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15/07/20

संज्ञा

संज्ञा-संज्ञा दो सब से मिलकर बना है सम‌्+ ज्ञा जिसका शाब्दिक अर्थ है सम्यक ज्ञान

१-समानता संज्ञा के पांच भेद होते हैं
२-अर्थ के आधार पर संज्ञा के पांच भेद होते हैं
3-संज्ञा के मुक्ता तीन भेद होते हैं- व्यक्तिवाचक जातिवाचक भाववाचक
4-धर्म के आधार पर संज्ञा की एक भेद होते हैं भाववाचक
5-वस्तुदृष्ट ्के आधार पर संज्ञा के चार भेद होते हैं

व्यक्तिवाचक संज्ञा-किसी व्यक्ति विशेष वस्तु व विशेष स्थान के नाम को व्यक्तिवाचक  संज्ञा कहते  हैं

1-नदियों, पर्वतों , देशों ,दिशाओं ,पुस्तकों और समाचारों ,समुद्रों, दिनों और महीनों, त्योहार और उत्सव के नाम को व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं-जैसे सोमवार ,मंगलवार, प्रशात महासागर, दैनिक जागरण  आदि 


12/07/20

हिंदी भाषा एवं साहित्य


👉भारत के मूल संविधान में कितनी भाषाएँ थी ?

—14


👉वर्तमान में संविधान में कितनी भाषाएँ है ?

—  22   


👉  वर्तमान में कौन सी भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की जा रही है ?

— राजस्थानी व भोजपुरी


👉 21 वें संविधान संशोधन 1967 में किस भाषा को आठवीं सूची में जोड़ा गया  ?

— सिंधी भाषा को    


👉 71 वें संविधान संशोधन 1992 में कौन सी 3 भाषाओं को आठवीं अनुसूची में  जोड़ा गया है ? 

— कोंकणी ,मणिपुरी ,नेपाली 


👉92 वें सविधान संसोधन  2003 में कौनसी 4 भाषाओं को जोड़ा गया था ?

— बोडों, संथाली ,डोगरी और मैथिली  |   [ BSDM ]   


 


🔴हिंदी विश्व की सभी भाषाओं में सर्वाधिक वैज्ञानिक भाषा है ।

🔴  10जनवरी को विश्व_हिंदी_दिवस मनाया जाता है ।


🔴14 सितंबर को भारत मे हिंदी दिवस मनाया जाता है।


🔴संविधान के भाग 17 के अध्याय 1 की धारा 343 (आई )के अनुसार :  "संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप होगा" |


🔴किन्तु इसी धारा के अन्तर्गत यह प्रावधान कर दिया गया कि संविधान होने से 15 वर्ष की कालावधि के लिए उन सव राजकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग भी होता रहेगा , जिसके लिए वह पहले से प्रयुक्त होती रही हो । 

🔴भारतीय संविधान 26 जनवरी , 195० को लागू हुआ , अतः 15 वर्षों की अवधि 26 जनवरी 1965 को समाप्त हो गई , किन्तु राजनीतिक दबावों के चलते सरकार ने इस अवधि को आगे बढ़ा दिया । परिणामतः अंग्रेजी का प्रयोग राजकीय कार्यों में अब भी हो रहा है । भारत की राजभाषा होने पर भी हिन्दी को अंग्रेजी से मुकाबला करना पड़ रहा है । ।


🔴संविधान में राजभाषा सम्बन्धी अनुच्छेद भाग 17 के अध्याय 1 में धारा 343 से 351 तक हैं ।


🔴 धारा 343 में संघ की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी को घोषित किया गया है । अंकों का प्रयोग वही रहेगा जो अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर चलित है ।

🔴अनुच्छेद 344  : राष्ट्रपति द्वारा राजभाषा आयोग एवं समिति के गठन से । सम्बन्धित है । 


