जस्ट स्वीट
22/03/18
विधान परिषद्
विधानसभा और विधान परिषद् को संविधान के द्वारा अलग-अलग कार्य दिए गए हैं. यदि देखा जाए तो शक्ति और अधिकार के मामले में विधानसभा विधान परिषद् से कहीं आगे है. वही हाल हमें केंद्र में देखने को मिलता है जहाँ लोक सभा राज्य सभा से अधिक शक्तिशाली है. ऐसे कुछ ही मामले हैं जिनमें विधान परिषद् विधानसभा की बराबरी कर सकती है. हम नीचे कुछ important points दे रहे हैं जिससे आपको इन दोनों के बीच तुलनात्मक स्थिति (difference between Legislative Assembly and Legislative Council) का साफ़-साफ़ पता चल सकेगा.
विधान परिषद्
और विधानसभा की शक्तियाँ कहाँ-कहाँ बराबर हैं?
- साधारण विधेयकों को शुरू करना.
- मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करना. आपको जानना चाहिए कि मंत्री विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य हो सकते हैं.
- राज्यपाल जो अध्यादेश जारी करते हैं, उनको accept/reject करना.
- हर राज्य में कुछ संवैधानिक संस्थाएँ होती हैं जैसे राज्य वित्त आयोग, राज्य लोक सेवा आयोगआदि ….इन संस्थाओं के द्वारा जारी किए गए reports पर विचार करना.
विधानसभा की शक्तियाँ विधान परिषद् से किन मामलों में ज्यादा है?
- धन विधेयक केवल विधानसभा (Legislative Assembly) में ही आरम्भ किए जा सकते हैं. विधान परिषद् धन विधेयक में न तो संशोधन कर सकती है और न उसे ख़ारिज कर सकती है. हाँ भले वह यदि चाहे तो धन विधेयक को 14 दिनों तक रोक सकती है या 14 दिनों के भीतर इसमें संशोधन से सम्बंधित सिफारिश भेज सकती है. विधानसभा इन सिफारिशों को स्वीकार भी कर सकती है और खारिज भी. हर स्थिति में विधानसभा की राय ही अंतिम मानी जाती है.
- वित्तीय विधेयक [अनुच्छेद 207 (1)] केवल विधानसभा में ही प्रस्तुत की जा सकता है. वैसे एक बार वित्तीय विधेयक प्रस्तुत हो गया तो दोनों सदनों की शक्तियाँ बराबर हो जाती है.
- कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, यह तय करने का अधिकार सिर्फ विधानसभा के अध्यक्ष के पास है.
- बजट को पारित करने के मामले में भी विधानसभा को परिषद् (Legislative Council) की तुलना में अधिक अधिकार प्राप्त हैं. वह विभिन्न मंत्रालयों द्वारा माँगे गए अनुदानों (grants) पर विचार करती है और उन्हें पारित भी करती है. विधान परिषद् उन पर बहस तो कर सकती है पर पारित करने का अधिकार उसे प्राप्त नहीं है.
- यदि साधारण विधेयक की बात करें तो इस मामले में भी अंतिम शक्ति विधानसभा के ही पास है. यदि विधानसभा (Legislative Assembly) कोई विधेयक पारित कर दे तो विधानपरिषद उस विधेयक को अधिक से अधिक 4 महीने तक रोक सकती है – पहली बार 3 महीने और फिर दूसरी बार 1 महीना. देखा जाए तो विधानपरिषद विधेयक पास न हो, इसके लिए ही प्रयासरत नज़र आती है.
- मंत्रिपरिषद विधानसभा के प्रति उत्तरदायी (collective responsible) होता है. विधानसभा अविश्वास प्रस्ताव के द्वारा मंत्रिपरिषद को हटा भी सकती है. परन्तु विधानपरिषद के पास ऐसी कोई शक्ति नहीं है.
- विधानसभा के सदस्य राष्ट्रपति भाग लेते हैं पर विधान परिषद् (Legislative Council) के सदस्य इसमें भाग नहीं ले सकते.
- राज्यसभा के चुनाव में भी विधानसभा के सदस्य ही भाग लेते हैं नाकि विधान परिषद् के सदस्य.
- विधान परिषद् का सम्पूर्ण अस्तित्व विधानसभा के विवेक पर निर्भर करता है. यदि विधानसभा चाहे तो विधान परिषद को पूरी तरह से ख़त्म करने के लिए विशेष बहुमत से संकल्प पारित कर सकती है.
