सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज
सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक उड़ीसा में हुआ इनके पिता का नाम जानकी बोस तथा माता का नाम प्रभावती था इनके पिता एक वकील थे इनके पिता विधानसभा के सदस्य भी रहे अंग्रेजों ने इनकी पिता को रायबहादुर का खिताब दिया 1909 में इन्होंने प्रारंभिक शिक्षा पूरी कर ली तथा 1916 में b.a. में एडमिशन लिया वह b.a. दर्शनशास्त्र से कर रहे थे उनके जीवन में विवेकानंद जी का बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा सुभाष चंद्र बोस ने 49 वी बंगाल रेजीमेंट में भर्ती के लिए परीक्षा दी लेकिन आंख खराब होने के कारण उन्हें आयोग घोषित कर दिया गया
पिता की इच्छा थी कि सुभाष चंद्र बोस ics बने किंतु सुभाष चंद्र बोस ने पिता की इच्छा को देखते हुए 24 घंटा सोचने का समय मांगा ताकि वो परीक्षा दे या न दे आखिर वह इंग्लैंड जाकर परीक्षा दी और पास हो गए लेकिन वह देश की सेवा में अपना जीवन अर्पण करना चाहते थे इसीलिए नौकरी को छोड़ दी
वह कुछ समय के लिए कांग्रेेस के अध्यक्ष भी रहे उनकी स्वतंत्रता संबंधित गतिविधियों को रोकने के लिए उन्हें नजरबंद कर दिया गया लेकिन 17 जनवरी 1941 को अंग्रेजों की आंख में ढूंल झोंककर वह पेशावर होते हुए रूस पहुंचे पहुंचे जर्मनी में सुभाष चंद्र बोस को नेता की उपाधि दी गई
फ्री इंडिया सेंटर की स्थापना सुभाष चंद्र बोस ने जमीनी में की 13 जून 1943 को वह जापान पहुंचे जहां उन्होंने रास बिहारी बोस से मुलाकात की यहीं पर पहली बार जय हिंद का नारा दिया गया वहीं पर रासबिहारी बोस ने इंडिया इंडिपेंडेंस लीग की स्थापना की लेटेस्ट भारतीय सेना के अधिकारी मोहन सिंह दिमाग में पहली बार आजाद हिंद फौज की स्थापना का विचार आया। जो भारतीय सेना विश्व युद्ध में जापान के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिए थे उनको लेकर मोहन सिंह ने आजाद हिंद फौज की स्थापना 15 दिसंबर 1941 में की जिसे 7 जुलाई 1943 को सुभाष चंद्र बोस को कमान दे दी21 अक्टूबर 1943 को सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में स्वतन्त्र भारतीय आस्थाई सरकार का गठन किया सुबास चंद्र बोस मैं तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा का नारा दिया अंडमान निकोबार दीप का नाम बोलकर शहीद और स्वराज दीप रखा 6 जुलाई 1944 का वीडियो प्रसारण गांधी जी को राष्ट्रपिता कहा
सुभाष चंद्र बोस को देश नायक की उपाधि गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर ने दिया जबकि देशभक्तों का देशभक्त महात्मा गांधी ने कहा और नेता हिटलर ने कहा सुभाष चंद्र बोस 1938 हरिपुरा (गुजरात) तथा 1939 में त्रिपुरी (मध्य प्रदेश) में कांग्रेस के अध्यक्ष बने 1939 में फारवर्ड ब्लाक की स्थापना की और उन्होंने 1943 में आजाद हिंद फौज की कमान संभाली इन्होंने जय हिंद और तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा का नारा दिया। आजाद हिंद फौज दिवस 12 नवंबर 1945 को मनाया जाता है आजाद हिंद फौज की पहली डिवीजन का औपचारिक गठन सितंबर 1942 को हुआ
कैप्टन मोहन सिंह इसके प्रथम सेनापति बने। सुभाष चंद्र बोस के राजनीतिक गुरु चितरंजन दास थे आजाद हिंद फौज के सैनिकों और अधिकारियों को गिरफ्तार कर ब्रिटिश सरकार ने नवंबर 1945 में दिल्ली के लाल किले में उन पर मुकदमा चलाया इसमें तीन अभियुक्त प्रेम सहगल गुरु बख्श सिंह और शाहनवाज को फांसी की सजा तथा राशिद अली को 7 साल की सजा हुई इसके बचाव के लिए कांग्रेस ने आजाद हिंद फौज बचाओ समिति का गठन किया जिसमें भूलाभाई देसाई के नेतृत्व में तेज बहादुर सप्रू कैलाश नाथ काटूज आसफ अली और जवाहरलाल नेहरू प्रमुख वकील थे भारी विरोध होने के कारण वायसराय लॉर्ड वेवल विवश होकर अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए मृत्युदंड की सजा को माफ कर दिया। सुभाष चंद्र बोस ने 4 ब्रिगेड का निर्माण किया था जो इस प्रकार हैं- सुभाष ब्रिगेड, नेहरू ब्रिगेड, गांधी ब्रिगेड तथा रानी लक्ष्मीबाई ब्रिगेड। लक्ष्मी सहगल ,रानी लक्ष्मीबाई ब्रिगेड की कमांडर थी।
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