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02/04/23

 “अधिगमकर्ता के सर्वागीण विकास में” राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की उपयोगिता

प्रस्तावना -

         किसी भी देश का विकास तभी हो सकता है जब वहाँ के नागरिक का विकास होगा। प्रत्येक नागरिक का विकास उसकी शिक्षा पर निर्भर करता है। शिक्षा का प्राथमिक उद्देश्य व्यक्ति के ज्ञान और कौशल में वृद्धि करके एक अच्छा नागरिक बनाना।

“शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिसका उपयोग आप दुनिया के बदलने  के लिए कर सकते हैं”

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो हमारा देश शिक्षा की गुणवत्ता की समस्या से जूझ रहा है। इसलिए नई शिक्षा नीति 2020 अधिगमकर्ता के संपूर्ण विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

 भारत में पहले की शिक्षा नीति में बहुत समय से कोई बदलाव नहीं किया गया था जो जानकारी आपको पुराने समय में दी जाती थी वही जानकारी अभी तक चली आ रही थी। शिक्षा की गुणवत्ता की समस्या का समाधान करने के लिए ऐसी कोई नीति लाना अति आवश्यक हो गया था जो विद्यार्थी में तर्क करना, अपने अंदर की क्षमता की पहचान कर  अपने व्यक्तित्व का पूर्ण विकास कर सकें।  इस ज्वलंत समस्या को देखते हुए भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 34 साल बाद 29 जुलाई 2020 को के० कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020 ) का शुभारंभ किया गया। इस शिक्षा नीति के तहत छात्रों पर  बस्ते के बोझ को कम करके बच्चों के शारीरिक , मानसिक , नैतिक पक्ष का विकास किया जा सके। भारत के शिक्षा में परिवर्तन कई नीतियों द्वारा कई बार जैसे - 1968 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति और 1986 की नई शिक्षा नीति के द्वारा शिक्षा की संरचना और शिक्षा के स्तर में परिवर्तन लाया गया, परंतु यह परिवर्तन ज्यादा कारगर साबित नहीं हुआ। आधुनिक समय में ज्ञान व कौशल के परिदृश्य में संपूर्ण विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है जिसमें भारत जैसा विकासशील देश भी कौशल के द्वारा पूरे विश्व में एक सर्वोपरि राष्ट्र बनाने की कल्पना कर रहा है। जिसे देखते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 मील का पत्थर साबित होगा। नई शिक्षा नीति 2020 की संरचना 5+3+3+4 बच्चों के विकास में अधिक लाभप्रद होगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के द्वारा विद्यालय व उच्च शिक्षा में बच्चों के उज्जवल भविष्य के मार्ग  को प्रशस्त करने की आशा की जा रही है 

शोध समस्या का औचित्य :

किसी भी नीति की प्रभावशीलता उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में यह देखा गया कि बच्चों के सभी पक्षों के मजबूत ना होने के कारण उनको सही मार्गदर्शन ना मिलने की वजह से अधिकांश विद्यार्थी में क्रोध , कुण्ठा , आत्महीनता को पाया गया  जिसका कारण कई हो सकता है जैसे- विद्यार्थियों में मनोबल की कमी होना, निराशावादी प्रवृत्ति, लिंगापूवाग्रह   व लैंगिक भेदभाव आदि 

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मार्गदर्शी सिद्धांत

(1) भावना व प्रयोजन

(2) चरणबद्ध तरीका

(3) वरियता निर्धारण

(4) व्यापकता व समग्रता

(5) समन्वय बनाना

(6) समय की पाबंदी

(7) विश्लेषण व समीक्षा

इसके अलावा भावी कार्यक्रमों व कार्यों के लिए नींव बनाने तथा इस किस सहज प्रगति के लिए कुछ विशिष्ट क्रियाकलापों में निवेश करने से बच्चों के बढ़ रहे अवांछनीय प्रवृत्ति को कम किया जा सकता है ‌

उद्देश्य -

 <1> भारतीय जड़ो और गौरव से बंधे रहने में :

बच्चों में राष्ट्र के प्रति गौरव की भावना को विकसित करना। हमारा जो समाज है वो सांस्कृतिक विविधताओं में बटा हुआ है। बालक को भारत की संस्कृति का सम्मान करते हुए उसकी अखंडता को बनाए रखने में अग्रसर रहना चाहिए।

<2> सभी शैक्षणिक  निर्णयों की आधारशिला के रूप में पूर्ण समता और समावेशन :

सभी विद्यार्थियों के व्यक्तिगत विभिन्नता को देखते हुए सभी स्तर के विद्यार्थियों के लिए सामूहिक रूप से NEP 2020 द्वारा शिक्षा के स्तर को व्यापक किया गया है जिससे सभी के पास शिक्षा बहुत सके और विधार्थी अपने गुण और क्षमता के आधार पर अपने अंदर की कमियों को दूर कर, उनमें सुधार कर सकें।NEP 2020 के द्वारा बच्चों में सहयोग की भावना जागृत होगी। 

