के साथ आयनित कण आवृत्ति में वृद्धि करते हैं। ऊपरी वायुमंडल में 2 बेल्ट होते हैं जिनमें आयनित कणों की उच्च सांद्रता होती है। उन्हें वैन एलन विकिरण बेल्ट के रूप में जाना जाता है।

भीतरी बेल्ट पृथ्वी की सतह से लगभग 2600 किमी दूर है, जबकि बाहरी बेल्ट इससे लगभग 13,000 से 19,000 किमी दूर है।

ये बेल्ट सूर्य से अत्यधिक आवेशित कणों, प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉनों की सांद्रता को दर्शाती हैं, जो पृथ्वी के बाहरी चुंबकीय क्षेत्र - चुम्बकमंडल के बल की रेखाओं के भीतर फंस जाती हैं।

पृथ्वी और बाहरी अंतरिक्ष के बीच की अंतिम सीमा को मैग्नेटोपॉज़ कहा जाता है

24/07/22

लता मंगेशकर

 लता मंगेशकर का जन्म मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में 28 सितंबर 1929 को हुआ

पहली बार लता ने वसंग जोगलेकर द्वारा निर्देशित एक फ़िल्म कीर्ती हसाल के लिये गाया। उनके पिता नहीं चाहते थे कि लता फ़िल्मों के लिये गाये इसलिये इस गाने को फ़िल्म से निकाल दिया गया। लेकिन उसकी प्रतिभा से वसंत जोगलेकर काफी प्रभावित हुये।

अभिनेत्री के रूप में उनकी पहली फ़िल्म पाहिली मंगलागौर

2001 में उन्हें भारत रत्न दिया गया। 

1974 - दुनिया में सबसे अधिक गीत गाने का गिनीज़ बुक रिकॉर्ड

उनका स्वर्गवास 6 फरवरी  2022 को हो गया।


 





भारत के 15 राष्ट्रपति

 1. भारत के 15वें राष्ट्रपति: द्रौपदी मुर्मू


ओडिशा के एक बेहद साधारण घर से आने वाले आदिवासी परिवार की बेटी द्रौपदी मुर्मू भारत की 15वीं राष्ट्रपति चुनी गई हैं।

2022 का भारतीय राष्ट्रपति चुनाव 16 वां राष्ट्रपति चुनाव था जो 18 जुलाई 2022 को भारत में हुआ था। मुर्मू भारत की पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति बनीं।

वह प्रतिभा पाटिल के बाद यह पद संभालने वाली दूसरी महिला भी हैं। मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है।

21/07/22

 अनुच्छेद 243 - परिभाषाएँ


अनुच्छेद 243 क (A) - ग्रामसभा (ये याद ही हो जाएगा , शुरुआत है , इसी से)


अनुच्छेद 243 ख (B) -  ग्राम पंचायतों का गठन (B for बनाना मतलब गठन)


अनुच्छेद 243 ग (C) - पंचायतों की संरचना (Cसा-सीसा मतलब c से सरंचना)


अनुच्छेद 243 घ (D) - स्थानों का आरक्षण (आरक्षण 4 जातियों को मिलता है sc , st , obc , ews तो d इंग्लिश में 4 पर आया 4 से 243 d for आरक्षण)


अनुच्छेद 243 ङ (E) - पंचायतों की कार्यकाल (E इंग्लिश में 5 पर आया तो कार्यकाल 5 वर्ष)


अनुच्छेद 243 च (F) - सदस्यता के लिए योग्यताएँ (qualiFication से याद करने की कोशिश करिए)



अनुच्छेद 243 छ (G) - पंचायतों की शक्तियाँ , प्राधिकार और उत्तरदायित्व (g फ़ॉर gravity मतलब बल मतलब शक्ति)



 अनुच्छेद 243 ज (H) - पंचायतों द्वारा कर लगाने की शक्तियाँ और उनकी निधियाँ ( h for horsePower मतलब शक्ति)


अनुच्छेद 243 झ (I) - वित्तीय स्थिति के पुनर्विलोकन के लिए वित्त आयोग का गठन (i फ़ॉर income)



