जस्ट स्वीट
30/06/23
02/04/23
क
“अधिगमकर्ता के सर्वागीण विकास में” राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की उपयोगिता
प्रस्तावना -
किसी भी देश का विकास तभी हो सकता है जब वहाँ के नागरिक का विकास होगा। प्रत्येक नागरिक का विकास उसकी शिक्षा पर निर्भर करता है। शिक्षा का प्राथमिक उद्देश्य व्यक्ति के ज्ञान और कौशल में वृद्धि करके एक अच्छा नागरिक बनाना।
“शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिसका उपयोग आप दुनिया के बदलने के लिए कर सकते हैं”
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो हमारा देश शिक्षा की गुणवत्ता की समस्या से जूझ रहा है। इसलिए नई शिक्षा नीति 2020 अधिगमकर्ता के संपूर्ण विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
भारत में पहले की शिक्षा नीति में बहुत समय से कोई बदलाव नहीं किया गया था जो जानकारी आपको पुराने समय में दी जाती थी वही जानकारी अभी तक चली आ रही थी। शिक्षा की गुणवत्ता की समस्या का समाधान करने के लिए ऐसी कोई नीति लाना अति आवश्यक हो गया था जो विद्यार्थी में तर्क करना, अपने अंदर की क्षमता की पहचान कर अपने व्यक्तित्व का पूर्ण विकास कर सकें। इस ज्वलंत समस्या को देखते हुए भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 34 साल बाद 29 जुलाई 2020 को के० कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020 ) का शुभारंभ किया गया। इस शिक्षा नीति के तहत छात्रों पर बस्ते के बोझ को कम करके बच्चों के शारीरिक , मानसिक , नैतिक पक्ष का विकास किया जा सके। भारत के शिक्षा में परिवर्तन कई नीतियों द्वारा कई बार जैसे - 1968 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति और 1986 की नई शिक्षा नीति के द्वारा शिक्षा की संरचना और शिक्षा के स्तर में परिवर्तन लाया गया, परंतु यह परिवर्तन ज्यादा कारगर साबित नहीं हुआ। आधुनिक समय में ज्ञान व कौशल के परिदृश्य में संपूर्ण विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है जिसमें भारत जैसा विकासशील देश भी कौशल के द्वारा पूरे विश्व में एक सर्वोपरि राष्ट्र बनाने की कल्पना कर रहा है। जिसे देखते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 मील का पत्थर साबित होगा। नई शिक्षा नीति 2020 की संरचना 5+3+3+4 बच्चों के विकास में अधिक लाभप्रद होगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के द्वारा विद्यालय व उच्च शिक्षा में बच्चों के उज्जवल भविष्य के मार्ग को प्रशस्त करने की आशा की जा रही है
शोध समस्या का औचित्य :
किसी भी नीति की प्रभावशीलता उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में यह देखा गया कि बच्चों के सभी पक्षों के मजबूत ना होने के कारण उनको सही मार्गदर्शन ना मिलने की वजह से अधिकांश विद्यार्थी में क्रोध , कुण्ठा , आत्महीनता को पाया गया जिसका कारण कई हो सकता है जैसे- विद्यार्थियों में मनोबल की कमी होना, निराशावादी प्रवृत्ति, लिंगापूवाग्रह व लैंगिक भेदभाव आदि