<3> बहु - भाषिकता और अध्ययन - अध्यापन के कार्य में भाषा की शक्ति को प्रोत्साहन -

यह सर्वविदित है कि छोटे बच्चे अपने घर की भाषा/ मातृभाषा के सार्थक अवधारणाओं को अधिक तेजी से सीखते हैं। बच्चों द्वारा बोली जाने वाली भाषा और शिक्षण के माध्यम के बीच यदि कोई अंतराल मौजूद हो तो उससे समाप्त किया जा सके। इसलिए कम से कम ग्रेड 5 तक की शिक्षा बच्चों के मातृभाषा के रूप में दी जाए।

साहित्य की समीक्षा- 

संबंधित साहित्य से तात्पर्य उन सभी प्रकार के अध्ययन स्त्रोतों से है जिसमें शोधकर्ता के समस्या चयन, परिकल्पना निर्माण तथा अध्ययन की रूपरेखा बनाने में सहायता मिलती है। साहित्यिक अध्यनकर्ता के लिए शोध संबंधित आवश्यक वैज्ञानिक पृष्ठभूमि तैयार करना है साथ ही अध्ययन क्षेत्र में हुए शोध कार्यों का विवरण भी मिल जाता है। जिस से संबंधित अध्ययन की पुनरावृति भी नहीं हो पाती।

यह अध्ययन एक ऐतिहासिक और विश्लेषणात्मक अध्ययन है। इसमें पुस्तकालय विधि द्वारा फील्ड टिप्स साक्षात्कार और प्रश्नावली अनुसंधान तकनीक का प्रयोग किया गया है। इसमें बालकों में पढ़ाई के दौरान आने वाली समस्त समस्याओं के ऊपर काम करने की योजना बनाई गई है। जिससे छात्रों में कला, रचनात्मकता, तार्किक सोच आदि के विकास को देखा जाए।



शोध की आवश्यकता और महत्व :

जब से शिक्षा की शुरुआत हुई है और वर्तमान में शिक्षा को देखा जाए तो समय-समय पर शिक्षाविदों द्वारा, सरकारों द्वारा शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए कई सारी योजनाएं और अभियान लाया गया जैसे- सर्व शिक्षा अभियान, ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड, समग्र शिक्षा अभियान, निपुण भारत आदि अभियान चलाया गया ताकि बच्चों का विकास हो सके।

विगत वर्षों में कई सर्वे द्वारा यह पता लगा कि भारत की विभिन्न स्कूलों में शिक्षा का स्तर न हीं बढ़ रहा है और ना ही नामांकन संख्या में। मुख्यता यह पाया गया कि प्रत्येक बच्चे अपने उद्देश्य, क्षमता, योग्यता की पहचान ही नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें सही निर्देशन ही नहीं मिल पाता और वह पढ़ाई के क्षेत्र में पीछे रह जाते हैं और व्यस्क अधिक डिग्री प्राप्त करने के बाद भी नौकरी के लिए इधर-उधर भटकते रहते हैं इन्हीं कारणों की वजह से बच्चों को सभी पक्षों में मजबूत करने के लिए शोध की आवश्यकता पड़ी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उपयोग द्वारा शिक्षा में समावेशन, गुणवत्ता शिक्षा को केवल विद्यालय तक ही सीमित ना रखना बल्कि इसको विद्यालय के बाहर से भी जोड़ना, इसकी प्रमुख विशेषता है। आधुनिक समय में टेक्नोलॉजी का प्रयोग बहुतायत की संख्या में किया जा रहा है जिससे विद्यार्थियों में भटकने, उलझने और अपराध की प्रवृत्ति बढ़ती ही जा रही है


अनुसंधान प्रविधि :

(1) सृष्टि में जो कुछ है उसे जानने के लिए अनेक मार्ग मनुष्य ने निकाले हैं। कोई व्यक्ति समस्त सृष्टि तत्व को बुद्धि से समझना चाहता है, कोई उसे चिंतन से पाना चाहता है और कोई उसके लिए वैज्ञानिक विश्लेषण तथा प्रयोग की पद्धति अपनाता है।

(2) कोई भी शोधार्थी किसी भी समस्या का हल निकालने के लिए ऐसी अनुसंधान प्रविधि का प्रयोग करता है, जो समस्या के समुचित स्तर पर उपलब्ध हो सके, मितव्ययी व विश्वसनीय, वस्तुनिष्ठ एवं वैध परिणामों की प्राप्ति कर सकें।

(3) हम अपनी समस्या का हल निकालने के लिए सर्वेक्षण अनुसंधान का प्रयोग करेंगे । जिसके माध्यम से हम अपने आसपास के स्कूलों में जाकर विभिन्न विद्यार्थियों की मासिक स्तर, रुचि, तर्क करने की क्षमता के विकास के बारे में अध्ययन अध्यापन करेंगे। सर्वेक्षण अनुसंधान करते समय अयादृच्छिक प्रतिदर्श का प्रयोग करेंगे।

(4) जैसे-जैसे जमाना बदल रहा है वैसे - वैसे शिक्षा के स्तर के बदलने के साथ-साथ बच्चों में परिपक्वता के स्तर में भी बदलाव देखा गया है। यहां पर हम कई ग्रन्थों, रिसर्च पेपर, समाचार पत्रों, पुस्तकों का प्रयोग करके ऐतिहासिक अनुसंधान विधि का प्रयोग करते हुए विगत छात्रों के संपूर्ण पक्ष के विकास तथा आज के छात्रों के छात्रों में क्या परिवर्तन आ रहा है इसका अध्ययन करेंगे।

