धारा 370
धारा 370 का इतिहास जब भारत पाकिस्तान का बंटवारा हुआ जब कश्मीर के राजा हरिसिंह स्वतंत्र रहना चाहते थे इसलिए उन्होंने अपने राज्य को स्वतंत्र राज्य घोषित कर दिया है लेकिन तभी पाकिस्तान में कश्मीर को अपने देश में जाने के लिए उस पर सैनिक कार्रवाई कर दी तब राजा हरि सिंह ने अपने राज्य को भारत में मि लाने की इच्छा जाहिर की समय कम होने का भारत की सेना ने सैन्य कार्रवाई करके कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देकर में शामिल कर ले गया
14 मई 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने एक आदेश पारित करके भारत के संविधान एक नया अनुच्छेद 35ए -से जोड़ा गया-
धारा 370 का प्रभाव तथा अनुच्छेद 35a
- हर राज्य मे विधानसभा का कार्यकाल 5 साल होता है लेकिन जम्मू कश्मीर में 6 साल होता है
- भारत का कोई भी कानून जम्मू कश्मीर में नहीं लग सकता है जब तक वह विधानसभा में पारित ना हो
- अगर भारत के किसी राज्य का नागरिक किसी दूसरे देश के नागरिक से शादी कर लेता है तो भारत कबका व नागरिक नहीं रहेगा लेकिन अगर जम्मू कश्मीर का नागरिक अगर पाकिस्तान के नागरिक से शादी कर ले तो उसे भी जम्मू कश्मीर की नागरिकता मिल जाएगी
- किसी अन्य राज्य का नागरिक जम्मू कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकता है
- धारा 370 की वजह से RTE नहीं लागू होता है.
- 35 ए धारा 370 का हिस्सा है
- जम्मू कश्मीर के पास दोहरी नागरिकता होती है
- उनका अलग राष्ट्र ध्वज होता है
- कोई भी अन्य राज्य का नागरिक वहां शिक्षा नहीं ग्रहण कर सकता
- जम्मू कश्मीर का नागरिक किसी भी राज्य में जमीन खरीद सकता है तथा शिक्षा ग्रहण कर सकता है
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