चर्चा में क्यों है-
हाल ही में संसद से पारित 3 कृषि बिल लाया गया जिसका विरोध पंजाब हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश के किसान कर रहे हैं सरकार इन विधेयक को अच्छा बता रही है जबकि किसान तथा विपक्ष इसका विरोध कर रही है इस विधेयक को किसान विरोधी विधेयक बताया जा रहा है 8 दिसंबर को किसानों ने तथा विपक्षी पार्टियों ने भारत बंद की घोषणा की है
एनडीए सरकार की सहयोगी पार्टी अकाली दल के नेता हरसिमरत कौर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया 2022 तक किसानों की आय दुगनी करने का लक्ष्य रखा है फिर भी इस बिल का विरोध क्यों हो रहा है आइए जानते हैं
कृषि बिल-तीन बिल पारित हुए हैं
1 कृषि उपज वाणिज्य एवं व्यापार विधेयक 2020-
इस बिल से किसानों को मंडी के बाहर फसल बेचने की आजादी होगी तथा दूसरे राज्यों में वह अपनी फसल भेज सकते हैं एपीएमसी के दायरे में फसल बेचने पर उन्हें टैक्स नहीं लगेगा एपीएमसी वह मंडी बाजार है जहां किसान अपनी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेच सकता है मंडी का संचालन राज सरकार कहती है किसी भी विवाद पर डीएम स्तर के अधिकारी या उनके द्वारा नियुक्त अधिकारी ही हल करेंगे
2-आश्वासन पर किसान (बंदोबस्ती और सुरक्षा) समझौता और कृषि सेवा विधयेक 2020-
इस बिल से देशभर में कहीं भी कांट्रैक्ट फार्मिंग की जा सकती है इसके माध्यम से कंपनी( या किसी से)तथा किसानों के मध्य फसल उत्पादन के लिए एक समझौता होगा जिससे किसान फसल उगा एगा और कंपनी उसे खरीदेगी जिसका मूल्य निर्धारण पहले ही करके समझौता हो जाएगा
3-आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक 2020-
इस विधेयक में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में संशोधन किया गया है इसमें यह कहा गया था कि आप आवश्यक वस्तु को एक लिमिट से ज्यादा सुरक्षित नहीं रख सकते हैं अगर आप ऐसा कहते हैं तो आपके ऊपर दण्डनीय कार्रवाई होगी लेकिन 2020 के इस बिल में स्टॉक लिमिट कि सीमा हटा दी गई है से आप कितना भी स्टॉक सकते हैं केवल युद्ध और आपात के समय सरकार इस पर कार्रवाई करेगी इस पर सरकार का कम हस्तक्षेप होगा
विवाद क्यों-
1- पहला विवाद एमएसपी के लिए है क्योंकि इस बिल में कहीं भी एमएसपी का उल्लेख नहीं किया गया है जिससे किसानों को भ्रम है की सरकार एमएसपी को खत्म कर देगी
2-किसी भी विवाद के लिए एसडीएम स्तर के अधिकारी के पास ही जा सकते हैं अगर निपटारा ना हो तो आप सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट मे जाने का कोई पावध्यान नहीं है
3- एमएसपी निश्चित होने पर किसान को अगर मंडी में लाभ होता है तो वह मंडी में बेच देता है अगर मंडी में दाम कम है तो वह एमएसपी के थ्रू बेचता है लेकिन अगर वह कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कर लेगा तो उसे एक निश्चित मूल मिलेगा चाहे फसल का दाम कम हो या ज्यादा
4-आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक 2020 में स्टॉक लिमिट को हटा दिया गया है जिससे छोटे किसान अपनी फसल उपज करने के बाद उसे ज्यादा दिन तक सुरक्षित नहीं रख सकते हैं वह उसे बड़े व्यापारियों को बेच देंगे जिससे बड़े व्यापारी उसका स्टोरेज करके मन मुताबिक वस्तु का दाम निर्धारण करेंगे इस बिल से छोटे किसानों को नहीं होगा क्योंकि उनके पास रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज नहीं है
निष्कर्ष-इस बिल मैं अभी भी बहुत से संशोधन की आवश्यकता है पूरी तरह यह बिल खराब नहीं है अतः सरकार से इच्छा है जल्दी ही इस विवाद को खत्म किया जाए
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