(5) अनुसंधान के अवलोकन विधि का प्रयोग करते हुए हमें विभिन्न विद्यालय के बच्चों की कमियां, रुचियांँ, वाद विवाद में खुलकर आगे बढ़कर बोलने की लालसा आदि का प्रत्यक्ष रूप से अवलोकन करेंगे।

संदर्भ सूची :

(1) शिक्षक चुनौती (नीति सम्बन्धी परिप्रेक्ष्य) - नई दिल्ली शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार

(2) नई शिक्षा नीति ( विशेषांक) - आगरा विनोद पुस्तक मंदिर

(3) डॉक्टर मालती सारस्वत - भारतीय शिक्षा विकास और उसकी समस्याएं

(4) बी० बी० अग्रवाल - आधुनिक भारत शिक्षा और समस्याएँ आलोक प्रकाशन लखनऊ (इलाहाबाद)

( 5 ) विजय शुक्ल - भारतीय शिक्षा और उसकी समस्याओं का अध्ययन (सहारा पब्लिकेशन, प्रयागराज)

(6)  इंटरनेट 

( 7) पत्र पत्रिकाएंँ 

 (8) विजय शुक्ल - भारतीय शिक्षा उसकी समस्याओं का अध्ययन सहारा पब्लिकेशन इलाहाबाद।

(9)  डॉ०  कर्ण  सिंह - भारत में शिक्षा पुरानी का विकास गोविंद प्रकाश लखीमपुर खीरी।

(10) बिहारी लाल रमन - शिक्षा सिद्धांत, रस्तोगी पब्लिकेशन

(11) डॉ० डी ० डी० मिश्र - भारत में शैक्षिक प्रणाली का विकास  मित्रा पब्लिकेशन, कानपुर

01/04/23

NEP 2020 : एक उम्मीद “अधिगमकर्ता के सम्पूर्ण विकास में

 NEP 2020 : एक उम्मीद “अधिगमकर्ता के सम्पूर्ण विकास में ”

शीर्षक - किसी भी देश का विकास तभी हो सकता है जब वहाँ के नागरिकता का विकास होगा। प्रत्येक नागरिक का विकास उसकी शिक्षा पर निर्भर करता है। शिक्षा का प्राथमिक उद्देश्य व्यक्ति के ज्ञान और कौशल में वृद्धि करके एक अच्छा नागरिक बनाना।

“शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिसका उपयोग आप दुनिया के बदलने  के लिए कर सकते हैं”

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो हमारा देश शिक्षा की गुणवत्ता की समस्या से जूझ रहा है। इसलिए नई शिक्षा नीति 2020 अधिगमकर्ता के संपूर्ण विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

हमारी समाज की सांस्कृतिक विविधता है उसका हमे सम्मान करते हुए नई शिक्षा नीति का उपयोग करना चाहिए

प्रस्तावना - भारत में पहले की शिक्षा नीति में बहुत समय से कोई बदलाव नहीं किया गया था जो जानकारी आपको पुराने समय में दी जाती थी वही जानकारी अभी तक चली आ रही है। भारत को विकासशील देश से विकसित देश में परिवर्तन के लिए नई शिक्षा नीति लाना बहुत जरूरी था इस ज्वलंत समस्या को देखते हुए भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 34 साल बाद 29 जुलाई 2020 को के० कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020 ) का शुभारंभ किया गया। इस शिक्षा नीति के तहत छात्रों पर शिक्षा के बोझ को कम करके बच्चों के शारीरिक पक्ष, मानसिक पक्ष, नैतिक पक्ष का विकास किया जा सके। भारत के शिक्षा में परिवर्तन कई नीतियों द्वारा कई बार जैसे 1968 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति और 1986 की नई शिक्षा नीति के द्वारा शिक्षा की संरचना और शिक्षा के स्तर में परिवर्तन लाया जाए। परंतु यह परिवर्तन ज्यादा कारगर साबित नहीं हुआ। आधुनिक समय में ज्ञान व कौशल के परिदृश्य में संपूर्ण विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है जिसे देखते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 मील का पत्थर साबित होगा। नई शिक्षा नीति 2020 की संरचना 5+3+3+4 बच्चों के विकास में अधिक लाभप्रद होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के द्वारा विद्यालय व उच्च शिक्षा में बच्चों के उज्जवल भविष्य के मार्ग  को प्रशस्त करने की आशा की जा रही है

उद्देश्य -

<1‌> विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास में NEP 2020 की उपयोगिता :

यह कहने में कोई शक नहीं है कि भारत देश में शिक्षा का स्तर और विद्यार्थी की स्थिति का क्या हाल है फिर भी देश की शिक्षा में बदलाव लाने और उसकी स्थिति को बेहतर बनाने का प्रयास निरंतर किया जा रहा है। विद्यार्थी का जीवन को बदलने और उसके शिक्षा में परिवर्तन लाने में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शैक्षिक परिदृश्य को परिवर्तित कर देगी जिससे  युवाओं को वर्तमान व  भावी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार किया जा सके।

<2‌> भारतीय जड़ो और गौरव से बंधे रहने में :