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मार्गदर्शी सिद्धांत
(1) भावना व प्रयोजन
(2) चरणबद्ध तरीका
(3) वरियता निर्धारण
(4) व्यापकता व समग्रता
(5) समन्वय बनाना
(6) समय की पाबंदी
(7) विश्लेषण व समीक्षा
इसके अलावा भावी कार्यक्रमों व कार्यों के लिए नींव बनाने तथा इस किस सहज प्रगति के लिए कुछ विशिष्ट क्रियाकलापों में निवेश करने से बच्चों के बढ़ रहे अवांछनीय प्रवृत्ति को कम किया जा सकता है
उद्देश्य -
<1> भारतीय जड़ो और गौरव से बंधे रहने में :
बच्चों में राष्ट्र के प्रति गौरव की भावना को विकसित करना। हमारा जो समाज है वो सांस्कृतिक विविधताओं में बटा हुआ है। बालक को भारत की संस्कृति का सम्मान करते हुए उसकी अखंडता को बनाए रखने में अग्रसर रहना चाहिए।
<2> सभी शैक्षणिक निर्णयों की आधारशिला के रूप में पूर्ण समता और समावेशन :
सभी विद्यार्थियों के व्यक्तिगत विभिन्नता को देखते हुए सभी स्तर के विद्यार्थियों के लिए सामूहिक रूप से NEP 2020 द्वारा शिक्षा के स्तर को व्यापक किया गया है जिससे सभी के पास शिक्षा बहुत सके और विधार्थी अपने गुण और क्षमता के आधार पर अपने अंदर की कमियों को दूर कर, उनमें सुधार कर सकें।NEP 2020 के द्वारा बच्चों में सहयोग की भावना जागृत होगी।
<3> बहु - भाषिकता और अध्ययन - अध्यापन के कार्य में भाषा की शक्ति को प्रोत्साहन -
यह सर्वविदित है कि छोटे बच्चे अपने घर की भाषा/ मातृभाषा के सार्थक अवधारणाओं को अधिक तेजी से सीखते हैं। बच्चों द्वारा बोली जाने वाली भाषा और शिक्षण के माध्यम के बीच यदि कोई अंतराल मौजूद हो तो उससे समाप्त किया जा सके। इसलिए कम से कम ग्रेड 5 तक की शिक्षा बच्चों के मातृभाषा के रूप में दी जाए।
साहित्य की समीक्षा-
संबंधित साहित्य से तात्पर्य उन सभी प्रकार के अध्ययन स्त्रोतों से है जिसमें शोधकर्ता के समस्या चयन, परिकल्पना निर्माण तथा अध्ययन की रूपरेखा बनाने में सहायता मिलती है। साहित्यिक अध्यनकर्ता के लिए शोध संबंधित आवश्यक वैज्ञानिक पृष्ठभूमि तैयार करना है साथ ही अध्ययन क्षेत्र में हुए शोध कार्यों का विवरण भी मिल जाता है। जिस से संबंधित अध्ययन की पुनरावृति भी नहीं हो पाती।
यह अध्ययन एक ऐतिहासिक और विश्लेषणात्मक अध्ययन है। इसमें पुस्तकालय विधि द्वारा फील्ड टिप्स साक्षात्कार और प्रश्नावली अनुसंधान तकनीक का प्रयोग किया गया है। इसमें बालकों में पढ़ाई के दौरान आने वाली समस्त समस्याओं के ऊपर काम करने की योजना बनाई गई है। जिससे छात्रों में कला, रचनात्मकता, तार्किक सोच आदि के विकास को देखा जाए।
शोध की आवश्यकता और महत्व :
