जो समस्या हुई है उसके बारे में संक्षिप्त ही सही वर्णन करते हैं
मैं शिवेंद्र सिंह दिन मंगलवार को जलालपुर 18 तारीख को पेपर देने के लिए अपने घर सराय राशि से सुबह 10:00 बजे प्रस्थान किया गर्मी बहुत ज्यादा थी जेठ माह का मंगलवार होने के कारण मेरा उपवास था और लेकिन बस 10:30 बजे मिली बस में बैठने के बाद हवा का झोंका लू की तरह लग रहा था केंद्र पर 12:00 बजे पहुंच गया पता चला की पेन और सिक्का अंदर नहीं ले जाना है इसी के चक्कर में लगभग आधे घंटे इधर से उधर घुमा फिर 1:30 बजे कॉलेज में एंट्री हुई पेपर देने के बाद बस न मिलने के जलालपुर से अकबरपुर पहुंच गया समय लगभग 7 बज चुके थे क्योंकि पेपर 6:00 बजे खत्म हुआ था और टेंपो से आत-आते अकबरपुर में सात बज चुक थे। काफी इंतजार के बाद बस मिला वह भी भरा हुआ ना चाहते हुए भी उसमें चढ़ना पड़ा और खड़ा होकर आते आते 9:30 बज चुके थे घर पहुंचा दिन भर के गर्मी और थकान के कारण बुखार हो गया था दवा खाया और चुपचाप सो गए अगले दिन हालात सही नहीं होने के कारण मोबाइल को छुआ नहीं 20 तारीख को सुबह पता चलता है कि पेपर को रद्द कर दिया गया है यह सुनने के बाद ना चाहते हए भी गाली मुंह से निकल रही थी यह तो मेरी दास्तान थी ऐसे बहुत से लोग होंगे जो मुझे भी ज्यादा दूर से आते होंगे उनको भी कितनी दिक्कत हुई होगी
पैसे के साथ-साथ समय और इतनी परेशानी होने के बाद जब पता चलता है कि पेपर रद्द हो गया तो बहुत दुख होता है सीबीआई जांच लग गई है आगे कुछ नहीं होगा इससे पहले भी कई पेपर रद्द हो चुके हैं नकल रुक नहीं रही हैं सरकार बेहाल है थोड़ा ही सही शर्म आनी चाहिए
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