बच्चों में राष्ट्र के प्रति गौरव की भावना को विकसित करना। हमारा जो समाज है वो सांस्कृतिक विविधताओं में बटा हुआ है। बालक को भारत की संस्कृति का सम्मान करते हुए उसकी अखंडता को बनाए रखने में अग्रसर रहे।

<3> सभी शैक्षणिक  निर्णयों की आधारशिला के रूप में पूर्ण समता और समावेशन :

सभी विद्यार्थियों के व्यक्तिगत विभिन्नता को देखते हुए सभी स्तर के विद्यार्थियों के लिए सामूहिक रूप से NEP 2020 द्वारा शिक्षा के स्तर को व्यापक किया गया है जिससे सभी के पास शिक्षा बहुत सके और विधार्थी अपने गुण और क्षमता के आधार पर अपने अंदर की कमियों को दूर कर उनमें सुधार कर सकें।NEP 2020 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति से बच्चों की पढ़ाई की शुरुआत 3 साल से हो जाएगी क्योंकि शिक्षा के ढांचे में परिवर्तन करके शिक्षा की संरचना 5+3+3+4 किया गया है

शोध समस्या का औचित्य :

किसी भी नीति की प्रभावशीलता उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में या देखा गया कि बच्चों के सभी पक्षों के मजबूत ना होने के कारण उसको सही मार्गदर्शन ना मिलने की वजह से अधिकांश विद्यार्थी आत्महत्या करने की कोशिश कर ली जिसका कारण कई हो सकता है नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मार्गदर्शी सिद्धांत
(1) भावना व प्रयोजन
(2) चरणबद्ध तरीका
(3) वरियता निर्धारण
(4) व्यापकता व समग्रता
(5) समन्वय बनाना
(6) समय की पाबंदी
(7) विश्लेषण व समीक्षा
इसके अलावा भावी कार्यक्रमों व कार्यों के लिए नींव बनाने तथा इस किस सहज प्रगति के लिए कुछ विशिष्ट क्रियाकलापों में निवेश करने से बच्चों के बढ़ रहे अवांछनीय प्रवृत्ति को कम किया जा सकता है ‌

शोध की आवश्यकता और महत्व :

जब से शिक्षा की शुरुआत हुई है और वर्तमान में शिक्षा को देखा जाए तो समय-समय पर शिक्षाविदों द्वारा, सरकारों द्वारा शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए कई सारी योजनाएं और अभियान लाया गया जैसे- सर्व शिक्षा अभियान, ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड, समग्र शिक्षा अभियान, निपुण भारत आदि अभियान चलाया गया ताकि बच्चों का विकास हो सके।
विगत वर्षों में कई सर्वे द्वारा यह पता लगा कि भारत की विभिन्न स्कूलों में शिक्षा का स्तर न हीं बढ़ रहा है और ना ही नामांकन संख्या में। मुख्यता यह पाया गया कि प्रत्येक बच्चे अपने उद्देश्य, क्षमता, योग्यता की पहचान ही नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें सही निर्देशन ही नहीं मिल पाता और वह पढ़ाई के क्षेत्र में पीछे रह जाते हैं और व्यस्क अधिक डिग्री प्राप्त करने के बाद भी नौकरी के लिए इधर-उधर भटकते रहते हैं इन्हीं कारणों की वजह से बच्चों को सभी पक्षों में मजबूत करने के लिए शोध की आवश्यकता पड़ी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उपयोग द्वारा शिक्षा में समावेशन, गुणवत्ता शिक्षा को केवल विद्यालय तक ही सीमित ना रखना बल्कि इसको विद्यालय के बाहर से भी जोड़ना, इसकी प्रमुख विशेषता है। आधुनिक समय में टेक्नोलॉजी का प्रयोग बहुतायत की संख्या में किया जा रहा है जिससे विद्यार्थियों में भटकने, उलझने और अपराध की प्रवृत्ति बढ़ती ही जा रही है

शोध रणनीति :

यह अध्ययन एक ऐतिहासिक और विश्लेषणात्मक अध्ययन है। इसमें सर्व अनुसंधान ,अवलोकन अनुसंधान ,प्रयोगात्मक अनुसंधान और केस अनुसंधान का प्रयोग किया जाएगा।

शोध विधि :

जिस प्रकार एक मैकेनिक को इंजन या मशीन ठीक करने के लिए अपने यंत्र या बॉक्स में से एक उपयुक्त यंत्र की खोज करनी होती है ठीक उसी प्रकार अनुसंधान के अंतर्गत एक समस्या के समाधान हेतु अनुसंधान कर्ता को ऐसे वैज्ञानिक उपकरण या वैज्ञानिक प्रक्रिया का चयन करना पड़ता है इस प्रक्रिया को शोध विधि कहते हैं। जिसके आधार पर निम्न मौलिक आवश्यकताओं की पूर्ति संभव हो सके
<1> समस्या का समुचित उत्तर उपलब्ध हो सके।
<2> विश्वसनीय, वस्तुनिष्ठ एवं वैध परिणामों की प्राप्ति हो।
< 3 > मितव्ययी हो