शायद आपको अब स्पष्ट हो गया होगा कि विधानसभा (Legislative Assembly) विधान परिषद् (Legislative Council) की तुलना में कितनी अधिक शक्तिशाली है और उसका कार्यक्षेत्र कितना बड़ा है. कुछ लोग कहते हैं कि विधान परिषद् एक अनावश्यक बोझ मात्र है जिसे हटा देना चाहिए
राष्ट्रमंडल खेल
ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन देशों के बीच सौहार्द और भाईचारा स्थापित करने के लिए राष्ट्रकुल खेलों की शुरुआत हुई थी। 1930 से अब तक 18 बार यह आयोजन विभिन्ना देशों में आयोजित हो रहा है। भारत में 19वाँ संस्करण तीन से 14 अक्टूबर तक खेला जाएगा। इसमें 73 देशों के चार हजार से अधिक एथलीट दांव पर लगे 829 पदकों के लिए अपना खेल कौशल दिखाने मैदान में उतरेंगे। राष्ट्रकुल का अब तक का सफर चार हिस्सों में बंटा हुआ है। यह अलग-अलग नामों के साथ आयोजित होता रहा। कुछ कारणों से यह खेल स्थागित भी हुए है।
ब्रिटिश एम्पायर गेम्स 1930-50 :शूरू में राष्ट्रमंडल खेल इसी नाम से अस्तित्व में आया। इसकी शुरुआत 1930 में कनाडा के हेमिल्टन में हुई। इसमें शामिल छह खेलों में 11 देशों से कुल 400 से अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया। इसके बाद 1934 में लंदन में और 1938 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में ये खेल आयोजित हुई। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कई सालों तक ये खेल स्थगित रहे और 1950 से न्यूजीलैंड के ऑकलैंड शहर से दोबारा इनका आयोजन शुरू हुआ।
ब्रिटिश इंपायर व कॉमनवेल्थ गेम्स 1954-66:कनाडा के वेंकुवर में 1954 में आयोजित हुए पाँचवें राष्ट्रकुल खेल इसी नाम से आयोजित हुए। 1958 में वेल्स के कॉर्डिफ में, 1962 ऑस्ट्रेलिया के पर्थ व जमैका के किंग्सटन में 1966 में इसका आयोजन हुआ। इसकी लोकप्रियता भी बढ़ती रही और भाग लेने वाले देशों व खिलाड़ियों की संख्या में भी इजाफा होता रहा।
ब्रिटिश कॉमनवेल्थ गेम्स 1970-74:तीसरी बार इन खेलों के नाम में परिवर्तन हुआ। इस दफा 1970 में स्काटलैंड के एडिनवर्ग में खेले गए खेलों को ब्रिटिश कॉमनवेल्थ गेम्स के नाम से जाना गया। इसी नाम से न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में 1974 में भी इसका आयोजन हुआ।
कॉमनवेल्थ गेम्स 1978-2010: 1978में कनाडा के एडमंटन से आयोजित हुए खेल कॉमनवेल्थ के नाम से प्रारंभ हुए। इस तरह चौथी बार इसके नाम में परिवर्तन हुआ। कनाडा के बाद 1982 में ब्रिसबेन, 1986 में एडिनबर्ग, 1990 में ऑकलैंड, 1994 में विक्टोरिया, 1998 में कुआलालंपुर, 2002 मैनचेस्टर, 2006 में मेलबोर्न में इसका आयोजन हो चुका है। अब तक इसी नाम से आठ बार इसका आयोजन हो चुका है।
दिल्ली में आयोजित हो रहा खेल भी इसी नाम से खेला जा रहा है। राष्ट्रकुल खेलों में पहली बार विवाद का साया 1978 में दिखाई दिया। न्यूजीलैंड द्वारा दक्षिण अफ्रीका से खेल को लेकर करार किया था, इससे नाइजीरिया नाराज हो गया था और उसने सबसे पहले इन खेलों का बहिष्कार किया। इसके बाद 1986 राष्ट्रकुल खेल में महज 26 देशों ने अपनी टीमें भेजी। इसका कारण इंग्लैंड की थेचर सरकार के व्यवहार व दक्षिण अफ्रीका से किए गए समझोते थे, इस बार अफ्रीका, एशिया व केरेबियन देशो के 59 में से 32 देशों ने इसका विरोध कर टूर्नामेंट का बहिष्कार किया था।
