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12/01/24

कांग्रेस सम्मेलन

महत्वपूर्ण कांग्रेस सम्मेलन...
👉 प्रथम कांग्रेस सम्मेलन 1885 , स्थान.. बॉम्बे, अध्यक्ष.. डब्लू सी बनर्जी
👉 द्वितीय कांग्रेस सम्मेलन 1886 , स्थान.. कोलकाता, अध्यक्ष…दादा भाई नौरोजी, प्रथम गैर हिन्दू अध्यक्ष
👉1887 में कांग्रेस का सम्मेलन मद्रास में हुवा जिसकी अध्यक्षता सैय्यद बदरुद्दीन तैय्यबजी ने किया था , जो प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष थे।।
👉1888 में कांग्रेस का सम्मेलन इलाहाबाद में जिसकी अध्यक्षता जार्ज यूल ने की थी, जो प्रथम अंग्रेज अध्यक्ष थे।।
👉1905 में कांग्रेस का सम्मेलन बनारस में हुवा था जिसकी अध्यक्षता गोपाल कृष्ण गोखले ने किया था, इसमें बंगभंग और कर्जन की प्रतिक्रियावादी नीतियों की आलोचना की गई।।
👉1906 में कांग्रेस का सम्मेलन कलकत्ता में हुवा था इसकी अध्यक्षता दादा भाई नौरोजी ने किया था , स्वराज शब्द का प्रथम बार प्रयोग किया गया ।।
👉1907 में कांग्रेस का सम्मेलन सूरत में हुवा था इसकी अध्यक्षता रास बिहारी बोस ने की थी, कांग्रेस का गरम एवम नरम दल में विभाजन
👉1916 में कांग्रेस का सम्मेलन लखनऊ में हुवा था इसकी अध्यक्षता अंबिका चरण मजूमदार ने किया था, कांग्रेस के गरम एवम नरम दल में समझौता, कांग्रेस और मुस्लिम लीग में समझौता।।।
👉1917 में कांग्रेस सम्मेलन कलकत्ता में हुवा था इसकी अध्यक्षता एनी बेसेंट ने किया था , प्रथम महिला अध्यक्ष थी।।
👉1919 में कांग्रेस सम्मेलन अमृतसर में हुवा था इसकी अध्यक्षता मोतीलाल नेहरू ने किया था , इसमें जलियावाले बाग हत्याकांड की भर्त्सना, खिलाफत आंदोलन को समर्थन देने का निर्णय।।।
👉1920 में कांग्रेस सम्मेलन नागपुर में हुवा था इसकी अध्यक्षता सी विजय राघवाचारी ने की थी, इसमें कांग्रेस का नया संविधान बनाया गया ।।
👉1923 में कांग्रेस का अधिवेशन काकी नाडा (दिल्ली) में हुवा था , इसकी अध्यक्षता मौलाना मुहम्मद अली अबुल कलाम आज़ाद ने की थी, यह सबसे कम उम्र के कांग्रेस अध्यक्ष थे।।
👉1924 में कांग्रेस का सम्मेलन बेलगांव में हुवा था जिसकी अध्यक्षता महात्मा गांधी ने किया था ।।
👉1925 में कांग्रेस का सम्मेलन कानपुर में हुवा था जिसकी अध्यक्षता सरोजनी नायडू ने की थी, प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष थी।।
👉1929 में कांग्रेस का सम्मेलन लाहौर में हुवा था इसकी अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने किया था , पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पारित हुवा था।।
👉1931 में कांग्रेस का सम्मेलन कराची में हुवा था इसकी अध्यक्षता वल्लभभाई पटेल ने किया था , इसमें गांधी इरविन समझौता का अनुमोदन, मौलिक अधिकारों का प्रस्ताव और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम को स्वीकृति।।
👉1937 में कांग्रेस का सम्मेलन फैजपुर में हुवा था,इसकी अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने किया था , पहला अधिवेशन जो गांव में हुवा था ।।
👉1938 में कांग्रेस का सम्मेलन हरिपुरा में हुवा था,इसकी अध्यक्षता सुभाष चंद्र बोस ने की थी।।
👉1939 में कांग्रेस का सम्मेलन त्रिपुरी में हुवा था, इसके अध्यक्ष सुभाष चंद्र बोस थे कुछ समय पश्चात बोस ने इस्तीफा दे दिया और राजेंद्र प्रसाद अध्यक्ष बने।।