कोई भी समस्या जब शोधार्थी चुन लेता है तो उसे अपने अध्ययन की सत्यता की क्षमता व प्रमाणिकता के लिए एक निश्चित प्रक्रिया के अनुरूप कार्य करना पड़ता है। यह विधि ऐसी होनी चाहिए जो समस्या से संबंधित शंकाओं का समाधान कर सके। साथ ही सभी सभी मनुष्य एक ही निष्कर्ष पर पहुंच सके।
प्रस्तुत अध्ययन में अनेक विधियों का सर्वेक्षण करने के पश्चात मैंने ऐतिहासिक विधि का अनुसरण किया है। अध्ययन के लिए कई  ग्रन्थों, पुस्तकों , समाचार पत्रों, रिसर्च पेपर का प्रयोग किया गया है।

ऐतिहासिक अनुसंधान विधि :

एक समाज की वर्तमान संस्थाओं, समस्याओं व विचारधाराओं की विशिष्ट स्वरूप को ज्ञात करने के लिए उसके ऐतिहासिक अनुसंधानों की आवश्यकता होती है। अतीत में घटित घटनाओं की विधिवत ढंग से जानकारी नि:संदेह  वर्तमान तथा भविष्य का उन्नयन करने में सहयोग देती है। इसलिए इतिहास का सम्यक अध्ययन तथा ऐतिहासिक घटनाओं की खोज करने के लिए ऐतिहासिक अनुसंधान कार्य संपादित किए जाते हैं।
ऐतिहासिक अनुसंधान वस्तुत: अतीत की घटनाओं से जुड़े तथ्यों व उनकी प्रासंगिकता को स्थापित करते हैं। यह किसी व्यक्ति विचार, आंदोलन, संस्था या समय विशेष पर केंद्रित हो सकते हैं।

शोध समस्या का संभावित अध्यायीकरण : 

प्रथम अध्याय

प्रस्तावना

द्वितीय अध्याय

साहित्य का सर्वेक्षण

तृतीय अध्याय

नई शिक्षा नीति 2020 का क्रियान्वयन अध्ययन

चतुर्थ अध्याय

नई शिक्षा नीति 2020 के गुण एवं दोष का अध्ययन

पंचम अध्याय

निष्कर्ष एवं सुझाव

संदर्भ सूची :

< 1 > शिक्षक चुनौती (नीति सम्बन्धी परिप्रेक्ष्य) - नई दिल्ली शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार
<2> नई शिक्षा नीति ( विशेषांक) - आगरा विनोद पुस्तक मंदिर
< 3> डॉक्टर मालती सारस्वत - भारतीय शिक्षा विकास और उसकी समस्याएं
<4> बी० बी० अग्रवाल - आधुनिक भारत शिक्षा और समस्याएँ आलोक प्रकाशन लखनऊ (इलाहाबाद)
< 5 > विजय शुक्ल - भारतीय शिक्षा और उसकी समस्याओं का अध्ययन (सहारा पब्लिकेशन, प्रयागराज)
<6>  इंटरनेट 
< 7> पत्र पत्रिकाएंँ

13/02/23

साइमन कमीशन

भारत सरकार अधिनियम 1919 की समीक्षा के लिए वर्ष 1927 में ब्रिटिश सरकार द्वारा साइमन कमीशन का गठन किया गया था इस आयोग के सभी सदस्य अंग्रेज थे इसी कारण इसे स्वत कमीशन भी कहा जाता है इस आयोग में किसी भी भारतीय को शामिल नहीं किया गया था इसी कारण इसका बाद में बहुत विरोध हुआ था साइमन कमीशन 3 फरवरी 1928 को मुंबई पहुंचा था । लाला लाजपत राय इस कमीशन का विरोध करते हुए लाठी चार्ज होने के कारण घायल हो गए जिससे उनका स्वर्गवास हो गया

06/02/23

तना वाली फसल जड़ वाली फसल बीज वाली फसल अखियां वाली फसल

 

फल- आम, केला, संतरा 

बीज- गेहूं ,चावल ,मक्का

 जड़ -गाजर, चुकंदर मूली पत्तियां -सरसों ,पालक ,मेथी तना -गन्ना, प्याज ,आलू 

भारत के पर्वत ,

 🔵भारत के  पर्वत ,पहाड़ियाँ व राज्य🔵


👉कराकोरम, कैलाश श्रेणी – भारत एवं चीन


👉लद्धाख श्रेणी – भारत (जम्मू कश्मीर)


