हरितगृह या ग्रीनहाउस (ग्लासहाउस भी कहा जाता है) एक इमारत है, जहां छोटे पौधे उगाये जाते हैं। इसमें सूर्य की रोशनी ग्लास हाउस के अंदर चली आती है तथा पृथ्वी के तापमान को गर्म करते हैं जिससे पृथ्वी का तापमान गर्म हो जाता है और ग्लास हाउस के अंदर का तापमान पृथ्वी के दौरा छोड़े गए विकरण के द्वारा गर्म हो जााता है जिससे ग्रीन हाउस के अंदर तापमान वृद्धि हो जाती है जिससे फसल उगाया जा सकता हैै यह उस प्रदेश में लगाया जाताा है यहां का तापमान निम्न हों जैसे -रूस
वैसे तो देखा जाए ग्रीन हाउस प्रभाव हमारे लिए लाभदायक है क्योंकि इससे पृथ्वी का तापमान बना रहता है
ग्रीन हाउस प्रभाव-
ग्रीनहाउस प्रभाव या हरितगृह प्रभाव (greenhouse effect) एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी ग्रह या उपग्रह के वातावरण में मौजूद कुछ गैसें वातावरण के तापमान को अपेक्षाकृत अधिक बनाने में मदद करतीं हैं।
पूरे विश्व के औसत तापमान में लगातार वृद्धि दर्ज की गयी है। ऐसा माना जा रहा है कि मानव द्वारा उत्पादित अतिरिक्त ग्रीनहाउस गैसों के कारण ऐसा हो रहा है। इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि यदि वृक्षों का बचाना है तो इन गैसों पर नियंत्रण करना होगा क्योंकि सूरज तीव्र रौशनी और वातावरण में ऑक्सीजन की कमी से पहले ही वृक्षों के बने रहने की सम्भावनाएँ कम होंगी।
ग्रीन हाउस गैस-कार्बन डाइऑक्साइड नाइट्रस ऑक्साइड मेथेन जलवाष्प
होने वाली परेशानी-जिस तरह पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है उससे ग्लेशियर की मात्रा दिन प्रतिदिन पिघल रहा है जिससे समुद्र में पानी की मात्रा बढ़ रही है जिससे समुद्र के पास शहद डूबने की चांस बढ़ गए हैं बहुत से ऐसे जीव है जोकि कम तापमान पर ही जीवित रह सकते हैं वह भी ग्रीन हाउस प्रभाव के कारण समाप्त हो रहे हैं जैसे गौरैया डायनासोर आदि
ग्रीन हाउस प्रभाव के कारण बरसात का सही समय बिगड़ गया है जिससे बहुत कम मात्रा में बरसात होती है
जीवाश्म ईंधन के दहन, कृषि, वनोन्मूल और अन्य मानवीय गतिविधियों जैसे कार्यो द्वारा उत्सर्जित ग्रीन हाउस गैसें ही पिछले कुछ दशक में ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ती समस्या का मुख्य कारण है। इसी कारण से ही बर्फ की चादरे और ग्लेशियर पिघलते जा रहे है, जिसके कारणवश महासागर के स्तर में वृद्धि हुई है। गर्म जलवायु के वजह से वर्षा और वाष्पीकरण की घटनाओं में बढ़ोत्तरी होती है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम की स्थिति भी बदल गयी है, जिससे कुछ स्थान गर्म और कुछ स्थान नम होते जा रहे है।
इन कारणो से सूखा, बांढ़ और तूफान जैसी कई प्राकृतिक आपदाएं उत्पन्न होती है। जलवायु परिवर्तन प्रकृति और मानव जीवन को काफी बुरे तरीके से प्रभावित करता है और यदि ग्रीन हाउस गैसो का उत्सर्जन इसी प्रकार से बढ़ता रहा तो भविष्य में इसके परिणाम और ज्यादे भयावह होंगे। तटीय क्षेत्रो में ग्लोबल वार्मिंग के परिणाम और भी ज्यादे विनाशकारी होंगे। जब बढ़ते तापमान के कारण ध्रुवी क्षेत्र पिघलने लगेंगे तब इससे समुद्र स्तर में भीषण वृद्धि हो जायेगी जिसके कारण तटीय क्षेत्र डूब जायेंगे।
निष्कर्ष
इस संसार में ऐसा कोई देश नही है जो ग्लोबल वार्मिंग के इस भीषण समस्या से प्रभावित ना हुआ हो। ग्रीन हाउस गैसो के उत्सर्जन के मात्रा में कमी लाकर ही ग्लोबल वार्मिंग जैसे इस भीषण समस्या को रोका जा सकता है। इसके लिए सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओ द्वारा वायुमंडल में ग्रीन हाउस गैसो के उत्सर्जन को रोकने के लिए सामूहिक रुप से कड़े फैसले लेने की आवश्यकता है। इसके लिए हमें नवकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने और वनोन्मूलन की जगह और ज्यादे मात्रा में वृक्षारोपण करने की आवश्यकता है