🔴अनुच्छेद : 345 , 346 , 347 में प्रादेशिक भाषाओं सम्बन्धी प्रावधान है ।


 🔴अनुच्छेद : 348 में उच्चतम न्यायालय , उच्च न्यायालयों , संसद और विधान मण्डलों में प्रस्तुत विधेयकों की भाषा के सम्बन्ध में विस्तार से प्रकाश डाला गया है । 


🔴अनुच्छेद :  349 में भाषा से सम्बन्धित विधियां अधिनियमित करने की प्रक्रिया का वर्णन है । 


🔴अनुच्छेद : 350में जनसाधारण की शिकायतें दूर करने के लिए आवेदन में प्रयुक्त की जाने वाली भाषा तथा प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा सुविधाएं देने और भाषायी अल्पसंख्यकों के बारे में दिशा - निर्देश का प्रावधान किया गया है । 


🔴अनुच्छेद  : 351 में सरकार के उन कर्तव्यों एवं दायित्वों का उल्लेख किया गया है , जिनका पालन हिन्दी के प्रचार - प्रसार और विकास के लिए उसे करना है । 


🔴इसके अतिरिक्त राष्ट्रपति ने अधिसूचना संख्या 59 / 2 / 54  दिनांक 3 - 12 - 55 के द्वारा सरकारी प्रयोजनों के हिन्दी भाषा आदेश 1955 जारी किया है , जिसके द्वारा अंग्रेजी भाषा के साथ - साथ हिन्दी का प्रयोग निम्नलिखित कार्यों हेतु किया जा सकता है : 

1 . जनता के साथ पत्र व्यवहार के लिए । 

2 . प्रशासनिक रिपोर्ट , सरकारी संकल्प , संसद में प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट के लिए । 

3 . हिन्दी भाषी राज्यों के साथ पत्र - व्यवहार के लिए ।

 4 . अन्य देश की सरकारों और अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ पत्र व्यवहार के लिए ।

 5 . संधियों एवं ऋणों के लिए । | स्पष्ट है कि संविधान में हिन्दी को वह स्थान दिया गया है जो किसी राज्यभाषा को मिलना चाहिए , किन्तु साथ ही अंग्रेजी का विकल्प भी है । परिणामतः अंग्रेजी भक्त अधिकारी हिन्दी के स्थान पर अंग्रेजी का प्रयोग निरन्तर कर रहे हैं ।


                                  राजभाषा_आयोग ।


 संविधान के अनुच्छेद 344 के अनुपालन में राष्ट्रपति द्वारा 7 जून , 1955 राजभाषा आयोग का गठन बालगंगाधर खेर ( बी . जी . खेर ) की अध्यक्षता किया गया । विभिन्न राज्यों से इसके 2० सदस्य मनोनीत किए गये । आयोग अपनी 19 सिफारिशें प्रस्तुत की ।


                                    #राजभाषा_अधिनियम , 1976 

☆इस अधिनियम के अन्तर्गत हिन्दी का अधिकाधिक प्रयोग करने के लिए कुछ प्रभावी कदम उठाये गये हैं । इस अधिनियम के मुख्य प्रावधान अग्र प्रकार हैं :


☆  1 . भारत संघ के राज्य तीन वर्गों में विभक्त किये गए हैं ।

 ( क ) उत्तर प्रदेश , मध्य प्रदेश , बिहार , राजस्थान , हरियाणा , हिमाचल प्रदेश और संघ क्षेत्र दिल्ली । ( ये सभी हिन्दी भाषी प्रदेश है । ) 


( ख ) इस श्रेणी में पंजाब , गुजरात , महाराष्ट्र , चण्डीगढ़ , अण्डमान निकोबार को रखा गया है । 


( ग ) शेष सभी प्रदेश एवं संघ शासित क्षेत्र ' ग ' श्रेणी में रखे गये । इस वर्गीकरण के उपरान्त यह निर्देश दिया गया कि : | 

