01/04/23

NEP 2020 : एक उम्मीद “अधिगमकर्ता के सम्पूर्ण विकास में

 NEP 2020 : एक उम्मीद “अधिगमकर्ता के सम्पूर्ण विकास में ”

शीर्षक - किसी भी देश का विकास तभी हो सकता है जब वहाँ के नागरिकता का विकास होगा। प्रत्येक नागरिक का विकास उसकी शिक्षा पर निर्भर करता है। शिक्षा का प्राथमिक उद्देश्य व्यक्ति के ज्ञान और कौशल में वृद्धि करके एक अच्छा नागरिक बनाना।

“शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिसका उपयोग आप दुनिया के बदलने  के लिए कर सकते हैं”

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो हमारा देश शिक्षा की गुणवत्ता की समस्या से जूझ रहा है। इसलिए नई शिक्षा नीति 2020 अधिगमकर्ता के संपूर्ण विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

हमारी समाज की सांस्कृतिक विविधता है उसका हमे सम्मान करते हुए नई शिक्षा नीति का उपयोग करना चाहिए

प्रस्तावना - भारत में पहले की शिक्षा नीति में बहुत समय से कोई बदलाव नहीं किया गया था जो जानकारी आपको पुराने समय में दी जाती थी वही जानकारी अभी तक चली आ रही है। भारत को विकासशील देश से विकसित देश में परिवर्तन के लिए नई शिक्षा नीति लाना बहुत जरूरी था इस ज्वलंत समस्या को देखते हुए भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 34 साल बाद 29 जुलाई 2020 को के० कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020 ) का शुभारंभ किया गया। इस शिक्षा नीति के तहत छात्रों पर शिक्षा के बोझ को कम करके बच्चों के शारीरिक पक्ष, मानसिक पक्ष, नैतिक पक्ष का विकास किया जा सके। भारत के शिक्षा में परिवर्तन कई नीतियों द्वारा कई बार जैसे 1968 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति और 1986 की नई शिक्षा नीति के द्वारा शिक्षा की संरचना और शिक्षा के स्तर में परिवर्तन लाया जाए। परंतु यह परिवर्तन ज्यादा कारगर साबित नहीं हुआ। आधुनिक समय में ज्ञान व कौशल के परिदृश्य में संपूर्ण विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है जिसे देखते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 मील का पत्थर साबित होगा। नई शिक्षा नीति 2020 की संरचना 5+3+3+4 बच्चों के विकास में अधिक लाभप्रद होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के द्वारा विद्यालय व उच्च शिक्षा में बच्चों के उज्जवल भविष्य के मार्ग  को प्रशस्त करने की आशा की जा रही है

उद्देश्य -

<1‌> विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास में NEP 2020 की उपयोगिता :

यह कहने में कोई शक नहीं है कि भारत देश में शिक्षा का स्तर और विद्यार्थी की स्थिति का क्या हाल है फिर भी देश की शिक्षा में बदलाव लाने और उसकी स्थिति को बेहतर बनाने का प्रयास निरंतर किया जा रहा है। विद्यार्थी का जीवन को बदलने और उसके शिक्षा में परिवर्तन लाने में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शैक्षिक परिदृश्य को परिवर्तित कर देगी जिससे  युवाओं को वर्तमान व  भावी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार किया जा सके।

<2‌> भारतीय जड़ो और गौरव से बंधे रहने में :

बच्चों में राष्ट्र के प्रति गौरव की भावना को विकसित करना। हमारा जो समाज है वो सांस्कृतिक विविधताओं में बटा हुआ है। बालक को भारत की संस्कृति का सम्मान करते हुए उसकी अखंडता को बनाए रखने में अग्रसर रहे।

<3> सभी शैक्षणिक  निर्णयों की आधारशिला के रूप में पूर्ण समता और समावेशन :

सभी विद्यार्थियों के व्यक्तिगत विभिन्नता को देखते हुए सभी स्तर के विद्यार्थियों के लिए सामूहिक रूप से NEP 2020 द्वारा शिक्षा के स्तर को व्यापक किया गया है जिससे सभी के पास शिक्षा बहुत सके और विधार्थी अपने गुण और क्षमता के आधार पर अपने अंदर की कमियों को दूर कर उनमें सुधार कर सकें।NEP 2020 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति से बच्चों की पढ़ाई की शुरुआत 3 साल से हो जाएगी क्योंकि शिक्षा के ढांचे में परिवर्तन करके शिक्षा की संरचना 5+3+3+4 किया गया है

शोध समस्या का औचित्य :

किसी भी नीति की प्रभावशीलता उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में या देखा गया कि बच्चों के सभी पक्षों के मजबूत ना होने के कारण उसको सही मार्गदर्शन ना मिलने की वजह से अधिकांश विद्यार्थी आत्महत्या करने की कोशिश कर ली जिसका कारण कई हो सकता है नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मार्गदर्शी सिद्धांत
(1) भावना व प्रयोजन
(2) चरणबद्ध तरीका
(3) वरियता निर्धारण
(4) व्यापकता व समग्रता
(5) समन्वय बनाना
(6) समय की पाबंदी
(7) विश्लेषण व समीक्षा
इसके अलावा भावी कार्यक्रमों व कार्यों के लिए नींव बनाने तथा इस किस सहज प्रगति के लिए कुछ विशिष्ट क्रियाकलापों में निवेश करने से बच्चों के बढ़ रहे अवांछनीय प्रवृत्ति को कम किया जा सकता है ‌

शोध की आवश्यकता और महत्व :