👉जास्कर श्रेणी – जम्मू कश्मीर


👉पीरपंजाल श्रेणी – जम्मू कश्मीर


👉नगा पर्वत (8126) – जम्मू कश्मीर


👉कामेत पर्वत (7756) – उत्तरांचल


👉नदा देवी (7817) – उत्तरांचल


👉धौलागिरि (8172) – हिमाचल प्रदेश


👉गरू शिखर (1722) – राजस्थान


👉मांउट एवरेस्ट (8848) – नेपाल


👉खासी,जयंतिया,गारो पहाडियां - असम-मेघालय


👉नागा पहाड़ी – नागालैण्ड


👉अरावली श्रेणी – गुजरात, राजस्थान,दिल्ली


👉माउंटआबू (1722) – राजस्थान


👉विन्ध्याचल श्रेणी – मध्य प्रदेश


👉सतपुड़ा पहाड़ी – मध्य प्रदेश


👉मकाल पहाड़ी (अमरकंटक 1036) मध्य प्रदेश


👉नीलगिरि पहाड़ी – तमिलनाडू


👉अन्नामलाई पहाड़ी (1695) – तमिलनाडू


👉छोटा नागपुर का पठार – झारखंड


👉बदेलखण्ड पठार –  (म.प्र., उ.प्र


👉इलाइची पहाड़ियां – केरल, तमिलनाडू


👉गाडविन आस्टिन चोटी (के2) जम्मू-कश्मीर


👉कचनजंघा – सिक्किम



2 अंक की कुल संख्या कितनी होगी 3 अंक की संख्या कितनी होगी


2 अंक की कुल कितनी संख्या होगी

ट्रिक- 2 अंक की सबसे बड़ी संख्या -एक अंक की सबसे बड़ी संख्या

99-9=90 अतः 2 अंक की कुल संख्या 90 होगी

2- 3 अंक की कुल संख्या कितनी होगी

3 अंक की सबसे बड़ी संख्या- 2 अंक की सबसे बड़ी संख्या

999-99=900, तीन अंको की कुल संख्या 900 होगी


इसी प्रकार आप किसी भी अंक की कुल संख्या निकाल सकते है


 

मैसूर

 मैसूर-तालीकोटा का निर्णायक युद्ध होने के बाद बिजयनगर समाज का अंत हो गया जिसके अवशेष पर जिन स्वतंत्र राज्यों का जन्म हुआ उनमें से एक मैसूर भी था वैसे तो मैसूर राज्य में  बहुत से राजा हुए उनमें से हमें हैदर अली,टीपू सुल्तान को ही पढ़ना है


मैसूर राज्य द्वारा लड़े गई मुख्य युद्ध

प्रथम आंग्ल मैसूर युद्ध(1767-1769)

-यह युद्ध अंग्रेजों की आक्रमण नीत का ही परिणाम था जिसका विरोध हैदर अली ने किया हैदर अली ने मराठे तथा निजाम से संधि कर ली और अंग्रेजों को करारा जवाब दिया उस समय हैदर अली के नेतृत्व वाले मोर्चा ने अंग्रेजों के मित्र राज कर्नाटक पर आक्रमण किया परंतु 1767 ईस्वी में निजाम तथा हैदर अली तिरुवन्मनलाई संगम में पराजित हुए जिसके फलस्वरूप निजाम अंग्रेजों के साथ हो गया

 हैदर अली ने मंगलौर पर आक्रमण करके मुंबई से आई कुशल सेना को पराजित कर दिया और उन्हें मध्य लास्ट तक पीछे धकेल दिया जिसके फलस्वरूप 1769 हैदर अली की शर्त पर अंग्रेजों के साथ मद्रास की संधि हुई तथा दोनों पक्षों ने एक दूसरे के जीते हुए क्षेत्र को छोड़ दिया इस तरह प्रथम आंग्ल मैसूर युद्ध की समाप्ति हुई


द्वितीय आंग्ल मैसूर युद्ध(1780-1784)-इस युद्ध की जड़ हैदर अली को माना जा सकता है क्योंकि हैदर अली ने निजाम और मराठो से अंग्रेजों के विरुद्ध संधि कर ली। 1773 में अंग्रेजों ने मैसूर में स्थित फ्रांसीसी कब्जे वाले माहे पर आक्रमण कर दिया अधिकार में ले लिया जो हैदर अली के लिए खुली चुनौती थी 1780 ईस्वी में हैदर अली ने कर्नाटक पर आक्रमण कर दिया जिससे आंग्ल मैसूर युद्ध की शुरुआत हुई। 1781 मैं हैदर अली का सामना अंग्रेज जनरल वायरकूट से हुआ जिसे वारेन हेस्टिंग द्वारा भेजा गया था इस युद्ध में हैदर अली हार गए लेकिन से कोई तात्कालिक लाभ नहीं हुआ 1782 में हैदर ने अंग्रेजों को एक बार फिर पराजित किया लेकिन युद्ध में घायल हो जाने का 7 दिसंबर 1782 को हैदर अली की मृत्यु हो गई उनके मृत्यु के बाद सारी जिम्मेदारी उनके बेटे टीपू सुल्तान पर आ गई इसमें अंग्रेजी सेना के ब्रिगेडियर मैथ्यूज को बंदी बना लिया 1784 इसवी में दोनों पक्षों के द्वारा मंगलौर की संधि हुई जिसमें दोनों पक्षों ने एक दूसरे के जीते हुए क्षेत्रों को वापस  कर दिया


तृतीय आंग्ल मैसूर युद्ध (1790 -1792)-अंग्रेजों ने टीपू सुल्तान पर आरोप लगाकर इसी युद्ध की शुरुआत की अंग्रेजों ने कहां की टीपू सुल्तान ने फ्रांसीसी से अंग्रेजों के विरूद्ध गुप्त समझौता किया है और अंग्रेजों ने अपने साथ मराठों तथा निजाम को भी ले लिया और  श्रीपटनम पर आक्रमण किया इसमें अंग्रेजों और टीपू सुल्तान के बीच 1792 में संधि हुई जिसे श्रीपट्टनम की संधि नाम से जानते हैं इसमें टीपू सुल्तान को बहुत नुकसान हुआ टीपू सुल्तान का आधा हिस्सा अंग्रेजों के पास और उसके सहयगियों (मराठा तथा निजाम)को देना पड़ा साथ ही हर्जाने के रूप में 3 करोड रुपए अंग्रेज को देना था और कहां गया जब तक हर्जाना नहीं मिलेगा तब तक टीपू सुल्तान की 2 पुत्र अंग्रेज के कब्जे में रहेंगे इस युद्ध के फल स्वरुप मैसूर राज्य आर्थिक रूप से बहुत कमजोर हो गया युद्ध के बाद ही कार्नवालिस ने कहा था कि हमने अपने मित्रों को ज्यादातर शक्तिशाली न बनाते हुए अपने शत्रु को कुचल दिया