जब से शिक्षा की शुरुआत हुई है और वर्तमान में शिक्षा को देखा जाए तो समय-समय पर शिक्षाविदों द्वारा, सरकारों द्वारा शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए कई सारी योजनाएं और अभियान लाया गया जैसे- सर्व शिक्षा अभियान, ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड, समग्र शिक्षा अभियान, निपुण भारत आदि अभियान चलाया गया ताकि बच्चों का विकास हो सके।
विगत वर्षों में कई सर्वे द्वारा यह पता लगा कि भारत की विभिन्न स्कूलों में शिक्षा का स्तर न हीं बढ़ रहा है और ना ही नामांकन संख्या में। मुख्यता यह पाया गया कि प्रत्येक बच्चे अपने उद्देश्य, क्षमता, योग्यता की पहचान ही नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें सही निर्देशन ही नहीं मिल पाता और वह पढ़ाई के क्षेत्र में पीछे रह जाते हैं और व्यस्क अधिक डिग्री प्राप्त करने के बाद भी नौकरी के लिए इधर-उधर भटकते रहते हैं इन्हीं कारणों की वजह से बच्चों को सभी पक्षों में मजबूत करने के लिए शोध की आवश्यकता पड़ी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उपयोग द्वारा शिक्षा में समावेशन, गुणवत्ता शिक्षा को केवल विद्यालय तक ही सीमित ना रखना बल्कि इसको विद्यालय के बाहर से भी जोड़ना, इसकी प्रमुख विशेषता है। आधुनिक समय में टेक्नोलॉजी का प्रयोग बहुतायत की संख्या में किया जा रहा है जिससे विद्यार्थियों में भटकने, उलझने और अपराध की प्रवृत्ति बढ़ती ही जा रही है
अनुसंधान प्रविधि :
(1) सृष्टि में जो कुछ है उसे जानने के लिए अनेक मार्ग मनुष्य ने निकाले हैं। कोई व्यक्ति समस्त सृष्टि तत्व को बुद्धि से समझना चाहता है, कोई उसे चिंतन से पाना चाहता है और कोई उसके लिए वैज्ञानिक विश्लेषण तथा प्रयोग की पद्धति अपनाता है।
(2) कोई भी शोधार्थी किसी भी समस्या का हल निकालने के लिए ऐसी अनुसंधान प्रविधि का प्रयोग करता है, जो समस्या के समुचित स्तर पर उपलब्ध हो सके, मितव्ययी व विश्वसनीय, वस्तुनिष्ठ एवं वैध परिणामों की प्राप्ति कर सकें।
(3) हम अपनी समस्या का हल निकालने के लिए सर्वेक्षण अनुसंधान का प्रयोग करेंगे । जिसके माध्यम से हम अपने आसपास के स्कूलों में जाकर विभिन्न विद्यार्थियों की मासिक स्तर, रुचि, तर्क करने की क्षमता के विकास के बारे में अध्ययन अध्यापन करेंगे। सर्वेक्षण अनुसंधान करते समय अयादृच्छिक प्रतिदर्श का प्रयोग करेंगे।
(4) जैसे-जैसे जमाना बदल रहा है वैसे - वैसे शिक्षा के स्तर के बदलने के साथ-साथ बच्चों में परिपक्वता के स्तर में भी बदलाव देखा गया है। यहां पर हम कई ग्रन्थों, रिसर्च पेपर, समाचार पत्रों, पुस्तकों का प्रयोग करके ऐतिहासिक अनुसंधान विधि का प्रयोग करते हुए विगत छात्रों के संपूर्ण पक्ष के विकास तथा आज के छात्रों के छात्रों में क्या परिवर्तन आ रहा है इसका अध्ययन करेंगे।
(5) अनुसंधान के अवलोकन विधि का प्रयोग करते हुए हमें विभिन्न विद्यालय के बच्चों की कमियां, रुचियांँ, वाद विवाद में खुलकर आगे बढ़कर बोलने की लालसा आदि का प्रत्यक्ष रूप से अवलोकन करेंगे।
संदर्भ सूची :