अनुच्छेद 243 ञ (J)  - पंचायतों की लेखाओं की संपरीक्षा (j फ़ॉर जांच)



अनुच्छेद 243 ट (K) - पंचायतों के लिए निर्वाचन (निर्वाचन कर्वाचन)



अनुच्छेद 243 ठ (L) - संघ राज्यों क्षेत्रों को लागू होना 


अनुच्छेद 243 ड (M) - इस भाग का कतिपय क्षेत्रों को लागू न होना


अनुच्छेद 243 ढ (N) - विद्यमान विधियों और पंचायतों का बना रहना 


अनुच्छेद 243 ण (O) - निर्वाचन सम्बन्धी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप का वर्णन (o for objection)



आखिरी 4 ज्यादा खास न है , आखिरी कर लो याद

18/07/22

 📌📌

वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972

सामाजिक वानिकी शब्द :- 1976 (कृषि आयोग द्वारा)

वन संरक्षण अधिनियम 1980

राष्ट्रीय वन नीति 1988

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986

जल संरक्षण अधिनियम 1974

वायु संरक्षण अधिनियम 1981

ध्वनि संरक्षण अधिनियम 2000

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) 2010

**

प्रथम बार बाघ गणना 1972

कस्तूरी मृग एवं हंगुल परियोजना 1970

प्रोजेक्ट शेर 1972

प्रोजेक्ट टाइगर 1973

प्रोजेक्ट घड़ियाल 1974

घड़ियाल प्रजनन परियोजना 1975

प्रोजेक्ट मगरमच्छ 1975

ओलिवरिडले टर्टल (कछुआ)संरक्षण 1975

प्रोजेक्ट गैंडा 1987 

प्रोजेक्ट हिम चीता 1987

प्रोजेक्ट हाथी 1992

प्रोजेक्ट लाल पांडा 1996

गिद्ध संरक्षण 2006

सेव योजन (गिद्ध से सम्बन्धित) 2011

प्रोजेक्ट हिम तेंदुआ 2009

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एगमार्क:- 1937

इकॉमार्क:- 1991

25/06/22

राज्यो के प्रमुख नृत्य

 ✅ राज्यो के प्रमुख नृत्य  


💃आंध्रप्रदेश

👉कुचीपुड़ी, घंटामरदाला, ओट्टम थेडल, वेदी नाटकम।


💃असम

👉बीहू, बीछुआ, नटपूजा, महारास, कालिगोपाल, बागुरुम्बा, नागा नृत्य, खेल गोपाल, ताबाल चोनग्ली, कानोई, झूमूरा होबजानाई।


💃बिहार

👉जाट–जाटिन, बक्खो– बखैन, पनवारिया, सामा चकवा, डोमचक, बिदेसिया।


💃गुजरात

👉गरबा, डांडिया रास, टिप्पनी जुरुन, भावई।


💃हरियाणा

👉झूमर, फाग, डाफ, धमाल, लूर, गुग्गा, खोर, जागोर।


💃हिमाचल प्रदेश

👉झोरा, झाली, छारही, धामन, छापेली, महासू, नटी, डांगी। 


💃जम्मू और कश्मीर

👉रऊफ, हीकत, मंदजात, कूद डांडी नाच, दमाली।


💃कर्नाटक

👉यक्षगान, हुट्टारी, सुग्गी, कुनीथा, करगा, लाम्बी। 


💃केरल

👉कथकली (शास्त्रीय), ओट्टम थुलाल, मोहिनीअट्टम, काईकोट्टिकली।   


💃महाराष्ट्र

👉लावणी, नकाटा, कोली, लेजिम, गाफा, दहीकला दसावतार या बोहादा।   


💃ओडीसा

👉ओडिसि (शास्त्रीय), सवारी, घूमरा, पैंरास मुनारी, छाउ।


💃उत्तराखंड

👉गढ़वाली, कुंमायुनी, कजरी, रासलीला, छाप्पेली। 


💃गोवा

👉तरंगमेल, कोली, देक्खनी, फुग्दी, शिग्मो, घोडे, मोडनी, समायी नृत्य, जगर, रणमाले, गोंफ, टून्नया मेल।  