दक्षिण अफ्रीका के कारण 1974, 1982 व 1990 में भी इसका असर दिखा है। राष्ट्रकुल खेलों के 80 साल के इतिहास में 18 संस्करण आयोजित हो चुके है। इसमें अब तक 90 से अधिक देश भाग ले चुके हैं
16/03/18
14/03/18
हिमालय
हिमालय संस्कृत 'हिम' तथा 'आलय' शब्दों से मिलकर बना है, जिसका शब्दार्थ 'बर्फ़ का घर' होता है। हिमालय भारत की धरोहर है। हिमालय पर्वत की एक चोटी का नाम 'बन्दरपुच्छ' है। यह चोटी उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिला में स्थित है। इसकी ऊँचाई 20,731 फुट है। इसे सुमेरु भी कहते हैं। हिमालय एक पूरी पर्वत शृंखला है, जो भारतीय उपमहाद्वीप और तिब्बत को अलग करता है। यह भारतवर्ष का सबसे ऊँचा पर्वत है, जो उत्तर में देश की लगभग 2500 किलोमीटर लंबी सीमा बनाता है और देश को उत्तर एशिया से पृथक् करता है। हिमालय पर्वतमाला की गणना वैज्ञानिक विश्व की नवीन पर्वत मालाओं से करते हैं। इसका निर्माण सागर तल के उठने से आज से पाँच-छह करोड़ वर्ष पहले हुआ था। हिमालय को अपनी पूरी ऊँचाई प्राप्त करने में 60 से 70 लाख वर्ष लगे। यह अपनी ऊँची चोटियों के लिये प्रसिद्ध है। विश्व का सर्वोच्च शिखर माउंट एवरेस्ट हिमालय की है। विश्व के 100 सर्वोच्च शिखरों में कई हिमालय की चोटियाँ हैं। अन्य पर्वतों की अपेक्षा यह काफ़ी नया है। हिमालय से सम्बद्ध पहली पर्वत शृंखला पीर पंजाल पर्वत श्रेणी है। हिमालय के एक भाग का नाम 'कलिंद' है। यहीं से यमुना निकलती है। इसी से यमुना का नाम 'कलिंदजा' और कालिंदी भी है। दोनों का मतलब 'कलिंद की बेटी' होता है। यह जगह बहुत सुन्दर है, पर यहाँ पहुँचना बहुत कठिन है। अपने उद्गम से आगे कई मील तक विशाल हिमगारों और हिंम मंडित कंदराओं में अप्रकट रूप से बहती हुई तथा पहाड़ी ढलानों पर से अत्यन्त तीव्रता पूर्वक उतरती हुई इसकी धारा यमुनोत्तरी पर्वत 20,731 फीट ऊँचाई से प्रकट होती है। हिमालय पर्वतश्रेणी के अतिरिक्त अन्याई शिखर की सबसे ऊँची चोटी है।
से लेकर असम तक इसका विस्तार है।
सागर
धरती पर स्थित सागरों के जल-स्तर का सामान्य-स्तर से ऊपर उठना ज्वार तथा नीचे गिरना भाटा कहलाता है। ज्वार-भाटा की घटना केवल सागर पर ही लागू नहीं होती बल्कि उन सभी चीजों पर लागू होतीं हैं जिन पर समय एवं स्थान के साथ परिवर्तनशील गुरुत्व बल लगता है। (जैसे ठोस जमीन पर भी)
पृथ्वी, चन्द्रमा और सूर्य की पारस्परिक गुरुत्वाकषण शक्ति की क्रियाशीलता ही ज्वार-चन्द्रमा पृथ्वी से अपने तरफ चीजो को खीचना चाहता है। चुकी जल पर बल लगाने पर वह अपनी आकार व स्थिति को आसानी से बदल लेता है। चंद्रमा पृथ्वी पर उपस्थित जल को अपनी तरफ खीचना चाहता है। वही सागर सतह उठता है, जिसके सामने चद्रमा होता हैं अर्थात पृथ्वी के जिस महासागरीय बिंदु के ऊपर चद्रमा होगा, उस महासागरीय बिंदु में उठान आएगा।
– ज्वार एक साथ धरती पर दो जगहों पर आता हैं
1 चन्द्रमा के सामने वाले भाग पर
2 पृथ्वी के ठीक विपरीत वाले भाग पर
1 चन्द्रमा के सामने वाले भाग पर
2 पृथ्वी के ठीक विपरीत वाले भाग पर
कारण
– चद्रमा से जनित आकर्षण शक्ति की ओर पृथ्वी में जो खिंचाव होता हैं, उसको सन्तुलित करने के लिए पृथ्वी द्वारा एक विपरीत बल लगाया जाता हैं जिसके कारण ज्वार के ठीक विपरीत वाले जगह पर पृथ्वी पर पानी का सतह ऊपर उठ जाता हैं, अतः इसी कारण एक ही समय मे दो जगह ज्वार आता हैं।