जब से शिक्षा की शुरुआत हुई है और वर्तमान में शिक्षा को देखा जाए तो समय-समय पर शिक्षाविदों द्वारा, सरकारों द्वारा शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए कई सारी योजनाएं और अभियान लाया गया जैसे- सर्व शिक्षा अभियान, ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड, समग्र शिक्षा अभियान, निपुण भारत आदि अभियान चलाया गया ताकि बच्चों का विकास हो सके।
विगत वर्षों में कई सर्वे द्वारा यह पता लगा कि भारत की विभिन्न स्कूलों में शिक्षा का स्तर न हीं बढ़ रहा है और ना ही नामांकन संख्या में। मुख्यता यह पाया गया कि प्रत्येक बच्चे अपने उद्देश्य, क्षमता, योग्यता की पहचान ही नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें सही निर्देशन ही नहीं मिल पाता और वह पढ़ाई के क्षेत्र में पीछे रह जाते हैं और व्यस्क अधिक डिग्री प्राप्त करने के बाद भी नौकरी के लिए इधर-उधर भटकते रहते हैं इन्हीं कारणों की वजह से बच्चों को सभी पक्षों में मजबूत करने के लिए शोध की आवश्यकता पड़ी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उपयोग द्वारा शिक्षा में समावेशन, गुणवत्ता शिक्षा को केवल विद्यालय तक ही सीमित ना रखना बल्कि इसको विद्यालय के बाहर से भी जोड़ना, इसकी प्रमुख विशेषता है। आधुनिक समय में टेक्नोलॉजी का प्रयोग बहुतायत की संख्या में किया जा रहा है जिससे विद्यार्थियों में भटकने, उलझने और अपराध की प्रवृत्ति बढ़ती ही जा रही है

शोध रणनीति :

यह अध्ययन एक ऐतिहासिक और विश्लेषणात्मक अध्ययन है। इसमें सर्व अनुसंधान ,अवलोकन अनुसंधान ,प्रयोगात्मक अनुसंधान और केस अनुसंधान का प्रयोग किया जाएगा।

शोध विधि :

जिस प्रकार एक मैकेनिक को इंजन या मशीन ठीक करने के लिए अपने यंत्र या बॉक्स में से एक उपयुक्त यंत्र की खोज करनी होती है ठीक उसी प्रकार अनुसंधान के अंतर्गत एक समस्या के समाधान हेतु अनुसंधान कर्ता को ऐसे वैज्ञानिक उपकरण या वैज्ञानिक प्रक्रिया का चयन करना पड़ता है इस प्रक्रिया को शोध विधि कहते हैं। जिसके आधार पर निम्न मौलिक आवश्यकताओं की पूर्ति संभव हो सके
<1> समस्या का समुचित उत्तर उपलब्ध हो सके।
<2> विश्वसनीय, वस्तुनिष्ठ एवं वैध परिणामों की प्राप्ति हो।
< 3 > मितव्ययी हो

कोई भी समस्या जब शोधार्थी चुन लेता है तो उसे अपने अध्ययन की सत्यता की क्षमता व प्रमाणिकता के लिए एक निश्चित प्रक्रिया के अनुरूप कार्य करना पड़ता है। यह विधि ऐसी होनी चाहिए जो समस्या से संबंधित शंकाओं का समाधान कर सके। साथ ही सभी सभी मनुष्य एक ही निष्कर्ष पर पहुंच सके।
प्रस्तुत अध्ययन में अनेक विधियों का सर्वेक्षण करने के पश्चात मैंने ऐतिहासिक विधि का अनुसरण किया है। अध्ययन के लिए कई  ग्रन्थों, पुस्तकों , समाचार पत्रों, रिसर्च पेपर का प्रयोग किया गया है।

ऐतिहासिक अनुसंधान विधि :

एक समाज की वर्तमान संस्थाओं, समस्याओं व विचारधाराओं की विशिष्ट स्वरूप को ज्ञात करने के लिए उसके ऐतिहासिक अनुसंधानों की आवश्यकता होती है। अतीत में घटित घटनाओं की विधिवत ढंग से जानकारी नि:संदेह  वर्तमान तथा भविष्य का उन्नयन करने में सहयोग देती है। इसलिए इतिहास का सम्यक अध्ययन तथा ऐतिहासिक घटनाओं की खोज करने के लिए ऐतिहासिक अनुसंधान कार्य संपादित किए जाते हैं।
ऐतिहासिक अनुसंधान वस्तुत: अतीत की घटनाओं से जुड़े तथ्यों व उनकी प्रासंगिकता को स्थापित करते हैं। यह किसी व्यक्ति विचार, आंदोलन, संस्था या समय विशेष पर केंद्रित हो सकते हैं।

शोध समस्या का संभावित अध्यायीकरण : 

प्रथम अध्याय

प्रस्तावना

द्वितीय अध्याय

साहित्य का सर्वेक्षण

तृतीय अध्याय

नई शिक्षा नीति 2020 का क्रियान्वयन अध्ययन

चतुर्थ अध्याय

नई शिक्षा नीति 2020 के गुण एवं दोष का अध्ययन

पंचम अध्याय

निष्कर्ष एवं सुझाव

संदर्भ सूची :

< 1 > शिक्षक चुनौती (नीति सम्बन्धी परिप्रेक्ष्य) - नई दिल्ली शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार
<2> नई शिक्षा नीति ( विशेषांक) - आगरा विनोद पुस्तक मंदिर
< 3> डॉक्टर मालती सारस्वत - भारतीय शिक्षा विकास और उसकी समस्याएं
<4> बी० बी० अग्रवाल - आधुनिक भारत शिक्षा और समस्याएँ आलोक प्रकाशन लखनऊ (इलाहाबाद)
< 5 > विजय शुक्ल - भारतीय शिक्षा और उसकी समस्याओं का अध्ययन (सहारा पब्लिकेशन, प्रयागराज)
<6>  इंटरनेट 
< 7> पत्र पत्रिकाएंँ

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