09/09/20

कुछ अलग संधि

 -हिंदी विशेषज्ञ: हिन्दी भाषा की अन्य संधियाँ

हिन्दी की कुछ विशेष सन्धियाँ भी हैँ। इनमेँ स्वरोँ का दीर्घ का हृस्व होना और हृस्व का दीर्घ हो जाना, स्वर का आगम या लोप हो जाना आदि मुख्य हैँ। इसमेँ व्यंजनोँ का परिवर्तन प्रायः अत्यल्प होता है। उपसर्ग या प्रत्ययोँ से भी इस तरह की संधियाँ हो जाती हैँ। ये अन्य संधियाँ निम्न प्रकार हैँ–

1. हृस्वीकरण–

(क) आदि हृस्व– इसमेँ संधि के कारण पहला दीर्घ स्वर हृस्व हो जाता है। जैसे –

घोड़ा+सवार = घुड़सवार

घोड़ा+चढ़ी = घुड़चढ़ी

दूध+मुँहा = दुधमुँहा

कान+कटा = कनकटा

काठ+फोड़ा = कठफोड़ा

काठ+पुतली = कठपुतली

मोटा+पा = मुटापा

छोटा+भैया = छुटभैया

लोटा+इया = लुटिया

मूँछ+कटा = मुँछकटा

आधा+खिला = अधखिला

काला+मुँहा = कलमुँहा

ठाकुर+आइन = ठकुराइन

लकड़ी+हारा = लकड़हारा

(ख) उभयपद हृस्व– दोनोँ पदोँ के दीर्घ स्वर हृस्व हो जाता है। जैसे –

एक+साठ = इकसठ

काट+खाना = कटखाना

पानी+घाट = पनघट

ऊँचा+नीचा = ऊँचनीच

लेना+देना = लेनदेन


2. दीर्घीकरण–

इसमेँ संधि के कारण हृस्व स्वर दीर्घ हो जाता है और पद का कोई अंश लुप्त भी हो जाता है। जैसे–

दीन+नाथ = दीनानाथ

ताल+मिलाना = तालमेल

मूसल+धार = मूसलाधार

आना+जाना = आवाजाही

व्यवहार+इक = व्यावहारिक

उत्तर+खंड = उत्तराखंड

लिखना+पढ़ना = लिखापढ़ी

हिलना+मिलना = हेलमेल

मिलना+जुलना = मेलजोल

प्रयोग+इक = प्रायोगिक

स्वस्थ+य = स्वास्थ्य

वेद+इक = वैदिक

नीति+इक = नैतिक

योग+इक = यौगिक

भूत+इक = भौतिक

कुंती+एय = कौँतेय

वसुदेव+अ = वासुदेव

दिति+य = दैत्य

देव+इक = दैविक

सुंदर+य = सौँदर्य

पृथक+य = पार्थक्य


3. स्वरलोप–

इसमेँ संधि के कारण कोई स्वर लुप्त हो जाता है। जैसे–

बकरा+ईद = बकरीद।


4. व्यंजन लोप–

इसमेँ कोई व्यंजन सन्धि के कारण लुप्त हो जाता है।

(क) ‘स’ या ‘ह’ के बाद ‘ह्’ होने पर ‘ह्’ का लोप हो जाता है। जैसे–

इस+ही = इसी

उस+ही = उसी

यह+ही = यही

वह+ही = वही

(ख) ‘हाँ’ के बाद ‘ह’ होने पर ‘हाँ’ का लोप हो जाता है तथा बने हुए शब्द के अन्त मेँ अनुस्वार लगता है। जैसे–

यहाँ+ही = यहीँ

वहाँ+ही = वहीँ

कहाँ+ही = कहीँ

(ग) ‘ब’ के बाद ‘ह्’ होने पर ‘ब’ का ‘भ’ हो जाता है और ‘ह्’ का लोप हो जाता है। जैसे–

अब+ही = अभी

तब+ही = तभी

कब+ही = कभी

सब+ही = सभी


5. आगम संधि–

इसमेँ सन्धि के कारण कोई नया वर्ण बीच मेँ आ जुड़ता है। जैसे–

खा+आ = खाया

रो+आ = रोया

ले+आ = लिया

पी+ए = पीजिए

ले+ए = लीजिए

आ+ए = आइए।


कुछ विशिष्ट संधियोँ के उदाहरण:

नव+रात्रि = नवरात्र

प्राणिन्+विज्ञान = प्राणिविज्ञान

शशिन्+प्रभा = शशिप्रभा

अक्ष+ऊहिनी = अक्षौहिणी

सुहृद+अ = सौहार्द

अहन्+निश = अहर्निश

प्र+भू = प्रभु

अप+अंग = अपंग/अपांग

अधि+स्थान = अधिष्ठान

मनस्+ईष = मनीष

प्र+ऊढ़ = प्रौढ़

उपनिषद्+मीमांसा = उपनिषन्मीमांसा

गंगा+एय = गांगेय

राजन्+तिलक = राजतिलक

दायिन्+त्व = दायित्व

विश्व+मित्र = विश्वामित्र

मार्त+अण्ड = मार्तण्ड

दिवा+रात्रि = दिवारात्र

कुल+अटा = कुलटा

पतत्+अंजलि = पतंजलि

योगिन्+ईश्वर = योगीश्वर

अहन्+मुख = अहर्मुख

सीम+अंत = सीमंत/सीमांत

[7/18, 10:20] S.P. VYAS -हिंदी विशेषज्ञ: Hindi expert :-  S. 

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