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14/12/23

लखनऊ समझोता या कांग्रेस लीग योजना


1916 में कांग्रेस अधिवेशन लखनऊ में हुआ सूरत अधिवेशन 1907 में कांग्रेस का विभाजन हुआ था जो की 1916 तक चला
एनी बेसेंट में गरम दल और नरम दल को एक साथ लाने का प्रयास किया और सफल रही 1916 का कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता अंबिका चरण मजूमदार ने की दिसंबर 1916 में मुस्लिम लीग और कांग्रेस दोनों लखनऊ में वार्षिक अधिवेशन में शामिल हुए यह समझौता लखनऊ समझौता या कांग्रेस लीग योजना के नाम से जाना जाता है
 

07/08/23

नमस्कार 




नमस्कार 

राजपाल तथा मुख्यमंत्री संबंधित नोट



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भूगोल संबंधित नोट

हड़प्पा संबंधित नोट 

 
6  वी bc की राजनीतिक और सांस्कृतिक
 
 मौर्य उत्तर  काल


11/07/23

एसएससी जीडी /पीसीएस/आर ओ ए आर ओ/केवीएस /वनडे एग्जाम टेस्ट

1- टेस्ट नंबर वन जीएस start 

2-टेस्ट नंबर दो जीएस start 

3- टेस्ट नंबर 3 जीएस start 

4 - टेस्ट नंबर 4 जीएस start 

5- टेस्ट नंबर 5 जीएस start

6-टेस्ट नंबर 6 जीएस start

7-। टेस्ट नंबर 7 जीएस start 

8- टेस्ट नंबर 8 जीएस start 

9- टेस्ट नंबर 9 जीएस start 

10 टेस्ट नंबर 10 जीएस start 

11- टेस्ट नंबर 11 जीएस start 

12- टेस्ट नंबर 12 जीएस start 

https://gkbyershivendra.blogspot.com/2023/01/blog-post.html

13- टेस्ट नंबर 13 जीएस start 

14- टेस्ट नंबर 14 जीएस start 

15- टेस्ट नंबर 15 जीएस start 

16-  टेस्ट नंबर 16 जीएस start 

17- टेस्ट नंबर 17 जीएस start 

18- टेस्ट नंबर 18  जीएस start 

19-  टेस्ट नंबर 19  जीएस start 

20- टेस्ट नंबर 20  जीएस start 

21- टेस्ट नंबर 21 जीएस start 

22- टेस्ट नंबर 22 जीएस Start 

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जीएस टेस्ट सीरीज

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24- जीएस टेस्ट start 

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28- जीएस टेस्ट start

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31-जीएस टेस्ट start 

32- जीएस टेस्ट Start 
33- जीएस टेस्ट START 
34- जीएस टेस्ट start 
35- जीएस टेस्ट start  
36- जीएस टेस्ट - start 
37-मिश्रित टेस्ट- Start 
38- जीएस टेस्ट - START


RO/ARO TEST

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02/04/23

 “अधिगमकर्ता के सर्वागीण विकास में” राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की उपयोगिता

प्रस्तावना -

         किसी भी देश का विकास तभी हो सकता है जब वहाँ के नागरिक का विकास होगा। प्रत्येक नागरिक का विकास उसकी शिक्षा पर निर्भर करता है। शिक्षा का प्राथमिक उद्देश्य व्यक्ति के ज्ञान और कौशल में वृद्धि करके एक अच्छा नागरिक बनाना।

“शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिसका उपयोग आप दुनिया के बदलने  के लिए कर सकते हैं”

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो हमारा देश शिक्षा की गुणवत्ता की समस्या से जूझ रहा है। इसलिए नई शिक्षा नीति 2020 अधिगमकर्ता के संपूर्ण विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

