अफस्पा से आप क्या समझते हैं
यह पता का पावर है जिसे सेंड कर दिया गया है अफस्पा का मतलब होता है आर्म्ड फोर्स स्पेशल ,, इसे भारत के पूर्वी राज्यों में जैसे असम मणिपुर धीरपुरा मेघालय अरुणाचल प्रदेश मिजोरम नागालैंड क्षेत्र में लगा इस में सैनिक को विशेष अधिकार दिया जाता है या इसलिए लगा क्योंकि पूर्वी राज्यों में हिंसा बहुत ज्यादा हो रहे थे यह पंजाब का चंडीगढ़ में भी लगाया गया था लेकिन 1997 में इसे यहां से हटा दिया गया 1990 में यह जम्मू कश्मीर मैं भी लगा अभी तक लगा हुआ है
यह पता का पावर है जिसे सेंड कर दिया गया है अफस्पा का मतलब होता है आर्म्ड फोर्स स्पेशल ,, इसे भारत के पूर्वी राज्यों में जैसे असम मणिपुर धीरपुरा मेघालय अरुणाचल प्रदेश मिजोरम नागालैंड क्षेत्र में लगा इस में सैनिक को विशेष अधिकार दिया जाता है या इसलिए लगा क्योंकि पूर्वी राज्यों में हिंसा बहुत ज्यादा हो रहे थे यह पंजाब का चंडीगढ़ में भी लगाया गया था लेकिन 1997 में इसे यहां से हटा दिया गया 1990 में यह जम्मू कश्मीर मैं भी लगा अभी तक लगा हुआ है
- राज्य या केंद्र सरकार के पास किसी भी भारतीय क्षेत्र को “डिस्टर्ब” घोषित करने का अधिकार है।
- अधिनियम की धारा (3) के तहत, राज्य सरकार की राय का होना जरुरी है कि क्या एक क्षेत्र “डिस्टर्ब” है या नहीं। अगर ऐसा नही है तो राज्यपाल या केंद्र द्वारा इसे खारिज किया जा सकता है।
- अफस्पा अधिनियम की धारा (3) के तहत राज्य या संघीय राज्य के राज्यपाल को बजट की आधिकारिक सूचना जारी करने के लिए अधिकार देता है, जिसके बाद उसे केंद्र के नागरिकों की सहायता करने के लिए सशस्त्र बलों को भेजने का अधिकार प्राप्त हो जाता है।
- (विशेष न्यायालय) अधिनियम 1976 के अनुसार, एक बार “डिस्टर्ब” क्षेत्र घोषित होने के बाद कम से कम 3 महीने तक वहाँ पर स्पेशल फोर्स की तैनाती रहती है।
अफस्पा के अधिकार
अफस्पा के अनुसार, जो क्षेत्र “डिस्टर्ब” घोषित कर दिए जाते हैं वहाँ पर सशस्त्र बलों के एक अधिकारी को निम्नलिखित शक्तियाँ दी जाती हैं –
- चेतावनी के बाद, यदि कोई व्यक्ति कानून तोड़ता है और अशांति फैलाता है, तो सशस्त्र बल के विशेष अधिकारी द्वारा आरोपी की मृत्यु हो जाने तक अपने बल का प्रयोग किया जा सकता है।
- अफसर किसी आश्रय स्थल या ढांचे को तबाह कर सकता है जहाँ से हथियार बंद हमले का अंदेशा हो।
- सशस्त्र बल किसी भी असंदिग्ध व्यक्ति को बिना किसी वारंट के गिरफ्तार कर सकते हैं। गिरफ्तारी के दौरान उनके द्वारा किसी भी तरह की शक्ति का इस्तेमाल किया जा सकता है।
- अफसर परिवार के किसी व्यक्ति, सम्पत्ति, हथियार या गोला-बारूद को बरामद करने के लिए बिना वारंट के घर के अंदर जा कर तलाशी ले सकता है और इसके लिए जरूरी, बल का इस्तेमाल कर सकता है।
- एक वाहन को रोक कर या गैर-कानूनी ढंग से जहाज पर हथियार ले जाने पर उसकी तलाशी ली जा सकती है।
- यदि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है तो उसको जल्द ही पड़ोसी पुलिस स्टेशन में अपनी गिरफ्तारी के कारण के साथ उपस्थित होना होता है कि उसको क्यों गिरफ्तार किया गया।
- सेना के अधिकारियों को उनके वैध कार्यों के लिए कानूनी प्रतिरक्षा दी जाती है।
- सेना के पास इस अधिनियम के तहत अभियोजन पक्ष, अनुकूल या अन्य कानूनी कार्यवाही के तहत अच्छे विश्वास में काम करने वाले लोगों की रक्षा करने की शक्ति है। इसमें केवल केंद्र सरकार हस्तक्षेप कर सकती है।
- यह देखा गया कि कई वर्षों में पूर्वी राज्यों में हिंसा कम हुई है किसी की नजर रखते हुए केंद्र सरकार ने 8 क्षेत्र को हटा दिया है 2016 की तुलना में हिंसा ३७,% की कमी आई है इसे भारतीय के अनुसार रखा गया है त्रिपुरा में 2015 मैं इसे हटा दिया गया है
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