22/01/22

घास का पाचन

           🌹घास खाने वाले जंतुओं में पाचन 

🌹 🌻घास खाने वाले जंतु उस समय भी लगातार जुगाली करते रहते हैं, जब वे खा न रहे हो | 

🌻वास्तव में वे पहले घास को जल्दी -जल्दी निगलकर आमाशय के एक भाग में भंडारित कर लेते हैं| यह भाग रूमेन (प्रथम आमाशय) कहलाता है | 

🌻रूमिनैन्ट में आमाशय चार भागों में बँटा होता है | 🌻रूमेन में भोजन का आंशिक पाचन होता है, जिसे जुगाल (कड) कहते हैं |परन्तु बाद में जंतु इसको छोटे पिंडको के रूप में पुन:मुख में लाता हैं तथा जिसे वह चबाता रहता है |इस प्रक्रम को रोमन्थन (जुगाली करना ) कहते हैं तथा ऐसे जंतु रूमिनैन्ट अथवा रोमन्थी कहलाते हैं| 🌻घास में सेलुलोस की प्रचुरता होती है, जो एक प्रकार का कार्बोहाईड्रेट है | 🌻किसी रूमिनैन्ट अथवा रोमन्थी पशु, हिरन आदि के रूमेन में सेलुलोस का पाचन करने वाले जीवाणु पाये जाते हैं | बहुत से जंतु एवं मानव सेलुलोस का पाचन नहीं कर पाते | 

🌻जानवरों जैसे- घोड़ों, खरगोश आदि में क्षुद्रांत्र एवं बृहदांत्र के बीच एक थैलीनुमा बड़ी संरचना होती हैं जिसे अंधनाल कहते हैं |भोजन के सेलुलोस का पाचन यहाँ पर जीवाणुओं द्वारा किया जाता है, जो मनुष्य के आहार नाल में अनुपस्थित होते हैं |

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