 भारत में पहले की शिक्षा नीति में बहुत समय से कोई बदलाव नहीं किया गया था जो जानकारी आपको पुराने समय में दी जाती थी वही जानकारी अभी तक चली आ रही थी। शिक्षा की गुणवत्ता की समस्या का समाधान करने के लिए ऐसी कोई नीति लाना अति आवश्यक हो गया था जो विद्यार्थी में तर्क करना, अपने अंदर की क्षमता की पहचान कर  अपने व्यक्तित्व का पूर्ण विकास कर सकें।  इस ज्वलंत समस्या को देखते हुए भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 34 साल बाद 29 जुलाई 2020 को के० कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020 ) का शुभारंभ किया गया। इस शिक्षा नीति के तहत छात्रों पर  बस्ते के बोझ को कम करके बच्चों के शारीरिक , मानसिक , नैतिक पक्ष का विकास किया जा सके। भारत के शिक्षा में परिवर्तन कई नीतियों द्वारा कई बार जैसे - 1968 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति और 1986 की नई शिक्षा नीति के द्वारा शिक्षा की संरचना और शिक्षा के स्तर में परिवर्तन लाया गया, परंतु यह परिवर्तन ज्यादा कारगर साबित नहीं हुआ। आधुनिक समय में ज्ञान व कौशल के परिदृश्य में संपूर्ण विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है जिसमें भारत जैसा विकासशील देश भी कौशल के द्वारा पूरे विश्व में एक सर्वोपरि राष्ट्र बनाने की कल्पना कर रहा है। जिसे देखते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 मील का पत्थर साबित होगा। नई शिक्षा नीति 2020 की संरचना 5+3+3+4 बच्चों के विकास में अधिक लाभप्रद होगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के द्वारा विद्यालय व उच्च शिक्षा में बच्चों के उज्जवल भविष्य के मार्ग  को प्रशस्त करने की आशा की जा रही है 

शोध समस्या का औचित्य :

किसी भी नीति की प्रभावशीलता उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में यह देखा गया कि बच्चों के सभी पक्षों के मजबूत ना होने के कारण उनको सही मार्गदर्शन ना मिलने की वजह से अधिकांश विद्यार्थी में क्रोध , कुण्ठा , आत्महीनता को पाया गया  जिसका कारण कई हो सकता है जैसे- विद्यार्थियों में मनोबल की कमी होना, निराशावादी प्रवृत्ति, लिंगापूवाग्रह   व लैंगिक भेदभाव आदि 

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मार्गदर्शी सिद्धांत

(1) भावना व प्रयोजन

(2) चरणबद्ध तरीका

(3) वरियता निर्धारण

(4) व्यापकता व समग्रता

(5) समन्वय बनाना

(6) समय की पाबंदी

(7) विश्लेषण व समीक्षा

इसके अलावा भावी कार्यक्रमों व कार्यों के लिए नींव बनाने तथा इस किस सहज प्रगति के लिए कुछ विशिष्ट क्रियाकलापों में निवेश करने से बच्चों के बढ़ रहे अवांछनीय प्रवृत्ति को कम किया जा सकता है ‌

उद्देश्य -

 <1> भारतीय जड़ो और गौरव से बंधे रहने में :

बच्चों में राष्ट्र के प्रति गौरव की भावना को विकसित करना। हमारा जो समाज है वो सांस्कृतिक विविधताओं में बटा हुआ है। बालक को भारत की संस्कृति का सम्मान करते हुए उसकी अखंडता को बनाए रखने में अग्रसर रहना चाहिए।

<2> सभी शैक्षणिक  निर्णयों की आधारशिला के रूप में पूर्ण समता और समावेशन :

सभी विद्यार्थियों के व्यक्तिगत विभिन्नता को देखते हुए सभी स्तर के विद्यार्थियों के लिए सामूहिक रूप से NEP 2020 द्वारा शिक्षा के स्तर को व्यापक किया गया है जिससे सभी के पास शिक्षा बहुत सके और विधार्थी अपने गुण और क्षमता के आधार पर अपने अंदर की कमियों को दूर कर, उनमें सुधार कर सकें।NEP 2020 के द्वारा बच्चों में सहयोग की भावना जागृत होगी। 