1 . केन्द्रीय कार्यालयों से ‘ क ’ श्रेणी के राज्यों को भेजे जाने वाले सभी पत्र हिन्दी में देवनागरी लिपि में भेजे जायेंगे । यदि कोई पत्र अंग्रेजी में भेजा जा रहा है , तो हिन्दी में अनुवाद भी अवश्य भेजा जायेगा । 


2 . ' ख ' श्रेणी के राज्यों से पत्र - व्यवहार हिन्दी अंग्रेजी दोनों भाषाओं में किया जा सकता है ।


 3 . ' ग ' श्रेणी के राज्यों से पत्र - व्यवहार अंग्रेजी में किया जायेगा । 


4 . केन्द्रीय कार्यालयों में हिन्दी में आगत पत्रों का उत्तर अनिवार्यतः हिन्दी में दिया जायेगा । 


5 . केन्द्र सरकार के कार्यालयों में सभी प्रपत्र , रजिस्टर , हिन्दी , अंग्रेजी दोनों में होंगे । । 


6 . केन्द्रीय सरकार के कर्मचारी हिन्दी या अंग्रेजी में टिप्पणी लिख सकेंगे । |


 7 . जहाँ 80 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी हिन्दी में कार्य करते हों , वहां । टिप्पणी , प्रारूप आदि काम केवल हिन्दी में ही करने को कहा जा सकता है ।

 8 . प्रत्येक कार्यालय के प्रधान का यह दायित्व होगा कि वह राजभाषा अधिनियमों एवं उपबन्धों का समुचित अनुपालन कराये । स्पष्ट है कि संवैधानिक दृष्टि से हिन्दी की स्थिति बड़ी मजबूत है , किन्तु अंग्रेजी जानने वाले प्रशासनिक अधिकारियों के षड्यन्त्र के कारण अभी भी हिन्दी में शत - प्रतिशत काम केन्द्र सरकार के कार्यालय में नहीं हो पा रहा है राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में हिन्दी अपना राजभाषा का दर्जा पूरी तरह प्राप्त नहीं कर सकी है ।


                      देवनागरी लिपि : सुधार और संशोधन 


1 . सर्वप्रथम बम्बई राज्य के महादेव_गोविन्द_रानाडे ने लिपि सुधार समिति गठित की । 

2 . महाराष्ट्र साहित्य परिषद पुणे में लिपि सुधार योजना बनाई गई । 

3 . बीसवीं शती के प्रारम्भ में लोकमान्य_तिलक ने अपने पत्र ' केसरी ' में लिपि सुधार की चर्चा की ।

 4 . तदुपरान्त वीर सावरकर , महात्मा गांधी , विनोबा भावे , काका कालेलकर और आचार्य नरेन्द्रदेव ने लिपि में सुधार एवं संशोधन के प्रयास किए । 

काका_कालेलकर ने ‘ अ ’ की बारहखड़ी का सुझाव देकर स्वर ध्वनियों की संख्या कम कर दी । यथा — अ , आ , जि , अ , आ , ओ , ॐ , ओ , औ ।

 5 .  डा . श्यामसुन्दर दास का सुझाव था कि पंचम वर्ण के स्थान पर के अनुस्वार का प्रयोग किया जाए – पञ्च = पंच , कम्बल = हिन्दी = हिंदी , कण्ठ = कंठ , गङ्गा = गंगा ।

 6 . श्रीनिवास जी ने सुझाव दिया कि इस लिपि से महाप्राण । निकाल दी जाये और उनके स्थान पर अल्पप्राण ध्वनिया कोई चिह्न लगाकर काम चलाया जाय । 

7 . 5 अक्टूबर , 1941 ई . को हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग ने लिपि सुधार समिति की बैठक आयोजित की , जिसमें मात्राओं को उच्चारण क्रम में लगाने , छोटी ' इ ' की मात्रा को व्यंजन के आगे लगान । ‘ प्र ’ को , ' श्र ’ को श्र रूप में लिखने का सुझाव दिया गया ।