(1) शिक्षक चुनौती (नीति सम्बन्धी परिप्रेक्ष्य) - नई दिल्ली शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार
(2) नई शिक्षा नीति ( विशेषांक) - आगरा विनोद पुस्तक मंदिर
(3) डॉक्टर मालती सारस्वत - भारतीय शिक्षा विकास और उसकी समस्याएं
(4) बी० बी० अग्रवाल - आधुनिक भारत शिक्षा और समस्याएँ आलोक प्रकाशन लखनऊ (इलाहाबाद)
( 5 ) विजय शुक्ल - भारतीय शिक्षा और उसकी समस्याओं का अध्ययन (सहारा पब्लिकेशन, प्रयागराज)
(6) इंटरनेट
( 7) पत्र पत्रिकाएंँ
(8) विजय शुक्ल - भारतीय शिक्षा उसकी समस्याओं का अध्ययन सहारा पब्लिकेशन इलाहाबाद।
(9) डॉ० कर्ण सिंह - भारत में शिक्षा पुरानी का विकास गोविंद प्रकाश लखीमपुर खीरी।
(10) बिहारी लाल रमन - शिक्षा सिद्धांत, रस्तोगी पब्लिकेशन
(11) डॉ० डी ० डी० मिश्र - भारत में शैक्षिक प्रणाली का विकास मित्रा पब्लिकेशन, कानपुर
01/04/23
NEP 2020 : एक उम्मीद “अधिगमकर्ता के सम्पूर्ण विकास में
NEP 2020 : एक उम्मीद “अधिगमकर्ता के सम्पूर्ण विकास में ”
शीर्षक - किसी भी देश का विकास तभी हो सकता है जब वहाँ के नागरिकता का विकास होगा। प्रत्येक नागरिक का विकास उसकी शिक्षा पर निर्भर करता है। शिक्षा का प्राथमिक उद्देश्य व्यक्ति के ज्ञान और कौशल में वृद्धि करके एक अच्छा नागरिक बनाना।
“शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिसका उपयोग आप दुनिया के बदलने के लिए कर सकते हैं”
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो हमारा देश शिक्षा की गुणवत्ता की समस्या से जूझ रहा है। इसलिए नई शिक्षा नीति 2020 अधिगमकर्ता के संपूर्ण विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
हमारी समाज की सांस्कृतिक विविधता है उसका हमे सम्मान करते हुए नई शिक्षा नीति का उपयोग करना चाहिए
प्रस्तावना - भारत में पहले की शिक्षा नीति में बहुत समय से कोई बदलाव नहीं किया गया था जो जानकारी आपको पुराने समय में दी जाती थी वही जानकारी अभी तक चली आ रही है। भारत को विकासशील देश से विकसित देश में परिवर्तन के लिए नई शिक्षा नीति लाना बहुत जरूरी था इस ज्वलंत समस्या को देखते हुए भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 34 साल बाद 29 जुलाई 2020 को के० कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020 ) का शुभारंभ किया गया। इस शिक्षा नीति के तहत छात्रों पर शिक्षा के बोझ को कम करके बच्चों के शारीरिक पक्ष, मानसिक पक्ष, नैतिक पक्ष का विकास किया जा सके। भारत के शिक्षा में परिवर्तन कई नीतियों द्वारा कई बार जैसे 1968 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति और 1986 की नई शिक्षा नीति के द्वारा शिक्षा की संरचना और शिक्षा के स्तर में परिवर्तन लाया जाए। परंतु यह परिवर्तन ज्यादा कारगर साबित नहीं हुआ। आधुनिक समय में ज्ञान व कौशल के परिदृश्य में संपूर्ण विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है जिसे देखते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 मील का पत्थर साबित होगा। नई शिक्षा नीति 2020 की संरचना 5+3+3+4 बच्चों के विकास में अधिक लाभप्रद होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के द्वारा विद्यालय व उच्च शिक्षा में बच्चों के उज्जवल भविष्य के मार्ग को प्रशस्त करने की आशा की जा रही है