<3> बहु - भाषिकता और अध्ययन - अध्यापन के कार्य में भाषा की शक्ति को प्रोत्साहन -

यह सर्वविदित है कि छोटे बच्चे अपने घर की भाषा/ मातृभाषा के सार्थक अवधारणाओं को अधिक तेजी से सीखते हैं। बच्चों द्वारा बोली जाने वाली भाषा और शिक्षण के माध्यम के बीच यदि कोई अंतराल मौजूद हो तो उससे समाप्त किया जा सके। इसलिए कम से कम ग्रेड 5 तक की शिक्षा बच्चों के मातृभाषा के रूप में दी जाए।

साहित्य की समीक्षा- 

संबंधित साहित्य से तात्पर्य उन सभी प्रकार के अध्ययन स्त्रोतों से है जिसमें शोधकर्ता के समस्या चयन, परिकल्पना निर्माण तथा अध्ययन की रूपरेखा बनाने में सहायता मिलती है। साहित्यिक अध्यनकर्ता के लिए शोध संबंधित आवश्यक वैज्ञानिक पृष्ठभूमि तैयार करना है साथ ही अध्ययन क्षेत्र में हुए शोध कार्यों का विवरण भी मिल जाता है। जिस से संबंधित अध्ययन की पुनरावृति भी नहीं हो पाती।

यह अध्ययन एक ऐतिहासिक और विश्लेषणात्मक अध्ययन है। इसमें पुस्तकालय विधि द्वारा फील्ड टिप्स साक्षात्कार और प्रश्नावली अनुसंधान तकनीक का प्रयोग किया गया है। इसमें बालकों में पढ़ाई के दौरान आने वाली समस्त समस्याओं के ऊपर काम करने की योजना बनाई गई है। जिससे छात्रों में कला, रचनात्मकता, तार्किक सोच आदि के विकास को देखा जाए।



शोध की आवश्यकता और महत्व :

जब से शिक्षा की शुरुआत हुई है और वर्तमान में शिक्षा को देखा जाए तो समय-समय पर शिक्षाविदों द्वारा, सरकारों द्वारा शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए कई सारी योजनाएं और अभियान लाया गया जैसे- सर्व शिक्षा अभियान, ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड, समग्र शिक्षा अभियान, निपुण भारत आदि अभियान चलाया गया ताकि बच्चों का विकास हो सके।

विगत वर्षों में कई सर्वे द्वारा यह पता लगा कि भारत की विभिन्न स्कूलों में शिक्षा का स्तर न हीं बढ़ रहा है और ना ही नामांकन संख्या में। मुख्यता यह पाया गया कि प्रत्येक बच्चे अपने उद्देश्य, क्षमता, योग्यता की पहचान ही नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें सही निर्देशन ही नहीं मिल पाता और वह पढ़ाई के क्षेत्र में पीछे रह जाते हैं और व्यस्क अधिक डिग्री प्राप्त करने के बाद भी नौकरी के लिए इधर-उधर भटकते रहते हैं इन्हीं कारणों की वजह से बच्चों को सभी पक्षों में मजबूत करने के लिए शोध की आवश्यकता पड़ी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उपयोग द्वारा शिक्षा में समावेशन, गुणवत्ता शिक्षा को केवल विद्यालय तक ही सीमित ना रखना बल्कि इसको विद्यालय के बाहर से भी जोड़ना, इसकी प्रमुख विशेषता है। आधुनिक समय में टेक्नोलॉजी का प्रयोग बहुतायत की संख्या में किया जा रहा है जिससे विद्यार्थियों में भटकने, उलझने और अपराध की प्रवृत्ति बढ़ती ही जा रही है


अनुसंधान प्रविधि :