💃मध्यप्रदेश

👉जवारा, मटकी, अडा, खाड़ा नाच, फूलपति, ग्रिदा नृत्य, सालेलार्की, सेलाभडोनी, मंच।  


💃छत्तीसगढ़

👉गौर मारिया, पैंथी, राउत नाच, पंडवाणी, वेडामती, कपालिक, भारथरी चरित्र, चंदनानी।


💃झारखंड

👉अलकप, कर्मा मुंडा, अग्नि, झूमर, जनानी झूमर, मर्दाना झूमर, पैका, फगुआ, हूंटा नृत्य, मुंदारी नृत्य, सरहुल, बाराओ, झीटका, डांगा, डोमचक, घोरा नाच


💃पश्चिम बंगाल

👉काठी, गंभीरा, ढाली, जतरा, बाउल, मरासिया, महाल, कीरतन।


💃पंजाब 

👉भांगड़ा, गिद्दा, दफ्फ, धामन, भांड, नकूला।  


💃राजस्थान

👉घूमर, चाकरी, गणगौर, झूलन लीला, झूमा, सुईसिनी, घपाल, कालबेलिया।   


💃तमिलनाडु

👉भरतनाट्यम, कुमी, कोलट्टम, कवाडी।


💃उत्तर प्रदेश

👉नौटंकी, रासलीला, कजरी, झोरा, चाप्पेली, जैता।


💃अरुणाचल प्रदेश

👉बुईया, छालो, वांचो, पासी कोंगकी, पोनुंग, पोपीर, बारडो छाम।  


💃मणिपुर

👉डोल चोलम, थांग टा, लाई हाराओबा, पुंग चोलोम, खांबा थाईबी, नूपा नृत्य, रासलीला, खूबक इशेली, लोहू शाह।  


💃मेघालय

👉शाद सुक मिनसेइम, नॉन्गरेम, लाहो।  


💃मिजोरम

👉छेरव नृत्य, खुल्लम, चैलम, स्वलाकिन, च्वांगलाईज्


20/06/22

राष्ट्रपति

भारतीय संविधान में भारत के राष्ट्रपति
अनुच्छेद 52 – भारत का एक राष्ट्रपति होगा।


अनुच्छेद 53 – संघ की कार्यपालिका शक्ति: संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी और वह इसका उपयोग स्वयं प्रत्यक्ष रूप से अथवा अपने किसी अधीनस्थ अधिकारी के माध्यम से करेगा।


वह भारत में रक्षा बलों का सर्वोच्च सेनापति होता है।


हालांकि राष्ट्रपति केवल एकमात्र संवैधानिक प्रधान या टिटुलर प्रमुख, डे जूर प्रमुख या नोमिनल कार्यपालिका प्रधान अथवा प्रतीकात्मक प्रधान होता है।


राष्ट्रपति का चुनाव


राष्ट्रपति का चुनाव निर्वाचक मंडल के सदस्यों द्वारा किया जायेगा जिसमें निम्‍न शामिल होंगे:


     चयनित सांसद


     राज्यों के चयनित विधायक


     राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (70वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया और 1.06.1995 से प्रभावी) और संघशासित क्षेत्र पुड़ुचेरी के चयनित विधायक।


इस प्रकार, संसद और विधानसभाओं तथा विधान परिषदों के मनोनीत सदस्य राष्ट्रपति चुनाव में भाग नहीं लेते हैं।


अनुच्छेद 55 में चुनाव के तौर-तरीके के बारे में बताया गया है और इसमें संविधान के अनुसार एकरूपता एवं राष्ट्रभर से प्रतिनिधित्व होना चाहिए। अत: सांसद और विधायक अपने प्रतिनिधित्व के आधार पर मत देते हैं।


चुनाव का आयोजन एकल संक्रमणीय पद्धति द्वारा समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार होता है और यह मतदान गुप्त बैलेट द्वारा किया जाता है।


राष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित सभी संदेहों और विवादों की जांच और निपटारे का निर्णय उच्चतम न्यायालय द्वारा किया जाता है जिसका निर्णय अंतिम होता है।


