06/02/23

मैसूर

 मैसूर-तालीकोटा का निर्णायक युद्ध होने के बाद बिजयनगर समाज का अंत हो गया जिसके अवशेष पर जिन स्वतंत्र राज्यों का जन्म हुआ उनमें से एक मैसूर भी था वैसे तो मैसूर राज्य में  बहुत से राजा हुए उनमें से हमें हैदर अली,टीपू सुल्तान को ही पढ़ना है


मैसूर राज्य द्वारा लड़े गई मुख्य युद्ध

प्रथम आंग्ल मैसूर युद्ध(1767-1769)

-यह युद्ध अंग्रेजों की आक्रमण नीत का ही परिणाम था जिसका विरोध हैदर अली ने किया हैदर अली ने मराठे तथा निजाम से संधि कर ली और अंग्रेजों को करारा जवाब दिया उस समय हैदर अली के नेतृत्व वाले मोर्चा ने अंग्रेजों के मित्र राज कर्नाटक पर आक्रमण किया परंतु 1767 ईस्वी में निजाम तथा हैदर अली तिरुवन्मनलाई संगम में पराजित हुए जिसके फलस्वरूप निजाम अंग्रेजों के साथ हो गया

 हैदर अली ने मंगलौर पर आक्रमण करके मुंबई से आई कुशल सेना को पराजित कर दिया और उन्हें मध्य लास्ट तक पीछे धकेल दिया जिसके फलस्वरूप 1769 हैदर अली की शर्त पर अंग्रेजों के साथ मद्रास की संधि हुई तथा दोनों पक्षों ने एक दूसरे के जीते हुए क्षेत्र को छोड़ दिया इस तरह प्रथम आंग्ल मैसूर युद्ध की समाप्ति हुई


द्वितीय आंग्ल मैसूर युद्ध(1780-1784)-इस युद्ध की जड़ हैदर अली को माना जा सकता है क्योंकि हैदर अली ने निजाम और मराठो से अंग्रेजों के विरुद्ध संधि कर ली। 1773 में अंग्रेजों ने मैसूर में स्थित फ्रांसीसी कब्जे वाले माहे पर आक्रमण कर दिया अधिकार में ले लिया जो हैदर अली के लिए खुली चुनौती थी 1780 ईस्वी में हैदर अली ने कर्नाटक पर आक्रमण कर दिया जिससे आंग्ल मैसूर युद्ध की शुरुआत हुई। 1781 मैं हैदर अली का सामना अंग्रेज जनरल वायरकूट से हुआ जिसे वारेन हेस्टिंग द्वारा भेजा गया था इस युद्ध में हैदर अली हार गए लेकिन से कोई तात्कालिक लाभ नहीं हुआ 1782 में हैदर ने अंग्रेजों को एक बार फिर पराजित किया लेकिन युद्ध में घायल हो जाने का 7 दिसंबर 1782 को हैदर अली की मृत्यु हो गई उनके मृत्यु के बाद सारी जिम्मेदारी उनके बेटे टीपू सुल्तान पर आ गई इसमें अंग्रेजी सेना के ब्रिगेडियर मैथ्यूज को बंदी बना लिया 1784 इसवी में दोनों पक्षों के द्वारा मंगलौर की संधि हुई जिसमें दोनों पक्षों ने एक दूसरे के जीते हुए क्षेत्रों को वापस  कर दिया


तृतीय आंग्ल मैसूर युद्ध (1790 -1792)-अंग्रेजों ने टीपू सुल्तान पर आरोप लगाकर इसी युद्ध की शुरुआत की अंग्रेजों ने कहां की टीपू सुल्तान ने फ्रांसीसी से अंग्रेजों के विरूद्ध गुप्त समझौता किया है और अंग्रेजों ने अपने साथ मराठों तथा निजाम को भी ले लिया और  श्रीपटनम पर आक्रमण किया इसमें अंग्रेजों और टीपू सुल्तान के बीच 1792 में संधि हुई जिसे श्रीपट्टनम की संधि नाम से जानते हैं इसमें टीपू सुल्तान को बहुत नुकसान हुआ टीपू सुल्तान का आधा हिस्सा अंग्रेजों के पास और उसके सहयगियों (मराठा तथा निजाम)को देना पड़ा साथ ही हर्जाने के रूप में 3 करोड रुपए अंग्रेज को देना था और कहां गया जब तक हर्जाना नहीं मिलेगा तब तक टीपू सुल्तान की 2 पुत्र अंग्रेज के कब्जे में रहेंगे इस युद्ध के फल स्वरुप मैसूर राज्य आर्थिक रूप से बहुत कमजोर हो गया युद्ध के बाद ही कार्नवालिस ने कहा था कि हमने अपने मित्रों को ज्यादातर शक्तिशाली न बनाते हुए अपने शत्रु को कुचल दिया


चतुर्थ आंग्ल मैसूर युद्ध (1799)-यह युद्ध टीपू सुल्तान की वजह से हुआ क्योंकि टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के मुकाबले के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग लेने की दशा में प्रयास किया उसने नेपालियन को एक पत्र लिखा और उससे सहायता मांगी लेकिन वह पत्र अंग्रेजों को मिल गया अंग्रेजों ने चतुर्थ आंग्ल मैसूर युद्ध में मराठा तथा निजाम को अपने साथ शामिल करने के लिए जीते हुए भागों का तीन भाग की शर्त समझौता किया।अंग्रेजों सेना का कमान वेलेजली हैरिस तथा टीपू सुल्तान से 4 मई 1799 में युद्ध हुआ जिसमें टीपू सुल्तान बहादुर के साथ लड़ते हुए मारा गया और इस गौरवशाली अध्याय का समापन हुआ

MCQ-

प्रथम आंग्ल मैसूर युद्ध कब हुआ -

1767-1769

द्वितीय आंग्ल मैसूर युद्ध कब हुआ

1780-1784

तृतीय आंग्ल मैसूर युद्ध कब हुआ

 1790-1792

चतुर्थ आंग्ल मैसूर युद्ध कब हुआ-

 1799

हैदर अली मैसूर की गद्दी पर कब बैठा-

1761

टीपू सुल्तान मैसूर की गद्दी पर कब बैठा

1782

हैदर अली की मृत्यु कब हुई -

1782

टीपू सुल्तान का मकबरा कहां है 

श्रीरंगपट्टनम

किन लेखकों ने टीपू को सीधा-साधा दैत्य कहा सम्राज्यवादी लेखकों


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