चतुर्थ आंग्ल मैसूर युद्ध (1799)-यह युद्ध टीपू सुल्तान की वजह से हुआ क्योंकि टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के मुकाबले के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग लेने की दशा में प्रयास किया उसने नेपालियन को एक पत्र लिखा और उससे सहायता मांगी लेकिन वह पत्र अंग्रेजों को मिल गया अंग्रेजों ने चतुर्थ आंग्ल मैसूर युद्ध में मराठा तथा निजाम को अपने साथ शामिल करने के लिए जीते हुए भागों का तीन भाग की शर्त समझौता किया।अंग्रेजों सेना का कमान वेलेजली हैरिस तथा टीपू सुल्तान से 4 मई 1799 में युद्ध हुआ जिसमें टीपू सुल्तान बहादुर के साथ लड़ते हुए मारा गया और इस गौरवशाली अध्याय का समापन हुआ

MCQ-

प्रथम आंग्ल मैसूर युद्ध कब हुआ -

1767-1769

द्वितीय आंग्ल मैसूर युद्ध कब हुआ

1780-1784

तृतीय आंग्ल मैसूर युद्ध कब हुआ

 1790-1792

चतुर्थ आंग्ल मैसूर युद्ध कब हुआ-

 1799

हैदर अली मैसूर की गद्दी पर कब बैठा-

1761

टीपू सुल्तान मैसूर की गद्दी पर कब बैठा

1782

हैदर अली की मृत्यु कब हुई -

1782

टीपू सुल्तान का मकबरा कहां है 

श्रीरंगपट्टनम

किन लेखकों ने टीपू को सीधा-साधा दैत्य कहा सम्राज्यवादी लेखकों


वर्ग तथा आयत

वृत्त-

वृत्त की सबसे लंबी जीवा व्यास  है
व्यास-2*r
r= त्रिज्या

वृत की परिधि-2πr

वृत्त का क्षेत्रफल= πr^2

आयत

आयत का क्षेत्रफल=लंबाई * चौड़ाई
आयत का परिमाप=2(लंबाई+  चौड़ाई)

आयत का विकर्ण=√(लंबाई^2+चौड़ाई^2 )

वर्ग
वर्ग का क्षेत्रफल=भुजा ^2
वर्ग का परिमाप=4*भुजा
वर्ग का विकर्ण=√2* भुजा

विषमबाहु त्रिभुज

विषमबाहु त्रिभुज का परिमाप =a+b+c
a,b,c=

  त्रिभुज की  तीनों भुजाओं की लंबाई है

अर्ध परिमाप s={a+b+c}/2

 विषमबाहु त्रिभुज का क्षेत्रफल=√{s(s-a)(s-b)(s-c)}

समकोण त्रिभुज का परिमाप =a+b+c

a,b,c=
  त्रिभुज की तीनों भुजाओं की लंबाई है


समकोण त्रिभुज का क्षेत्रफल

1/2*आधार*ऊंचाई
पाइथागोरस प्रमेय=
लंबाई ^ 2+आधार ^2=कण^2
समद्विबाहु त्रिभुज
समदिबाहु त्रिभुज का परिमाप=2a+b
समद्वबाहु त्रिभुज का क्षेत्रफल=1/2 समान लंबाई की भुजा^2

समदिबाहु त्रिभुज का विकर्ण=√2 a

समबाहु त्रिभुज
 त्रिभुज का परिमाप=3*एक भुजा की लंबाई

समबाहु त्रिभुज का क्षेत्रफल 1/2 आधार *ऊंचाई

घन
घन का आयतन-a^3

घन के विकर्ण की लंबाई-√3a
घन का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल=6a^2
घन का पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल 4a^2
घन मैं फलकों की संख्या-6
घनाभ
l-लंबाई
b-चौड़ाई
h-ऊंचाई
घनाभ का आयतन=लंबाई * चौड़ाई * ऊंचाई
घनाभ का विकर्ण=√{l^2+b^2+h^2}

घनाभ का पृष्ठीय क्षेत्रफल=2(lb+bh+hl)

तार को मोड कर वर्ग के रूप में बनाया गया है जिसका क्षेत्रफल 144 वर्ग मीटर है इसे अब आयत में बदलते हैं जिसका लंबाई 16 मीटर है तो आयत का क्षेत्रफल ज्ञात करें

वर्ग का क्षेत्रफल =भुजा^2

भुजा =√144=12

वर्ग का परिमाप=4*भुजा

=4*12=48

नोट-हम जानते हैं कि किसी भी तार को मोड़ने पर उसका परिमाप हमेशा बराबर रहता है क्या है आयत से वर्ग में बदले  या वर्ग से आयत में बदलें 