चुनाव प्रक्रिया पर निगरानी एवं संचालन भारतीय चुनाव आयोग द्वारा किया जाता है।


अभी तक केवल एक राष्ट्रपति श्री नीलम संजीव रेड्डी र्निविरोध निर्वाचित हुई हैं।


डॉ. राजेन्द्र प्रसाद एकमात्र राष्ट्रपति हैं जिन्‍हें दो बार राष्ट्रपति नियुक्त किया गया है।


दो राष्ट्रपति – डॉ. जाकिर हुसैन और फखरुद्दीन अली अहमद की उनके कार्यकाल के दौरान मृत्यु हुई है।


कार्यकाल (अनुच्छेद 56) और पुर्ननिर्वाचन (अनुच्छेद 57)


कार्यकाल – 5 वर्ष।


त्यागपत्र उप-राष्ट्रपति को संबोधित किया जाता है।


राष्ट्रपति कईं कार्यकाल के लिए पुर्ननिर्वाचन के लिए पात्र होता है।


योग्यता (अनुच्छेद 58), शर्तें (अनुच्छेद 59) एवं शपथ (अनुच्छेद 60)


पात्रता-


      भारत का नागरिक हो,


      35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो,


      लोकसभा का सांसद चुने जाने की पात्रता रखता हो


किसी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए।


राष्ट्रपति संसद अथवा किसी विधानमंडल के सदन का सदस्य नहीं होगा। यदि ऐसा कोई सदस्य निर्वाचित होता है, तो उसकी सीट को रिक्त मान लिया जाता है।


चुनाव हेतु किसी उम्मीदवार के नामांकन के लिए निर्वाचक मंडल के कम से कम 50 सदस्य प्रस्तावक और 50 सदस्य अनुमोदक अवश्य होने चाहिए।


शपथ भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा दिलाई जाती है यदि वह अनुपस्थित है, तो उच्चतम न्यायालय के उपलब्ध किसी वरिष्ठतम न्यायाधीश द्वारा दिलाई जाती है।


सामग्री, भत्ते और विशेषाधिकार आदि संसद द्वारा निर्धारित किए जाएगें और उसके कार्यकाल में इनमें कोई कमी नहीं की जाएगी।


राष्ट्रपति को अपने कार्यकाल के दौरान किसी भी आपराधिक कार्यवाही से छूट मिलती है। उसे गिरफ्तार अथवा जेल में बंद नहीं किया जा सकता है। हांलाकि, दो महीनों के नोटिस के बाद, उसके कार्यकाल में उसके खिलाफ उसके व्यक्तिगत कार्य के सबंध में दीवानी मामले चलाये जा सकते हैं।


राष्ट्रपति पर महाभियोग (अनुच्छेद 61)


संवैधानिक उपबंध द्वारा राष्ट्रपति को उसके पद से औपचारिक रूप से हटाया जा सकता है।


यह ‘संविधान के उल्लंघन करने पर’ महाभियोग का प्रावधान है। हांलाकि, संविधान में कहीं भी इस शब्द का स्पष्टीकरण नहीं किया गया है।


यह आरोप संसद के किसी भी सदन द्वारा लगाया जा सकता है। हांलाकि, इस प्रकार के किसी प्रस्ताव को लाने से पूर्व राष्ट्रपति को 14 दिन पहले इसकी सूचना दी जाती है।


साथ ही, नोटिस पर उस सदन जिसमें यह प्रस्ताव लाया गया होता है, के कुल सदस्यों के कम से कम एक चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर अवश्य होने चाहिए।


उस सदन में विधेयक के स्वीकृत होने के बाद, महाभियोग विधेयक को उस सदन के कुल सदस्यों के 2/3 से अधिक बहुमत में अवश्य ही पारित कराया जाना चाहिए।


इसके बाद विधेयक दूसरे सदन में जायेगा जो आरोपो की जांच करेगा तथा राष्ट्रपति के पास ऐसी जांच में उपस्थित होने और प्रतिनिधित्व कराने का अधिकार होगा।