(1) सृष्टि में जो कुछ है उसे जानने के लिए अनेक मार्ग मनुष्य ने निकाले हैं। कोई व्यक्ति समस्त सृष्टि तत्व को बुद्धि से समझना चाहता है, कोई उसे चिंतन से पाना चाहता है और कोई उसके लिए वैज्ञानिक विश्लेषण तथा प्रयोग की पद्धति अपनाता है।

(2) कोई भी शोधार्थी किसी भी समस्या का हल निकालने के लिए ऐसी अनुसंधान प्रविधि का प्रयोग करता है, जो समस्या के समुचित स्तर पर उपलब्ध हो सके, मितव्ययी व विश्वसनीय, वस्तुनिष्ठ एवं वैध परिणामों की प्राप्ति कर सकें।

(3) हम अपनी समस्या का हल निकालने के लिए सर्वेक्षण अनुसंधान का प्रयोग करेंगे । जिसके माध्यम से हम अपने आसपास के स्कूलों में जाकर विभिन्न विद्यार्थियों की मासिक स्तर, रुचि, तर्क करने की क्षमता के विकास के बारे में अध्ययन अध्यापन करेंगे। सर्वेक्षण अनुसंधान करते समय अयादृच्छिक प्रतिदर्श का प्रयोग करेंगे।

(4) जैसे-जैसे जमाना बदल रहा है वैसे - वैसे शिक्षा के स्तर के बदलने के साथ-साथ बच्चों में परिपक्वता के स्तर में भी बदलाव देखा गया है। यहां पर हम कई ग्रन्थों, रिसर्च पेपर, समाचार पत्रों, पुस्तकों का प्रयोग करके ऐतिहासिक अनुसंधान विधि का प्रयोग करते हुए विगत छात्रों के संपूर्ण पक्ष के विकास तथा आज के छात्रों के छात्रों में क्या परिवर्तन आ रहा है इसका अध्ययन करेंगे।

(5) अनुसंधान के अवलोकन विधि का प्रयोग करते हुए हमें विभिन्न विद्यालय के बच्चों की कमियां, रुचियांँ, वाद विवाद में खुलकर आगे बढ़कर बोलने की लालसा आदि का प्रत्यक्ष रूप से अवलोकन करेंगे।

संदर्भ सूची :

(1) शिक्षक चुनौती (नीति सम्बन्धी परिप्रेक्ष्य) - नई दिल्ली शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार

(2) नई शिक्षा नीति ( विशेषांक) - आगरा विनोद पुस्तक मंदिर

(3) डॉक्टर मालती सारस्वत - भारतीय शिक्षा विकास और उसकी समस्याएं

(4) बी० बी० अग्रवाल - आधुनिक भारत शिक्षा और समस्याएँ आलोक प्रकाशन लखनऊ (इलाहाबाद)

( 5 ) विजय शुक्ल - भारतीय शिक्षा और उसकी समस्याओं का अध्ययन (सहारा पब्लिकेशन, प्रयागराज)

(6)  इंटरनेट 

( 7) पत्र पत्रिकाएंँ 

 (8) विजय शुक्ल - भारतीय शिक्षा उसकी समस्याओं का अध्ययन सहारा पब्लिकेशन इलाहाबाद।

(9)  डॉ०  कर्ण  सिंह - भारत में शिक्षा पुरानी का विकास गोविंद प्रकाश लखीमपुर खीरी।

(10) बिहारी लाल रमन - शिक्षा सिद्धांत, रस्तोगी पब्लिकेशन

(11) डॉ० डी ० डी० मिश्र - भारत में शैक्षिक प्रणाली का विकास  मित्रा पब्लिकेशन, कानपुर

01/04/23

NEP 2020 : एक उम्मीद “अधिगमकर्ता के सम्पूर्ण विकास में

 NEP 2020 : एक उम्मीद “अधिगमकर्ता के सम्पूर्ण विकास में ”

शीर्षक - किसी भी देश का विकास तभी हो सकता है जब वहाँ के नागरिकता का विकास होगा। प्रत्येक नागरिक का विकास उसकी शिक्षा पर निर्भर करता है। शिक्षा का प्राथमिक उद्देश्य व्यक्ति के ज्ञान और कौशल में वृद्धि करके एक अच्छा नागरिक बनाना।

“शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिसका उपयोग आप दुनिया के बदलने  के लिए कर सकते हैं”

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो हमारा देश शिक्षा की गुणवत्ता की समस्या से जूझ रहा है। इसलिए नई शिक्षा नीति 2020 अधिगमकर्ता के संपूर्ण विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

हमारी समाज की सांस्कृतिक विविधता है उसका हमे सम्मान करते हुए नई शिक्षा नीति का उपयोग करना चाहिए

प्रस्तावना - भारत में पहले की शिक्षा नीति में बहुत समय से कोई बदलाव नहीं किया गया था जो जानकारी आपको पुराने समय में दी जाती थी वही जानकारी अभी तक चली आ रही है। भारत को विकासशील देश से विकसित देश में परिवर्तन के लिए नई शिक्षा नीति लाना बहुत जरूरी था इस ज्वलंत समस्या को देखते हुए भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 34 साल बाद 29 जुलाई 2020 को के० कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020 ) का शुभारंभ किया गया। इस शिक्षा नीति के तहत छात्रों पर शिक्षा के बोझ को कम करके बच्चों के शारीरिक पक्ष, मानसिक पक्ष, नैतिक पक्ष का विकास किया जा सके। भारत के शिक्षा में परिवर्तन कई नीतियों द्वारा कई बार जैसे 1968 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति और 1986 की नई शिक्षा नीति के द्वारा शिक्षा की संरचना और शिक्षा के स्तर में परिवर्तन लाया जाए। परंतु यह परिवर्तन ज्यादा कारगर साबित नहीं हुआ। आधुनिक समय में ज्ञान व कौशल के परिदृश्य में संपूर्ण विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है जिसे देखते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 मील का पत्थर साबित होगा। नई शिक्षा नीति 2020 की संरचना 5+3+3+4 बच्चों के विकास में अधिक लाभप्रद होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के द्वारा विद्यालय व उच्च शिक्षा में बच्चों के उज्जवल भविष्य के मार्ग  को प्रशस्त करने की आशा की जा रही है

उद्देश्य -

<1‌> विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास में NEP 2020 की उपयोगिता :

यह कहने में कोई शक नहीं है कि भारत देश में शिक्षा का स्तर और विद्यार्थी की स्थिति का क्या हाल है फिर भी देश की शिक्षा में बदलाव लाने और उसकी स्थिति को बेहतर बनाने का प्रयास निरंतर किया जा रहा है। विद्यार्थी का जीवन को बदलने और उसके शिक्षा में परिवर्तन लाने में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शैक्षिक परिदृश्य को परिवर्तित कर देगी जिससे  युवाओं को वर्तमान व  भावी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार किया जा सके।

<2‌> भारतीय जड़ो और गौरव से बंधे रहने में :

बच्चों में राष्ट्र के प्रति गौरव की भावना को विकसित करना। हमारा जो समाज है वो सांस्कृतिक विविधताओं में बटा हुआ है। बालक को भारत की संस्कृति का सम्मान करते हुए उसकी अखंडता को बनाए रखने में अग्रसर रहे।

<3> सभी शैक्षणिक  निर्णयों की आधारशिला के रूप में पूर्ण समता और समावेशन :

सभी विद्यार्थियों के व्यक्तिगत विभिन्नता को देखते हुए सभी स्तर के विद्यार्थियों के लिए सामूहिक रूप से NEP 2020 द्वारा शिक्षा के स्तर को व्यापक किया गया है जिससे सभी के पास शिक्षा बहुत सके और विधार्थी अपने गुण और क्षमता के आधार पर अपने अंदर की कमियों को दूर कर उनमें सुधार कर सकें।NEP 2020 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति से बच्चों की पढ़ाई की शुरुआत 3 साल से हो जाएगी क्योंकि शिक्षा के ढांचे में परिवर्तन करके शिक्षा की संरचना 5+3+3+4 किया गया है

शोध समस्या का औचित्य :