 8 . सन् 1947 ई . में उत्तर प्रदेश सरकार ने आचार्य_नरेन्द्रदेव का अध्यक्षता में लिपि सुधार समिति गठित की । इसके प्रमुख सुझाव निम्न थे :

 ( i ) ‘ अ ’ की बारहखड़ी भ्रामक है । 

( ii ) मात्राएं यथास्थान रहें , किन्तु उन्हें थोड़ा दाहिनी ओर लिखा जाय । ( iii ) अनुस्वार एवं पंचम वर्ण के स्थान पर सर्वत्र अनुस्वार ( ं ) से काम चलाया जाय । ।

 ( iv ) द्विविधि लिखे जाने वाले अक्षरों में से निम्न को स्वीकार किया जाए – अ , झ , ध , भ , ल । 

( v ) संयुक्त वर्णो क्ष , त्र , ज्ञ को वर्णमाला में स्थान दिया जाय । । इन सुझावों को थोड़े हेर - फेर से स्वीकार कर लिया गया ।


 9 . सन् 1953 ई . में डॉ. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई जिसमें सुझाव दिया गया कि ह्रस्व इ की मात्रा व्यंजन से पूर्व लगाई जाय , ख , ध , भ , छ को क्रमशः ख , ध , भ , के रूप में लिखा जाय ।


 10 . लिपि सुधार के लिए समय - समय पर अनेक प्रयास होते रहे हैं और यह प्रक्रिया अभी तक चल रही है ।


 11 . देवनागरी लिपि ने अंग्रेजी की ऑ ध्वनि को अंगीकार कर लिया है । तथा फारसी की क़ , ख़ , ग़ , ज़ , फ़  ध्वनियां भी यहां आ गई है ।

                                      

   

.                              'हिंदी भाषा का उद्भव'

1.  #संस्कृत  ➡समय - 1500ईसा पूर्व से 500 ईसा पूर्व तक ।

     🔻

2.    #पाली ➡ समय -  500 ईसा पूर्व से ईसा की पहली शताब्दी तक ।


      🔻

 #नोट :- इस भाषा मे बौद्ध साहित्य लिखा गया

                                 1. विनयपिटक 

                  ☆ भिक्षुओं हेतु नियमों का संग्रह ।

                                 2. सुतपिटक

                           ☆    बुद्ध की शिक्षाएँ

                              3. अभिधम्मपिटक

                   ☆ दर्शन वह सांसारिक ज्ञान के विषय

नोट:- ये  ग्रंथ पाली भाषा में लिखे गए हैं । त्रिपिटक तीन टोकरियों के नाम से जाने जाते हैं ।

 3.   #प्राकृत ➡ समय - ईसा की पहली शताब्दी से 500 ईसवी ।

                                     जैन ग्रंथ

            अंग, उपांग प्रकीर्ण,छेदा सूत्र तथा माला सूत्र ।

☆ ये सभी ग्रंथ प्राकृत भाषा में लिखे गए हैं ।

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4.    #अपभ्रंश 

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5.       #हिंदी

अपभ्रंश अर्थात् शौरसेनी अपभ्रंश की पाँच उपभाषाएँ और 18 बोलियां हैं :-

क्रम संख्या     उपभाषाएँ

    1.          पश्चिमी हिंदी 

    2.          पूर्वी हिंदी 

    3.          राजस्थानी 

    4.           पहाड़ी

    5.            बिहारी


                              1. #पश्चिमी हिंदी 

☆  खड़ी बोली [कौरवी] ,ब्रजभाषा, बुंदेली, हरियाणवी [बाँगरू], कन्नौजी ।


                              2. #पूर्वी हिंदी 

 ☆ अवधी, बघेली, छत्तीसगढ़ी ।

                              3. #राजस्थानी 

☆  मारवाड़ी [पश्चिमी राजस्थानी] जयपुरी [ढूंढाड़ी] मेवाती,मालवी ।


                              4. #पहाड़ी

☆ पश्चिमी पहाड़ी, मध्यवर्ती [पहाड़ी गढ़वाली, कुमाऊँनी]