यदि दूसरा सदन आरोप बनाये रखता है और राष्ट्रपति को उल्लंघन का दोषी पाता है, तथा उस संकल्प को उस सदन के कुल सदस्यों के 2/3 से अधिक बहुमत से पारित करता है, तो राष्ट्रपति का पद संकल्प पारित होने की दिनांक से रिक्त माना जाता है।


अत: महाभियोग एक अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया है तथा जबकि संसद के मनोनीत सदस्य राष्ट्रपति के निर्वाचन में भाग नहीं लेते हैं, परंतु वे महाभियोग प्रक्रिया में पूर्ण हिस्सा लेते हैं। साथ ही, राज्य विधायकों की महाभियोग की प्रक्रिया में कोई भूमिका नहीं होती है।


राष्ट्रपति की शक्तियाँ


A) कार्यपालिका शक्तियाँ


उसके नाम से सभी कार्यपालिका कार्य किए जाते हैं। वह भारत सरकार का औपचारिक, टिटुलर प्रमुख या डे जूर प्रमुख होता है।


वह प्रधानमंत्री और उसकी सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है।


भारत के महान्यायवादी, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों, राज्यों के राज्यपालों, वित्त आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों आदि की नियुक्ति करता है।


वह अंतर्राज्यीय परिषद की नियुक्ति करता है और वह किसी भी क्षेत्र को अनुसूचित क्षेत्र और किसी जाति को अनुसूचित जाति घोषित करने का निर्णय कर सकता है।


B) विधायी शक्तियाँ


संसद सत्र को आहूत करने, सत्रावसान करने और लोकसभा भंग करने की शक्ति।


संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को आहूत करने की शक्ति (जिसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष द्वारा की जायेगी)


कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवाओं से ख्याति प्राप्त लोगों से 12 सदस्यों को राज्य सभा के लिए और एंग्‍लो भारतीय समुदाय से 2 लोगों को लोकसभा के लिए नामांकित कर सकता है।


विशेष प्रकार के विधेयकों जैसे धन विधेयक, भारत की संचित निधि से व्यय करने की मांग करने वाले विधेयक आदि को प्रस्तुत करने के मामले में राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति आवश्यक है।


वह विधेयक पर अपनी राय को रोक सकता है, विधेयक को विधायिका में लौटा सकता है, या फिर पॉकेट में रख सकता है।


वह संसद के सत्र में न होने पर अध्यादेश पारित कर सकता है।


वह वित्त आयोग, कैग और लोक सेवा आयोग आदि की रिपोर्ट को संसद के समक्ष रखता है।


बिना राष्ट्रपति की अनुमति के किसी अनुदान का आवंटन नहीं किया जा सकता है। साथ ही, वह केन्द्र और राज्यों के मध्य आय के बंटवारे के लिए प्रत्येक पांच वर्ष में एक वित्त आयोग का गठन करता है।


C) न्यायिक शक्तियाँ


मुख्य न्यायाधीश तथा उच्चतम एवं उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है।


विधि के किसी भी प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय से सलाह लेता है।


वह क्षमादान इत्‍यादि दे सकता है।


D) आपातकालीन शक्तियाँ


राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352)


राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356)


वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360)


E) वीटो शक्ति: भारत के राष्ट्रपति के पास निम्न तीन वीटो शक्तियाँ होती हैं:


पूर्ण वीटो – विधेयक पर अपनी अनुमति को रोके रखना। इसके बाद विधेयक समाप्त हो जाता है और एक अधिनियम नहीं बन पाता है। उदाहरण – 1954 में, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने पेप्सू विनियोग विधेयक पर अपनी मंजूरी रोके रखी थी। तथा, 1991 में, श्री आर. वेंकटरमन ने सांसदों के वेतन, भत्ते विधेयक पर अपनी मंजूरी रोक दी थी।


निलंबित वीटो – विधेयक को पुर्नविचार के लिये भेजना। 2006 में, राष्ट्रपति डॉ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने लाभ के पद विधेयक पर निलंबित वीटो का प्रयोग किया था। हांलाकि, राष्ट्रपति विधेयक पर विधायिका के पुर्नविचार के लिये केवल एक बार ही विधेयक लौटा सकताहै।


