मीराबाई चानू
भारतीय वेटलिफ़्टर मीराबाई चानू ने टोक्यो ओलंपिक में भारत को पहला मेडल दिला दिया है. चानू ओलंपिक में वेटलिफ़्टिंग में सिल्वर मेडल लाने वाली पहली भारतीय एथलीट हैं.
आपको याद होगा कि 2016 ओलंपिक में डिड नॉट फ़िनिश मैं अपना खेल पूरा नहीं कर पायी तो यह किसी भी खिलाड़ी के मनोबल को तोड़ने वाली घटना हो सकती है. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और रजत पदक दिलाकर यह साबित कर दिया कि अगर आप में हौसला हो तो आप कुछ भी कर सकते हैं
बाँस से ही की वेटलिफ्टिंग की प्रैक्टिस शुरू में करती थे
8 अगस्त 1994 को जन्मी और मणिपुर के एक छोटे से गाँव में पली बढ़ी। मीराबाई बचपन से ही काफ़ी हुनरमंद थीं. मणिपुर की राजधानी इनके गांव से बहुत दूर था फिर इनकी लगन के आगे फीका पड़ गया
मणिपुर की ही महिला वेटलिफ़्टर कुंजुरानी देवी स्टार थीं और एथेंस ओलंपिक में खेलने गई उन्ही को देखकर वह वेटलिफ्टिंग चालू की। उनके कुल मिलाकर 6 भाई बहन थी उसमें यह सबसे छोटी थी। उनके जुनून के आगे उनके माता-पिता को भी हार माननी पड़ी और 2007 में वह वेटलिफ्टिंग का अभ्यास चालू की ।घर की आर्थिक हालत ज्यादा अच्छी नहीं थी फिर भी उनके परिवार ने उनका साथ दिया वह अपने घर से 50 किलोमीटर जाकर ट्रेनिंग लेटी थी
11 साल में वो अंडर-15 चैंपियन बन गई थीं और 17 साल में जूनियर चैंपियन. जिस कुंजुरानी को देखकर मीरा के मन में चैंपियन बनने का सपना जागा था, अपनी उसी आइडल के 12 साल पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड को मीरा ने 2016 में तोड़ा- 192 किलोग्राम वज़न उठा कर रिकॉर्ड तोड़ा
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