                              5. #बिहारी

☆ मैथिली, मगही,भोजपुरी ।




25/06/20

व्यक्ति तथा उनके उपाधि

महात्मा गांधी को महात्मा की उपाधि किसने दी

रविंद्र नाथ टैगोर

महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता किसने कहा

 सुभाष चंद्र बोस

रविंद्र नाथ टैगोर को गुरुदेव किसने कहा 

महात्मा गांधी

सरदार पटेल को सरदार की उपाधि किसने दी 

बारदोली की महिलाओं ने

 डॉ राजेंद्र प्रसाद को देशरत्न किसने कहा

 महात्मा गांधी ने 

स्वामी विवेकानंद को विवेकानंद की उपाधि किसने दी 

महाराजा खेतड़ी 

राजा राममोहन राय को राजा की उपाधि किसने दी

 अकबर 2  

हरी विजय सूरी को जगतगुरु की उपाधि किसने दी

 अकबर 

तानसेन को कठारवाणी किसने कहा 

अकबर

मोहम्मद अली जिन्ना को   कायदे आजम किसने कहा महात्मा गांधी

महात्मा गांधी को अर्धनग्न फकीर किसने कहा 

चर्चिल ने

सुभाष चंद्र बोस को नेताजी किसने कहा हिटलर ने

महात्मा गांधी को केसर ए हिंद की उपाधि किसने दी 

अंग्रेज सरकार ने

 रविंद्र नाथ टैगोर को सर की उपाधि किसने दी 

अंग्रेज सरकार

13/06/20

धर्म क्या है


हिस्ट्री इंपोर्टेंट क्वेश्चन

राष्ट्रीय आंदोलन की महत्वपूर्ण घटनाएं

( सफलता एक्सप्रेस)


👇👇👇👇👇👇👇👇


►1904 ➖ भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम पारित

►1905 ➖ बंगाल का विभाजन

►1906 ➖ मुस्लिम लीग की स्थापना

►1907 ➖ सूरत अधिवेशन, कांग्रेस में फूट

►1909 ➖ मार्ले-मिंटो सुधार

►1911 ➖ ब्रिटिश सम्राट का दिल्ली दरबार

►1916 ➖ होमरूल लीग का निर्माण

►1916 ➖ मुस्लिम लीग-कांग्रेस समझौता (लखनऊ पैक्ट)