किसी भी नीति की प्रभावशीलता उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में या देखा गया कि बच्चों के सभी पक्षों के मजबूत ना होने के कारण उसको सही मार्गदर्शन ना मिलने की वजह से अधिकांश विद्यार्थी आत्महत्या करने की कोशिश कर ली जिसका कारण कई हो सकता है नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मार्गदर्शी सिद्धांत
(1) भावना व प्रयोजन
(2) चरणबद्ध तरीका
(3) वरियता निर्धारण
(4) व्यापकता व समग्रता
(5) समन्वय बनाना
(6) समय की पाबंदी
(7) विश्लेषण व समीक्षा
इसके अलावा भावी कार्यक्रमों व कार्यों के लिए नींव बनाने तथा इस किस सहज प्रगति के लिए कुछ विशिष्ट क्रियाकलापों में निवेश करने से बच्चों के बढ़ रहे अवांछनीय प्रवृत्ति को कम किया जा सकता है ‌

शोध की आवश्यकता और महत्व :

जब से शिक्षा की शुरुआत हुई है और वर्तमान में शिक्षा को देखा जाए तो समय-समय पर शिक्षाविदों द्वारा, सरकारों द्वारा शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए कई सारी योजनाएं और अभियान लाया गया जैसे- सर्व शिक्षा अभियान, ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड, समग्र शिक्षा अभियान, निपुण भारत आदि अभियान चलाया गया ताकि बच्चों का विकास हो सके।
विगत वर्षों में कई सर्वे द्वारा यह पता लगा कि भारत की विभिन्न स्कूलों में शिक्षा का स्तर न हीं बढ़ रहा है और ना ही नामांकन संख्या में। मुख्यता यह पाया गया कि प्रत्येक बच्चे अपने उद्देश्य, क्षमता, योग्यता की पहचान ही नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें सही निर्देशन ही नहीं मिल पाता और वह पढ़ाई के क्षेत्र में पीछे रह जाते हैं और व्यस्क अधिक डिग्री प्राप्त करने के बाद भी नौकरी के लिए इधर-उधर भटकते रहते हैं इन्हीं कारणों की वजह से बच्चों को सभी पक्षों में मजबूत करने के लिए शोध की आवश्यकता पड़ी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उपयोग द्वारा शिक्षा में समावेशन, गुणवत्ता शिक्षा को केवल विद्यालय तक ही सीमित ना रखना बल्कि इसको विद्यालय के बाहर से भी जोड़ना, इसकी प्रमुख विशेषता है। आधुनिक समय में टेक्नोलॉजी का प्रयोग बहुतायत की संख्या में किया जा रहा है जिससे विद्यार्थियों में भटकने, उलझने और अपराध की प्रवृत्ति बढ़ती ही जा रही है

शोध रणनीति :

यह अध्ययन एक ऐतिहासिक और विश्लेषणात्मक अध्ययन है। इसमें सर्व अनुसंधान ,अवलोकन अनुसंधान ,प्रयोगात्मक अनुसंधान और केस अनुसंधान का प्रयोग किया जाएगा।

शोध विधि :

जिस प्रकार एक मैकेनिक को इंजन या मशीन ठीक करने के लिए अपने यंत्र या बॉक्स में से एक उपयुक्त यंत्र की खोज करनी होती है ठीक उसी प्रकार अनुसंधान के अंतर्गत एक समस्या के समाधान हेतु अनुसंधान कर्ता को ऐसे वैज्ञानिक उपकरण या वैज्ञानिक प्रक्रिया का चयन करना पड़ता है इस प्रक्रिया को शोध विधि कहते हैं। जिसके आधार पर निम्न मौलिक आवश्यकताओं की पूर्ति संभव हो सके
<1> समस्या का समुचित उत्तर उपलब्ध हो सके।
<2> विश्वसनीय, वस्तुनिष्ठ एवं वैध परिणामों की प्राप्ति हो।
< 3 > मितव्ययी हो