– दोनों ज्वार के पार्श्व के किनारों पर जलराशि धंस जाती हैं क्योंकि जलराशि की अधिकतम मात्रा ज्वार के द्वारा खीच ली जाती हैं जिसके कारण पार्श्व के किनारो पर जलराशि नीचे चलि जाती हैं, इसे भाटा कहा जाता हैं।
– अर्थात एक ही समय मे पृथ्वी पर अलग अलग जगहों पर दो ज्वार तथा दो भाटा आता हैं।
– चुकी पृथ्वी अपना एक घुर्णन 24 घण्टा में पूरा करती हैं। अतः इसी कारण एक ही स्थल पर 24 घँटे में दो बार ज्वार तथा दो बार भाटा आएगा ।
– किसी स्थल पर एक ज्वार के 6 घण्टे के बाद तथा 12 घन्टे बाद फिर से ज्वार आएगा। तथा 18 घँटे बाद भाटा तथा 24 घन्टे बाद ज्वार आएगा ।
– दोनों ज्वार के पार्श्व के किनारों पर जलराशि धंस जाती हैं क्योंकि जलराशि की अधिकतम मात्रा ज्वार के द्वारा खीच ली जाती हैं जिसके कारण पार्श्व के किनारो पर जलराशि नीचे चलि जाती हैं, इसे भाटा कहा जाता हैं।
– अर्थात एक ही समय मे पृथ्वी पर अलग अलग जगहों पर दो ज्वार तथा दो भाटा आता हैं।
– चुकी पृथ्वी अपना एक घुर्णन 24 घण्टा में पूरा करती हैं। अतः इसी कारण एक ही स्थल पर 24 घँटे में दो बार ज्वार तथा दो बार भाटा आएगा ।
– किसी स्थल पर एक ज्वार के 6 घण्टे के बाद तथा 12 घन्टे बाद फिर से ज्वार आएगा। तथा 18 घँटे बाद भाटा तथा 24 घन्टे बाद ज्वार आएगा ।
– जब चन्द्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करते हुवे सूर्य और पृथ्वी के बीच मे आ जाता हैं या जब पृथ्वी, चन्द्रमा और सूर्य एक सीध में आ जाते है तो पृथ्वी पर चन्द्रमा और सूर्य के आकर्षण शक्ति का प्रभाव सम्मिलित रूप से पड़ता हैं, ऐसी स्थिति में महासागरीय जल में अधिक उठान होता हैं, तथा इसे दीर्घ ज्वार कहते है।
जब चद्रमा, पृथ्वी और सूर्य समकोण की स्थिति में हो तो चद्रमा और सूर्य का आकर्षण बल एक दूसरे के विपरीत कार्य करने लगता हैं, जिसके कारण दोनों की आकर्षण शक्ति पृथ्वी पर प्रभावी नही हो जाती हैं परिणाम स्वरूप निम्न ज्वार आता हैं।
– दुनिया का सबसे ऊंचा ज्वार 18 मीटर का अमेरिका के तट पर फंडि की खाड़ी में आता है
– दुनिया का सबसे ऊंचा ज्वार 18 मीटर का अमेरिका के तट पर फंडि की खाड़ी में आता है
एक ऐसा सँकरा समुद्री क्षेत्र जो तीन ओर से महाद्वीप से घिरा हुआ है। की उत्पत्ति का प्रमुख कारण हैं।जब पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करते हुए सूर्य और चन्द्रमा के बीच मे आ जाता हैं, तो चन्द्रमा पृथ्वी की छाया के कारण पूरी तरह अंधकारमय हो जाता हैं, ऐसी स्थिति को चन्द्रग्रहण कहते है।
– एक वर्ष में अधिकतम 7 सूर्यग्रहण और चन्द्रग्रहण हो सकते है।– पूर्ण सूर्यग्रहण की स्थिति में भी चन्द्रमा सूर्य को पूरी तरह से ढक नही पाता है, तथा सूर्य बाहरी भाग अत्यधिक चमकता हुआ दिखाई देता हैं, जिसे कोरोना कहा जाता हैं। इसे हीरक वलय या diamond ring कहा जाता है।
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13/03/18
नोबेल पुरस्कार किस क्षेत्र दिया जाता है
नोबेल पुरस्कार कुल 6 क्षेत्र मे दिया जाता हैं
1-भौतिकी
2-रसायन शास्त्र
3-चिकित्सा
4-साहित्य
5-शांति
6- अर्थशास्त्र
12/03/18
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