►1917 ➖ महात्मा गाँधी द्वारा चंपारण में आंदोलन

►1919 ➖ रौलेट अधिनियम

►1919 ➖ जलियाँवाला बाग हत्याकांड

►1919 ➖ मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार

►1920 ➖ खिलाफत आंदोलन

►1920 ➖ असहयोग आंदोलन

►1922 ➖ चौरी-चौरा कांड

►1927 ➖ साइमन कमीशन की नियुक्ति

►1928 ➖ साइमन कमीशन का भारत आगमन

►1929 ➖ भगतसिंह द्वारा केन्द्रीय असेंबली में बम विस्फोट

►1929 ➖ कांग्रेस द्वारा पूर्ण स्वतंत्रता की माँग


►1930 ➖ सविनय अवज्ञा आंदोलन

►1930 ➖ प्रथम गोलमेज सम्मेलन

►1931 ➖ द्वितीय गोलमेज सम्मेलन

►1932 ➖ तृतीय गोलमेज सम्मेलन

►1932 ➖ सांप्रदायिक निर्वाचक प्रणाली की घोषणा

►1932 ➖ पूना पैक्ट

►1942 ➖ भारत छोड़ो आंदोलन

►1942 ➖ क्रिप्स मिशन का आगमन

►1943 ➖ आजाद हिन्द फौज की स्थापना

►1946 ➖ कैबिनेट मिशन का आगमन

►1946 ➖ भारतीय संविधान सभा का निर्वाचन

►1946 ➖ अंतरिम सरकार की स्थापना

►1947 ➖ भारत के विभाजन की माउंटबेटन योजना

►1947 ➖ भारतीय स्वतंत्रता प्राप्ति


कुछ महान कार्यों से सम्बंधित व्यक्ति🎓


1. ब्रह्मा समाज – राजाराममोहन राय

2. आर्य समाज – स्वामी दयानंद सरस्वती

3. प्रार्थना समाज – आत्माराम पांडुरंग

4. दीन-ए-इलाही, मनसबदारी प्रथा – अकबर

5. भक्ति आंदोलन – रामानुज

6. सिख धर्म – गुरु नानक

7. बौद्ध धर्म – गौतमबुद्ध

8. जैन धर्म – महावीर स्वामी

9. इस्लाम धर्म की स्थापना, हिजरी सम्वत – हजरत मोहम्मद साहब

10. पारसी धर्म के प्रवर्तक – जर्थुष्ट

11. शक सम्वत – कनिष्क

12. मौर्य वंश का संस्थापक – चन्द्रगुप्त मौर्य

13. न्याय दर्शन – गौतम

14. वैशेषिक दर्शन – महर्षि कणाद

15. सांख्य दर्शन – महर्षि कपिल

16. योग दर्शन – महर्षि पतंजली

17. मीमांसा दर्शन – महर्षि जैमिनी

18. रामकृष्ण मिशन – स्वामी विवेकानंद

19. गुप्त वंश का संस्थापक – श्रीगुप्त

20. खालसा पन्थ – गुरु गोविन्द सिंह

21. मुगल साम्राज्य की स्थापना – बाबर

22. विजयनगर साम्राज्य की स्थापना – हरिहर व बुक्का

23. दिल्ली सल्तनत की स्थापना – कुतुबुद्दीन ऐबक

24. सतीप्रथा का अंत – लॉर्ड विलियम बेंटिक

25. आंदोलन : असहयोग,सविनय अवज्ञा, खेडा, चम्पारन, नमक, भारत छोडो – महात्मा गाँधी

26. हरिजन संघ की स्थापना – महात्मा गाँधी

27. आजाद हिंद फ़ौज की स्थापना – रास बिहारी बोस

28. भूदान आंदोलन – आचार्य विनोबा भावे

29. रेड क्रॉस – हेनरी ड्यूनेंट

30. स्वराज पार्टी की स्थापना – पंडित मोतीलाल नेहरु

31. गदर पार्टी की स्थापना – लाला हरदयाल

32. ‘वन्देमातरम्’ के रचियता – बंकिमचन्द्र चटर्जी

33. स्वर्ण मंदिर का निर्माण – गुरु अर्जुन देव


34. बारदोली आंदोलन – वल्लभभाई पटेल

35. पाकिस्तान की स्थापना – मो० अली जिन्ना

36. इंडियन एसोशिएशन की स्थापना – सुरेन्द नाथ बनर्जी

37. ओरुविले आश्रम की स्थापना- अरविन्द घोष

38. रुसी क्रांति के जनक – लेनिन

39. जामा मस्जिद का निर्माण – शाहजहाँ

40. विश्व भारती की स्थापना – रवीन्द्रनाथ टैगोर

41. दास प्रथा का उन्मूलन – अब्राहम लिंकन

42. चिपको आंदोलन – सुंदर लाल बहुगुणा


43. बैकों का राष्ट्रीकरण – इंदिरा गाँधी

44. ऑल इण्डिया वीमेन्स कांफ्रेंस की स्थापना – श्रीमती कमला देवी

45. भारत की कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना – एम०एन० राय

46. नेशनल कांफ्रेंस की स्थापना – शेख अब्दूल्ला

47. संस्कृत व्याकरण के जनक – पाणिनी

48. सिख राज्य की स्थापना – महाराजा रणजीत सिंह

49. भारत की खोज – वास्कोडिगामा