उद्देश्य -
<1> विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास में NEP 2020 की उपयोगिता :
यह कहने में कोई शक नहीं है कि भारत देश में शिक्षा का स्तर और विद्यार्थी की स्थिति का क्या हाल है फिर भी देश की शिक्षा में बदलाव लाने और उसकी स्थिति को बेहतर बनाने का प्रयास निरंतर किया जा रहा है। विद्यार्थी का जीवन को बदलने और उसके शिक्षा में परिवर्तन लाने में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शैक्षिक परिदृश्य को परिवर्तित कर देगी जिससे युवाओं को वर्तमान व भावी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार किया जा सके।
<2> भारतीय जड़ो और गौरव से बंधे रहने में :
<3> सभी शैक्षणिक निर्णयों की आधारशिला के रूप में पूर्ण समता और समावेशन :
शोध समस्या का औचित्य :
शोध की आवश्यकता और महत्व :
शोध रणनीति :
शोध विधि :
ऐतिहासिक अनुसंधान विधि :
शोध समस्या का संभावित अध्यायीकरण :
प्रथम अध्याय
द्वितीय अध्याय
तृतीय अध्याय
चतुर्थ अध्याय
पंचम अध्याय
संदर्भ सूची :
22/02/23
13/02/23
साइमन कमीशन
11/02/23
06/02/23
तना वाली फसल जड़ वाली फसल बीज वाली फसल अखियां वाली फसल
फल- आम, केला, संतरा
बीज- गेहूं ,चावल ,मक्का
जड़ -गाजर, चुकंदर मूली पत्तियां -सरसों ,पालक ,मेथी तना -गन्ना, प्याज ,आलू
भारत के पर्वत ,
🔵भारत के पर्वत ,पहाड़ियाँ व राज्य🔵
👉कराकोरम, कैलाश श्रेणी – भारत एवं चीन
👉लद्धाख श्रेणी – भारत (जम्मू कश्मीर)
👉जास्कर श्रेणी – जम्मू कश्मीर
👉पीरपंजाल श्रेणी – जम्मू कश्मीर
👉नगा पर्वत (8126) – जम्मू कश्मीर
👉कामेत पर्वत (7756) – उत्तरांचल
👉नदा देवी (7817) – उत्तरांचल
👉धौलागिरि (8172) – हिमाचल प्रदेश
👉गरू शिखर (1722) – राजस्थान
👉मांउट एवरेस्ट (8848) – नेपाल
👉खासी,जयंतिया,गारो पहाडियां - असम-मेघालय
👉नागा पहाड़ी – नागालैण्ड
👉अरावली श्रेणी – गुजरात, राजस्थान,दिल्ली
👉माउंटआबू (1722) – राजस्थान
👉विन्ध्याचल श्रेणी – मध्य प्रदेश
👉सतपुड़ा पहाड़ी – मध्य प्रदेश
👉मकाल पहाड़ी (अमरकंटक 1036) मध्य प्रदेश
👉नीलगिरि पहाड़ी – तमिलनाडू
👉अन्नामलाई पहाड़ी (1695) – तमिलनाडू
👉छोटा नागपुर का पठार – झारखंड
👉बदेलखण्ड पठार – (म.प्र., उ.प्र
👉इलाइची पहाड़ियां – केरल, तमिलनाडू
👉गाडविन आस्टिन चोटी (के2) जम्मू-कश्मीर
👉कचनजंघा – सिक्किम
2 अंक की कुल संख्या कितनी होगी 3 अंक की संख्या कितनी होगी
2 अंक की कुल कितनी संख्या होगी
ट्रिक- 2 अंक की सबसे बड़ी संख्या -एक अंक की सबसे बड़ी संख्या
99-9=90 अतः 2 अंक की कुल संख्या 90 होगी
2- 3 अंक की कुल संख्या कितनी होगी