पॉकेट वीटो – राष्ट्रपति को भेजे गए किसी विधेयक पर कोई कार्रवाई नहीं करना। संविधान में ऐसी कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं की गई है जिसके अंदर राष्ट्रपति को विधेयक पर अपनी अनुमति अथवा हस्ताक्षर करना अनिवार्य है। अत: उसके पास अमेरिकी राष्ट्रपति की तुलना में ‘बिग्‍गर पॉकेट’ है। 1986 में, राष्ट्रपति ज्ञानी जेल सिंह ने भारतीय डाकघर संशोधन विधेयक पर पॉकेट वीटो लगाया था।


ध्यान दें: राष्ट्रपति के पास संविधान संशोधन विधेयक के संबंध में कोई वीटो शक्ति नहीं है। वह ऐसे विधेयकों को अनुमोदित करने के लिये बाध्य है।


अध्यादेश बनाने की शक्ति (अनुच्छेद 123)


संसद के दोनों सदनों अथवा किसी एक सदन के सत्र में नहीं होने पर राष्ट्रपति द्वारा अध्यादेश जारी किया जा सकता है।


अध्यादेश का संसद की पुर्नबैठक के छह सप्ताह के भीतर अनुमोदन प्राप्त करना अनिवार्य होता है।


अत: अध्यादेश का अधिकतम जीवनकाल – छह माह + छह सप्ताह है।


वह केवल प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्री परिषद की सलाह पर अध्यादेश जारी कर सकता है।


राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति (अनुच्छेद 72)


राष्ट्रपति के पास संघीय कानून, अथवा किसी कोर्ट मार्शल या मृत्यु दंड के मामले में दण्डित किसी व्यक्ति के दण्ड को माफ करने, रोक लगाने, बदलने, लघुकरण करने और विराम देने की शक्ति होती है।


यह एक कार्यपालिका शक्ति है और राज्यपाल के पास अनुच्छेद 161 के अंतर्गत ऐसी शक्तियाँ हैं, हांलाकि राज्यपाल मृत्युदंड और कोर्ट मार्शल के मामलों में दखल नहीं दे सकता है।


राष्ट्रपति इस शक्ति का उपयोग केन्द्रीय कैबिनेट के परामर्श पर करता है।


राष्ट्रपति की विवेकाधीन शक्तियाँ


प्रधानमंत्री की नियुक्ति: जब लोकसभा में किसी भी पार्टी को कोई स्पष्ट बहुमत प्राप्त न हो अथवा प्रधानमंत्री के कार्यकाल में मृत्यु होने पर तथा कोई उचित उत्तराधिकरी न होने पर।


लोकसभा का विश्वास मत हासिल न कर पाने पर केन्द्रीय कैबिनेट को निलंबित करने की शक्ति।


मंत्रीपरिषद द्वारा लोकसभा में बहुमत खोने पर लोकसभा भंग करने की शक्ति।


विधेयकों के संबंध में निलंबन वीटो शक्ति का प्रयोग।

 वरीयता के आधार पर मतदान-जा सकती कि चुनाव में रहता के आधार पर मतदान किया जाता है जैसे कि मान लेते हैं राष्ट्रपति के चुनाव में 5 लोग खड़े हैं तो हम किसी उम्मीदवार को पहला तथा दूसरे उम्मीदवार को दूसरा इसी प्रकार से वरीयता देते हैं अगर पहली वरीयता के आधार पर निर्णय नहीं हो सकता है तो दूसरे वरीयता के मतों को गिनते हैं 

कुछ रोचक जानकारी- 

पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद थे 

निर्विरोध चुने जाने वाले राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी थे 

वीवी गिरी पहले निर्दलीय पार्टी के रूप में चुने जाने वाले पहले राष्ट्रपति थे

 कार्यकाल के दौरान जाकिर हुसैन की मृत्यु हो गई थी

 पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल थी 

कौन वोट नहीं दे सकता-

भारत की जनता
राज सभा और विधान परिषद के मनोनीत सदस्य तथा विधान पार्षद भी वोट नहीं दे सकता
अगर किसी राज्य का मुख्यमंत्री विधान परिषद का सदस्य है तो वह भी वोट नहीं दे सकता