कोई भी समस्या जब शोधार्थी चुन लेता है तो उसे अपने अध्ययन की सत्यता की क्षमता व प्रमाणिकता के लिए एक निश्चित प्रक्रिया के अनुरूप कार्य करना पड़ता है। यह विधि ऐसी होनी चाहिए जो समस्या से संबंधित शंकाओं का समाधान कर सके। साथ ही सभी सभी मनुष्य एक ही निष्कर्ष पर पहुंच सके।
प्रस्तुत अध्ययन में अनेक विधियों का सर्वेक्षण करने के पश्चात मैंने ऐतिहासिक विधि का अनुसरण किया है। अध्ययन के लिए कई  ग्रन्थों, पुस्तकों , समाचार पत्रों, रिसर्च पेपर का प्रयोग किया गया है।

ऐतिहासिक अनुसंधान विधि :

एक समाज की वर्तमान संस्थाओं, समस्याओं व विचारधाराओं की विशिष्ट स्वरूप को ज्ञात करने के लिए उसके ऐतिहासिक अनुसंधानों की आवश्यकता होती है। अतीत में घटित घटनाओं की विधिवत ढंग से जानकारी नि:संदेह  वर्तमान तथा भविष्य का उन्नयन करने में सहयोग देती है। इसलिए इतिहास का सम्यक अध्ययन तथा ऐतिहासिक घटनाओं की खोज करने के लिए ऐतिहासिक अनुसंधान कार्य संपादित किए जाते हैं।
ऐतिहासिक अनुसंधान वस्तुत: अतीत की घटनाओं से जुड़े तथ्यों व उनकी प्रासंगिकता को स्थापित करते हैं। यह किसी व्यक्ति विचार, आंदोलन, संस्था या समय विशेष पर केंद्रित हो सकते हैं।

शोध समस्या का संभावित अध्यायीकरण : 

प्रथम अध्याय

प्रस्तावना

द्वितीय अध्याय

साहित्य का सर्वेक्षण

तृतीय अध्याय

नई शिक्षा नीति 2020 का क्रियान्वयन अध्ययन

चतुर्थ अध्याय

नई शिक्षा नीति 2020 के गुण एवं दोष का अध्ययन

पंचम अध्याय

निष्कर्ष एवं सुझाव

संदर्भ सूची :

< 1 > शिक्षक चुनौती (नीति सम्बन्धी परिप्रेक्ष्य) - नई दिल्ली शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार
<2> नई शिक्षा नीति ( विशेषांक) - आगरा विनोद पुस्तक मंदिर
< 3> डॉक्टर मालती सारस्वत - भारतीय शिक्षा विकास और उसकी समस्याएं
<4> बी० बी० अग्रवाल - आधुनिक भारत शिक्षा और समस्याएँ आलोक प्रकाशन लखनऊ (इलाहाबाद)
< 5 > विजय शुक्ल - भारतीय शिक्षा और उसकी समस्याओं का अध्ययन (सहारा पब्लिकेशन, प्रयागराज)
<6>  इंटरनेट 
< 7> पत्र पत्रिकाएंँ

13/02/23

साइमन कमीशन

भारत सरकार अधिनियम 1919 की समीक्षा के लिए वर्ष 1927 में ब्रिटिश सरकार द्वारा साइमन कमीशन का गठन किया गया था इस आयोग के सभी सदस्य अंग्रेज थे इसी कारण इसे स्वत कमीशन भी कहा जाता है इस आयोग में किसी भी भारतीय को शामिल नहीं किया गया था इसी कारण इसका बाद में बहुत विरोध हुआ था साइमन कमीशन 3 फरवरी 1928 को मुंबई पहुंचा था । लाला लाजपत राय इस कमीशन का विरोध करते हुए लाठी चार्ज होने के कारण घायल हो गए जिससे उनका स्वर्गवास हो गया

06/02/23

तना वाली फसल जड़ वाली फसल बीज वाली फसल अखियां वाली फसल

 

फल- आम, केला, संतरा 

बीज- गेहूं ,चावल ,मक्का

 जड़ -गाजर, चुकंदर मूली पत्तियां -सरसों ,पालक ,मेथी तना -गन्ना, प्याज ,आलू