3 अंक की सबसे बड़ी संख्या- 2 अंक की सबसे बड़ी संख्या
999-99=900, तीन अंको की कुल संख्या 900 होगी
इसी प्रकार आप किसी भी अंक की कुल संख्या निकाल सकते है
मैसूर
मैसूर-तालीकोटा का निर्णायक युद्ध होने के बाद बिजयनगर समाज का अंत हो गया जिसके अवशेष पर जिन स्वतंत्र राज्यों का जन्म हुआ उनमें से एक मैसूर भी था वैसे तो मैसूर राज्य में बहुत से राजा हुए उनमें से हमें हैदर अली,टीपू सुल्तान को ही पढ़ना है
मैसूर राज्य द्वारा लड़े गई मुख्य युद्ध
प्रथम आंग्ल मैसूर युद्ध(1767-1769)
-यह युद्ध अंग्रेजों की आक्रमण नीत का ही परिणाम था जिसका विरोध हैदर अली ने किया हैदर अली ने मराठे तथा निजाम से संधि कर ली और अंग्रेजों को करारा जवाब दिया उस समय हैदर अली के नेतृत्व वाले मोर्चा ने अंग्रेजों के मित्र राज कर्नाटक पर आक्रमण किया परंतु 1767 ईस्वी में निजाम तथा हैदर अली तिरुवन्मनलाई संगम में पराजित हुए जिसके फलस्वरूप निजाम अंग्रेजों के साथ हो गया
हैदर अली ने मंगलौर पर आक्रमण करके मुंबई से आई कुशल सेना को पराजित कर दिया और उन्हें मध्य लास्ट तक पीछे धकेल दिया जिसके फलस्वरूप 1769 हैदर अली की शर्त पर अंग्रेजों के साथ मद्रास की संधि हुई तथा दोनों पक्षों ने एक दूसरे के जीते हुए क्षेत्र को छोड़ दिया इस तरह प्रथम आंग्ल मैसूर युद्ध की समाप्ति हुई
द्वितीय आंग्ल मैसूर युद्ध(1780-1784)-इस युद्ध की जड़ हैदर अली को माना जा सकता है क्योंकि हैदर अली ने निजाम और मराठो से अंग्रेजों के विरुद्ध संधि कर ली। 1773 में अंग्रेजों ने मैसूर में स्थित फ्रांसीसी कब्जे वाले माहे पर आक्रमण कर दिया अधिकार में ले लिया जो हैदर अली के लिए खुली चुनौती थी 1780 ईस्वी में हैदर अली ने कर्नाटक पर आक्रमण कर दिया जिससे आंग्ल मैसूर युद्ध की शुरुआत हुई। 1781 मैं हैदर अली का सामना अंग्रेज जनरल वायरकूट से हुआ जिसे वारेन हेस्टिंग द्वारा भेजा गया था इस युद्ध में हैदर अली हार गए लेकिन से कोई तात्कालिक लाभ नहीं हुआ 1782 में हैदर ने अंग्रेजों को एक बार फिर पराजित किया लेकिन युद्ध में घायल हो जाने का 7 दिसंबर 1782 को हैदर अली की मृत्यु हो गई उनके मृत्यु के बाद सारी जिम्मेदारी उनके बेटे टीपू सुल्तान पर आ गई इसमें अंग्रेजी सेना के ब्रिगेडियर मैथ्यूज को बंदी बना लिया 1784 इसवी में दोनों पक्षों के द्वारा मंगलौर की संधि हुई जिसमें दोनों पक्षों ने एक दूसरे के जीते हुए क्षेत्रों को वापस कर दिया
तृतीय आंग्ल मैसूर युद्ध (1790 -1792)-अंग्रेजों ने टीपू सुल्तान पर आरोप लगाकर इसी युद्ध की शुरुआत की अंग्रेजों ने कहां की टीपू सुल्तान ने फ्रांसीसी से अंग्रेजों के विरूद्ध गुप्त समझौता किया है और अंग्रेजों ने अपने साथ मराठों तथा निजाम को भी ले लिया और श्रीपटनम पर आक्रमण किया इसमें अंग्रेजों और टीपू सुल्तान के बीच 1792 में संधि हुई जिसे श्रीपट्टनम की संधि नाम से जानते हैं इसमें टीपू सुल्तान को बहुत