इसीलिए परिमाप निकाला जा रहा है

अब आयत का लंबाई=16 दिया है

आयत का परिमाप =2(लंबाई+चौड़ाई)

वर्ग का परिमाप बराबर=आयत का परिमाप

48=आयत का परिमाप

यह वैल्यू रखने पर

48=2(लंबाई+चौड़ाई)

अब लंबाई का मान रखने पर

48=2(16+चौड़ाई)

चौड़ाई=8 मीटर

आयत का क्षेत्रफल =लंबाई * चौड़ाई

16*8=128 वर्ग मीटर


पर्यावरण संरक्षण अधिनियम

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम

सन्-1986

तत्कालिक कारण- 2- 3 दिसंबर 1984 को भोपाल गैस त्रासदी की घटना

गैस-मिथाइल आइसोसायनाइड 

कंपनी-यूनियन कार्बाइड

कंपनी क्या बनाती थी-कीटनाशक दवा 

भारत रत्न


 भारत रत्न-भारत रत्न की शुरुआत 2 जनवरी 1954 को देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद के द्वारा शुरू किया गया यह पुरस्कार साहित्य, विज्ञान, सामाजिक सेवा और खेल के क्षेत्र में असाधारण कार्य करने वाले को दिया जाता है। 1 वर्ष में अधिकतम 3 लोगों को यह पुरस्कार दिया जा सकता है यह पुरस्कार पहली बार डॉक्टर राधाकृष्णन, सी आर राजगोपालाचारी, ओ सी वी रमन को दिया गया

नोट-अगर ऑप्शन में तीनों का नाम दीया हो तो राधा-कृष्णन पहले व्यक्ति होंगे जिसे भारतरत्न में दिया गया है

1955 तक यह पुरस्कार उन्हीं व्यक्ति को दिया जाता था जो व्यक्ति जिंदा हो लेकिन 1955 के बाद यह पुरस्कार मरणोपरांत भी दिया जाने लगा इस पुरस्कार में एक प्रमाण पत्र तथा एक पदक दिया जाता है धनराशि के रूप में कुछ नहीं। 2013 में खेल जगत में भारत रत्न पाने वाले पहले खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर हैं। भारत रत्न पाने वाली पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थी। अभी तक 48 लोगों को भारत रत्न दिया जा चुका है। 2019 में  भारत रत्न पाने वाले तीन व्यक्ति थे भूपेन हजारिका प्रणब मुखर्जी नानाजी देशमुख। 2019 के बाद भारत रत्न अभी तक किसी को  नहीं दिया गया है


राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020- 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 , राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1968 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 के बाद स्वतंत्र भारत की तीसरी शिक्षा नीति है। यह शिक्षा नीति भारत की शिक्षा नियत है जिसे 29 जुलाई 2020 को घोषित किया गया यह नीत अंतरिक्ष वैज्ञानिक कस्तूरीरंगन के अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट पर आधारित है इस नीत के अंतर्गत मानव संसाधन संसाधन मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय का दिया गया। सन 1985 में राजीव गांधी ने शिक्षा मंत्रालय का नाम बदलकर मानव संसाधन मंत्रालय कर दिया था राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत केंद्र तथा राज्य का सहयोग से शिक्षा क्षेत्र पर देश के जीडीपी का 6% हिस्से के बराबर निवेश का लक्ष्य रखा गया है। 10+2 शैक्षिक मॉडल के स्थान पर अब शैक्षिक पाठ्यक्रम 5+3+3+4 शिक्षा प्रणाली के आधार पर विभाजित करने की बात कही गई है। नए शिक्षा नीत का मुख्य उद्देश्य शिक्षा और सीखने पर पुनः ध्यान आकर्षित करना है। नई शिक्षा नीति में कक्षा 5 तक मातृभाषा, स्थानीय भाषा या क्षेत्रीय भाषा के रूप में शिक्षा पर बल दिया गया है। 5+3+3+4मे 5 मैं 5 का अर्थ है 5 वर्ष अर्थात 3 वर्ष से 8 वर्ष तक की आयु के बच्चे 3 से 8 वर्ष के बच्चे को पढ़ाने के लिए पाठ्यक्रम को दो समूह में बांटा जाएगा जिसमें 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए आंगनवाड़ी बाल वाटिका, प्री स्कूल के माध्यम से मुफ्त सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा दी जाएगी जबकि 6 से 8 वर्ष के बच्चे को कक्षा 1 तथा कक्षा 2 में शिक्षा दी जाएगी
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार सकल नामांकन अनुपात को 2030 तक 100% लाने का अनुपात रखा गया है भारत के शिक्षा मंत्री के पहले शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल है। पहली बार शिक्षा नीति 1968 इंदिरा गांधी के शासनकाल में आया था। 1992 में दूसरी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 में कुछ संशोधन किया गया था। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में दो करोड़ बच्चों को जो शिक्षा से दूर रहे हैं उन्हें मुख्यधारा में शामिल किया जाएगा एमफिल की समाप्त कर दी गई है।

 गुलाबी शहर (pink City) - जयपुर

नीला शहर (Blue City)- जोधपुर

सुनहरा शहर (golden City) - जैसलमेर

लाल शहर (red city) -  बीकानेर

श्वेत शहर(white City)-उदयपुर