नुकसान हुआ टीपू सुल्तान का आधा हिस्सा अंग्रेजों के पास और उसके सहयगियों (मराठा तथा निजाम)को देना पड़ा साथ ही हर्जाने के रूप में 3 करोड रुपए अंग्रेज को देना था और कहां गया जब तक हर्जाना नहीं मिलेगा तब तक टीपू सुल्तान की 2 पुत्र अंग्रेज के कब्जे में रहेंगे इस युद्ध के फल स्वरुप मैसूर राज्य आर्थिक रूप से बहुत कमजोर हो गया युद्ध के बाद ही कार्नवालिस ने कहा था कि हमने अपने मित्रों को ज्यादातर शक्तिशाली न बनाते हुए अपने शत्रु को कुचल दिया
चतुर्थ आंग्ल मैसूर युद्ध (1799)-यह युद्ध टीपू सुल्तान की वजह से हुआ क्योंकि टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के मुकाबले के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग लेने की दशा में प्रयास किया उसने नेपालियन को एक पत्र लिखा और उससे सहायता मांगी लेकिन वह पत्र अंग्रेजों को मिल गया अंग्रेजों ने चतुर्थ आंग्ल मैसूर युद्ध में मराठा तथा निजाम को अपने साथ शामिल करने के लिए जीते हुए भागों का तीन भाग की शर्त समझौता किया।अंग्रेजों सेना का कमान वेलेजली हैरिस तथा टीपू सुल्तान से 4 मई 1799 में युद्ध हुआ जिसमें टीपू सुल्तान बहादुर के साथ लड़ते हुए मारा गया और इस गौरवशाली अध्याय का समापन हुआ
MCQ-
प्रथम आंग्ल मैसूर युद्ध कब हुआ -
1767-1769
द्वितीय आंग्ल मैसूर युद्ध कब हुआ
1780-1784
तृतीय आंग्ल मैसूर युद्ध कब हुआ
1790-1792
चतुर्थ आंग्ल मैसूर युद्ध कब हुआ-
1799
हैदर अली मैसूर की गद्दी पर कब बैठा-
1761
टीपू सुल्तान मैसूर की गद्दी पर कब बैठा
1782
हैदर अली की मृत्यु कब हुई -
1782
टीपू सुल्तान का मकबरा कहां है
श्रीरंगपट्टनम
किन लेखकों ने टीपू को सीधा-साधा दैत्य कहा सम्राज्यवादी लेखकों
वर्ग तथा आयत
वृत्त-
वृत की परिधि-2πr
आयत
आयत का विकर्ण=√(लंबाई^2+चौड़ाई^2 )
विषमबाहु त्रिभुज
त्रिभुज की तीनों भुजाओं की लंबाई है
विषमबाहु त्रिभुज का क्षेत्रफल=√{s(s-a)(s-b)(s-c)}
समकोण त्रिभुज का परिमाप =a+b+c
समकोण त्रिभुज का क्षेत्रफल
समदिबाहु त्रिभुज का विकर्ण=√2 a
समबाहु त्रिभुज का क्षेत्रफल 1/2 आधार *ऊंचाई
घनाभ का पृष्ठीय क्षेत्रफल=2(lb+bh+hl)
तार को मोड कर वर्ग के रूप में बनाया गया है जिसका क्षेत्रफल 144 वर्ग मीटर है इसे अब आयत में बदलते हैं जिसका लंबाई 16 मीटर है तो आयत का क्षेत्रफल ज्ञात करें
वर्ग का क्षेत्रफल =भुजा^2
भुजा =√144=12
वर्ग का परिमाप=4*भुजा
=4*12=48
नोट-हम जानते हैं कि किसी भी तार को मोड़ने पर उसका परिमाप हमेशा बराबर रहता है क्या है आयत से वर्ग में बदले या वर्ग से आयत में बदलें
इसीलिए परिमाप निकाला जा रहा है
अब आयत का लंबाई=16 दिया है
आयत का परिमाप =2(लंबाई+चौड़ाई)
वर्ग का परिमाप बराबर=आयत का परिमाप
48=आयत का परिमाप
यह वैल्यू रखने पर
48=2(लंबाई+चौड़ाई)
अब लंबाई का मान रखने पर
48=2(16+चौड़ाई)
चौड़ाई=8 मीटर
आयत का क्षेत्रफल =लंबाई * चौड़ाई
16*8=128 वर्ग मीटर

